Download Our App

Home » Uncategorized » राहुल गांधी का सियासी अंदाज बदला तीन राज्यों में फैसलों में दिखी दबंगई

राहुल गांधी का सियासी अंदाज बदला तीन राज्यों में फैसलों में दिखी दबंगई

दक्षिण भारत को बचाए रखना राहुल की सबसे बड़ी राजनीतिक प्राथमिकता
नई दिल्ली। कांग्रेस नेता राहुल गांधी का सियासी अंदाज अब तेजी से बदलता दिख रहा है। पिछले कुछ हफ्तों में तमिलनाडु, केरल और अब कर्नाटक में जिस तरह के फैसले सामने आए हैं, उससे पार्टी के अंदर यह धारणा मजबूत हो रही है कि राहुल गांधी अब पहले से कहीं ज्यादा आक्रामक, व्यावहारिक और निर्णायक भूमिका में नजर आ रहे हैं।
कांग्रेस के अंदर माना जा रहा है कि दक्षिण भारत को बचाए रखना राहुल गांधी की सबसे बड़ी राजनीतिक प्राथमिकता है। फिलहाल कांग्रेस दक्षिण के पांच राज्यों में से चार में या तो सत्ता में है या गठबंधन सरकार का हिस्सा है। ऐसे में बीजेपी के खिलाफ दक्षिण भारत कांग्रेस का सबसे मजबूत राजनीतिक किला है। यही वजह है कि 2028 के कर्नाटक विधानसभा चुनाव और आने वाले लोकसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए राहुल गांधी ऐसे फैसले ले रहे हैं, जो पार्टी को लंबे समय तक फायदा पहुंचा सकें।
इस बदलाव का पहला संकेत तमिलनाडु में देखने को मिला। पार्टी सूत्रों के मुताबिक विधानसभा चुनाव से पहले राहुल गांधी चाहते थे कि कांग्रेस केवल डीएमके पर निर्भर रहने के बजाय अभिनेता से राजनेता विजय के साथ किसी समझौते की संभावनाएं तलाशे। पार्टी के कई वरिष्ठ नेता इस सोच से सहमत नहीं थे और उनका मानना था कि डीएमके से दूरी बनाना जोखिम भरा हो सकता है, लेकिन राहुल गांधी का आकलन था कि विजय की राजनीति में एंट्री ने तमिलनाडु का समीकरण बदल दिया है और कांग्रेस को समय रहते खुद को नए हालात के मुताबिक ढालना होगा। विजय को बड़ा जनसमर्थन मिलने के बाद राहुल की लाइन को पार्टी में गंभीरता से देखा जाने लगा।
वहीं इसके बाद दूसरा बड़ा संकेत केरल में मिला। यहां कांग्रेस नेतृत्व ने अनुभवी नेता केसी वेणुगोपाल की तुलना में वीडी सतीशन को भविष्य के सीएम चेहरे के तौर पर ज्यादा महत्व दिया। इसे पार्टी के अंदर पीढ़ीगत बदलाव और संगठनात्मक रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। माना गया कि राहुल गांधी ने दिल्ली की सत्ता राजनीति से ज्यादा राज्य स्तर पर आक्रामक नेतृत्व को प्राथमिकता दी। दिलचस्प बात यह रही कि सतीशन के समर्थन में अपेक्षाकृत कम विधायक थे, लेकिन इसके बावजूद राहुल गांधी की राय भारी पड़ी।
अब सबसे ज्यादा चर्चा कर्नाटक को लेकर हो रही है। सीएम सिद्दारमैया की जगह भविष्य में डीके शिवकुमार को कमान सौंपने की तैयारी चल रही है। कांग्रेस के अंदर इसे केवल सत्ता संतुलन नहीं, बल्कि 2028 चुनाव की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। सिद्धारमैया अब भी बड़े जनाधार वाले नेता माने जाते हैं और अहिंदा यानी अल्पसंख्यक, पिछड़ा हिन्दू वर्ग और दलित समीकरण पर उनकी मजबूत पकड़ है, लेकिन पार्टी नेतृत्व सरकार के कार्यकाल के बीच बढ़ती एंटी इनकंबेंसी को लेकर सतर्क है।
इन तीनों घटनाओं को साथ रखकर देखें तो कांग्रेस के अंदर राहुल गांधी की कार्यशैली में साफ बदलाव दिखाई देता है। पहले जहां वे अलग-अलग गुटों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करते थे, वहीं अब वे जीत की संभावना और लंबी राजनीतिक रणनीति को ध्यान में रखकर सीधे हस्तक्षेप करने से भी नहीं हिचक रहे। पार्टी के कई नेता निजी बातचीत में कह रहे हैं कि राहुल गांधी अब ‘अपनी राजनीतिक समझ पर पहले से ज्यादा भरोसा’ करने लगे हैं। ऐसे समय में जब राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस कई चुनौतियों से जूझ रही है, दक्षिण भारत को बचाए रखना राहुल गांधी की राजनीति का सबसे बड़ा केंद्र बनता जा रहा है और यही रणनीति आने वाले समय में कांग्रेस की दिशा तय करेगी।

 

घर में घुसकर की जमकर तोडफ़ोड़ अब दे रहे जान से मारने की धमकी

Jai Lok
Author: Jai Lok

RELATED LATEST NEWS

Home » Uncategorized » राहुल गांधी का सियासी अंदाज बदला तीन राज्यों में फैसलों में दिखी दबंगई

Top Headlines

Live Cricket