
जबलपुर (जयलोक)। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा के प्रमोशन के बाद जस्टिस विवेक रूसिया को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया है। जस्टिस विवेक रूसिया शहर के ही कोतवाली क्षेत्र के रहने वाले हैं, कानून एवं न्याय मंत्रालय ने इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी कर दिए हैं। यह बदलाव पूर्व मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा की पदोन्नति के कारण हुआ है, जिन्हें अब देश की शीर्ष अदालत यानी उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया है। अब वे मुख्य न्यायाधीश के रूप में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के दायित्वों का निर्वहन करेंगे।

शहर से शुरू हुआ वकालत का सफर
जस्टिस विवेक रूसिया का जन्म 2 अगस्त 1969 को जबलपुर में हुआ था। उन्होंने अपनी बीएससी और एलएलबी की डिग्रियां प्राप्त कीं और 8 अगस्त 1992 को मध्य प्रदेश राज्य बार काउंसिल में एक अधिवक्ता के रूप में पंजीकृत हुए। उनके पिता स्वर्गीय प्रभाकर रूसिया मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में एक वरिष्ठ अधिवक्ता थे। उन्होंने अपने कानूनी करियर की शुरुआत वरिष्ठ अधिवक्ताओं पी. सदाशिवन नायर, इंदिरा नायर और राजेंद्र मेनन के साथ एक सहयोगी अधिवक्ता के रूप में की थी।

2016 को मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायाधीश
जस्टिस विवेक रूसिया को 7 अप्रैल 2016 को मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में, और 17 मार्च 2018 को स्थायी न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया था। उन्हें जबलपुर स्थित मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के समक्ष मामलों में भारत संघ की ओर से पेश होने के लिए तीन वर्ष की अवधि हेतु भारत सरकार के स्थायी वकील के रूप में नियुक्त किया गया था।


सरकारी और कॉर्पोरेट संस्थाओं में अनुभव
वर्ष 1998 में स्वतंत्र रूप से वकालत शुरू करने के बाद वे कोल इंडिया लिमिटेड, साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड, वेस्टर्न कोल फील्ड लिमिटेड और नॉर्दन कोल फील्ड लिमिटेड जैसी प्रमुख कोयला कंपनियों के पैनल में शामिल हुए। इसके अलावा उन्होंने विद्युत वितरण, बिजली उत्पादन, पावर मैनेजमेंट और पावर ट्रांसमिशन कंपनियों सहित मध्य प्रदेश आवास एवं अधोसंरचना विकास मंडल, लघु उद्योग निगम, छावनी बोर्ड जबलपुर और जबलपुर विकास प्राधिकरण के लिए भी कानूनी पैरवी की। वे भारत सरकार के स्थायी वकील और हाई कोर्ट एडवोकेट्स बार एसोसिएशन के संयुक्त सचिव भी रहे। वे 7 अप्रैल 2016 को हाई कोर्ट के न्यायाधीश और 17 मार्च 2018 को स्थायी न्यायाधीश बने थे।
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Author: Jai Lok






