
(जय लोक)। कॉकरोच जनता पार्टी ‘सीजेपी’ आजकल चर्चा में है। अमेरिका में बनी इस भारतीय पार्टी के रातों रात लगभग दो लाख फॉलोअर्स हो गये। नौबत यहां तक पहुंची कि सीजेपी के ट्विटर हैंडल पर बैन लगाना पड़ा। वास्तव में सीजेपी एक व्यंग्यात्मक आंदोलन है जिसे 16 मई 2026 को आम आदमी पार्टी के पूर्व कम्युनिकेशंस रणनीतिकार अभिजीत दीपके द्वारा सोशल मीडिया पर शुरू किया गया था। भारत में जन्मे और फिलहाल बोस्टन यूनिवर्सिटी में अध्ययनरत दीपके को दाद देना पड़ेगी कि उन्होंने दुनिया के सबसे मजबूत कीड़े को एक राजनीतिक संकेत में बदल दिया। उन्होंने अमेरिका से इस अभियान की शुरुआत की जिसमें यूरोप के कुछ साथी भी जुड़ गये। दूर देशों की इस शुरुआत ने भारत के राजनीतिक खेमों में हलचल मचा दी।

कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यह एक बुलबुला है जो जल्द ही फुस्स हो जायेगा लेकिन कुछ का विश्वास है कि सीजेपी अगले चुनावों में जनमानस पर असर डालने में कामयाब होगी। चूंकि भारत में बेरोजगारों की संख्या करोड़ों में है और यह वर्ग सक्रिय वोटर होने के साथ सोशल मीडिया से भी जुड़ा रहता है इसीलिये इसके चुनावी असर से इंकार नहीं किया जा सकता। सीजेपी की जादुई शोहरत का ये आलम है कि पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में भी इसी तर्ज पर कॉकरोच अवामी लीग सीएएल’ बना ली गई है जिसके हजारों फॉलोअर्स भी बन गये हैं। एक तरफ अभिजीत दीपके को जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं दूसरी तरफ उनके फॉलोअर्स बढ़ते ही जा रहे हैं। मालूम हो कि कॉकरोच की महिमा केवल महिलाओं को डराने और रसोईघर में धमा चौकड़ी करने तक सीमित नहीं।

वैज्ञानिकों का कहना है कि कॉकरोच दरअसल दुनिया के सबसे ताकतवर प्राणियों में से एक है और परमाणु युद्ध होने के बाद भी पृथ्वी पर सिफज़् इसी का बच पाना सम्भव है। छोटे अंधेरे कोनों और दरारों में छिपे रहने से इस पर विस्फोट का असर होना असंभव है। साथ ही परमाणु युद्ध से होने वाले रेडिएशन का इस पर कोई असर नहीं होगा क्योंकि इसकी रेडीएशन सहने की क्षमता इन्सान से लगभग 15 गुना ज्यादा है। इसके अलावा कॉकरोच की जीवित रहने की क्षमता भी अद्वितीय है क्योंकि यह खीरा यानी ककड़ी के अलावा दुनिया का कोई भी पदार्थ खा कर मजे से जिन्दा रह सकता है।
इसी तरह भारत का बेरोजगार भी बेख़ौफ़ है। बीमारी, बेरोजगारी, पैसों की तंगी, परिवार के ताने और महबूबा की नाराजग़ी से भी इसे कोई फर्क नहीं पड़ता। ये अपनी बेफिक्री और मटरगश्ती में मशगूल रहता है। बीच बीच में टाइम मिलने पर ये किसी सरकारी नौकरी का फॉर्म भी भरता है जिनमें से अधिकांश या तो पेपर लीक होने से निरस्त हो जाती हैं या फिर जुगाड़ वालों के हिस्से में चली जाती हैं।


दशहरा, गणेशोत्सव, होली इसके प्रिय त्यौहार हैं जिनमें चंदा वसूली से लेकर साज सज्जा और डांस वगैरह की गतिविधियों में इसका काफी मनोरंजन होता है। लेकिन बेरोजगार का सबसे प्रिय त्यौहार है चुनाव। इस मौके पर डेढ़ दो महीने का खाना पीना और धन लाभ बड़ी राहत भरा होता है। यही वो समय है जिसमें बेरोजगार खुद को उपयोगी और ताकतवर समझने लगता है। अक्सर नेता इन्हें नौकरी का लालच देकर बेगार भी करवाते हैं और चुनाव खत्म होते ही बाकी वायदों की तरह इस वायदे को भी भूल जाते हैं। देश आगे बढ़ता जा रहा है, विकास का गुणगान हो रहा है, लेकिन बेरोजगार है कि बस बेरोजगार ही है। अब जब इसे कॉकरोच का खिताब दे दिया गया है तब सरकार को सावधान हो जाना चाहिये। जिसे परमाणु युद्ध भी नहीं मार सकता वो भला सरकार से क्या डरेगा। नेता खुशकिस्मत हैं कि बेरोजग़ार अभी संगठित नहीं हैं। अगर सीजेपी के बैनर तले सब इक_े हो गए तो क्या होगा कोई नहीं जानता।
गधा सबसे समझदार
अभी तक तो अपने को ये मालूम था कि यदि किसी व्यक्ति को ‘गधा’ कह दिया जाए इसका मतलब है कि वो बहुत ही बेवकूफ होता है लेकिन अब पता लगा है कि गधा तो घोड़े से भी ज्यादा समझदार होता है न केवल घोड़े बल्कि सभी जानवरों की तुलना में गधा सबसे ज्यादा समझदार होता है और ये पता कैसे लगा है ‘जनरल ऑफ वेटरनरी बिहेवियर’ का एक अध्ययन जो स्पेनिश वैज्ञानिकों ने 300 गधों पर किया था उसके आधार पर ये निष्कर्ष निकला कि आइक्यू में गधों का स्कोर मानव पैटर्न से बिल्कुल मिलता जुलता है यानी अब किसी को यदि गधा कहा जाएगा तो इसका मतलब है कि वह बुद्धिमान और समझदार व्यक्ति है। सारी परिभाषाएं इस अध्ययन ने बदल कर रख दीं। गधे भी भारी खुश है कि अभी तक हमको बतौर गाली संबोधित किया जाता था लेकिन अब पता लगा कि हम लोग कितने बुद्धिमान और समझदार हैं हम लोग सीधे-साधे हैं ज्यादा बोलते नहीं कभी-कभी रेंकने लगते हैं तो इसका ये मतलब थोड़ी है कि हम सबसे ज्यादा मूर्ख और बेवकूफ हैं। सारे गधे मिलकर स्पेनिश वैज्ञानिकों का सम्मान करना चाह रहे हैं जिन्होंने बता दिया कि गधा एक बुद्धिमान और समझदार प्राणी होता है अपने को तो लगता है अब कुत्ता, बिल्ली, घोड़ा पालने की बजाय घर में एक गधा पाल लिया जाए कम से कम कहने को तो रहेगा कि घर में एक समझदार व्यक्ति है भले ही वह जानवर क्यों ना हो।
मंगल से पंगा मत लो
मशहूर उद्योगपति ‘एलन मस्क’ की कंपनी ‘स्पेसएक्स’ के आईपीओ फाइलिंग में लिखा है कि मंगल ग्रह पर इंसानों को बसाने का इरादा है और वो भी थोड़े बहुत नहीं बल्कि दस लाख के आसपास इंसान वहां बसाये जाएंगे। ज्योतिष के आधार पर तो मंगल काफी क्रोधी ग्रह माना जाता है जिन लडक़े लड़कियों की कुंडली में मंगल होता है वे मांगलिक मानी जाती हैं उनकी शादी ब्याह में बड़ी दिक्कतें आती हैं बताया जाता है कि जिनकी कुंडली में मंगल होता है उनकी पहले किसी पेड़ या भगवान से शादी करवा दी जाती है ताकि मंगल का दोष खत्म हो जाए, मंगल का दोष खत्म करने के लिए हनुमान जी की प्रार्थना की जाती है, लोग मंगलवार का उपवास भी रखते हैं, ज्योतिषियों की सलाह पर उंगली में मूंगा भी धारण कर लेते हैं ताकि मंगल ग्रह शांत रहे, अब ऐसे खतरनाक और गुस्सैल ग्रह पर दस लाख लोगों को बसाने की जो स्कीम मस्क साहब चला रहे हैं शायद वे जानते नहीं हैं कि मंगल से पंगा लेना ठीक नहीं है यदि मंगल नाराज हो गया तो सारा धंधा ठप्प हो जाएगा। अभी तक तो चांद पर लोगों को बसाने की बात चल रही थी अब यह चांद को छोडक़र मंगल तक पहुंच गए। अरे भैया वहां लोगों को बसा दोगे तो वहां होटल खुल जाएंगे, चाय के टपरे लग जाएंगे, चाट फुलकी के ठेले स्थापित हो जायेंगे फुटपाथों पर अतिक्रमण हो जाएगा, मंगल की सडक़ों पर जाम लगने लगेगा, लोग बाग पान गुटखा खाकर इधर-उधर थूकने लगेंगे, कोई कहीं भी खड़ा होकर लघु शंका कर देगा इन सबसे मंगल महाराज नाराज नहीं होंगे तो क्या खुश होंगे? अभी भी वक्त है मस्क साहब दस बार सोचो और किसी शांत ग्रह में जाने की बात करो तो चल भी जाएगा मंगल से पंगा लेना बहुत महंगा पड़ेगा ये हम अभी से बता देते हैं फिर ना कहना कि पहले क्यों नहीं बताया था।
सुपर हिट ऑफ द वीक
श्रीमान जी ने अपने बॉस से कहा ‘सर कुछ दिनों की छुट्टी चाहिए’‘छुट्टी एक शर्त पर मिलेगी, ये बताओ कि ‘कटप्पा ने बाहुबली को क्यों मारा?’‘सर हो सकता है बाहुबली ने कटप्पा को छुट्टी नहीं दी हो’ श्रीमान जी ने उत्तर दिया‘बताओ कितने दिन की छुट्टी चाहिए?’ बॉस ने घबरा कर कहा।
Author: Jai Lok






