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फर्जी दस्तावेज से पाटन में सरकारी पैसों की बंदरबाट

कृषि कंपनी के 6 डायरेक्टर सहित 9 पर एफआईआर

जबलपुर (जय लोक)। पाटन में एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। जिसमें कृषि कंपनी ने फर्जी दस्तावेज के सहारे शासन को 39 लाख 67 हजार का चूना लगाया। इस मामले में कलेक्टर के आदेश के बाद 6 डायरेक्टर सहित 9 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है।
मामला पाटन में बेगमगंज सीड प्रोड्यूसर लिमिटेड कंपनी का है। किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग के सहायक संचालक रवि कुमार आम्रवंशी की शिकायत पर पाटन थाना पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। इस पूरे फर्जीवाड़े में कलेक्टर जबलपुर के अनुमोदन के बाद कंपनी के 6 डायरेक्टरों और 3 कर्मचारियों समेत कुल 9 नामजद लोगों के खिलाफ  धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया है। आरोपियों में सचिन दुबे, रंजना पाण्डे, संदीप दुबे, अंशुल बर्मन, नेहा पाण्डे, उमा सिंह, प्रबंधक मनीष चौरसिया, लेखापाल कमलेश साहू और कंप्यूटर ऑपरेटर नीलेश विश्वकर्मा शामिल हैं। यह कार्रवाही किसान मजदूर महासंघ के जिला अध्यक्ष राजेंद्र सिंह की शिकायत पर हुई। जिसमें जांच में गड़बड़ी सामने आने के बाद 9 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए गए। जाँच में यह बात सामने आई कि आरोपियों ने कूट रचित दस्तावेज तैयार किए, फर्जी बैंक खाता दिखाया और किसानों के नाम पर फर्जी सूची बनाकर शासकीय राशि का गबन किया। पाटन थाना पुलिस ने इस मामले में आईपीसी की धारा 420, 467, 34 के तहत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना शुरू कर दी है।

फर्जी दस्तावेजों से कागजों पर नियुक्तियों का खेल
जाँच में पता चला कि बेगमगंज सीड प्रोड्यूसर लिमिटेड कंपनी के डायरेक्टरों ने लाखों का गबन किया। कंपनी के रिकॉर्ड में बिना किसी प्रस्ताव या निर्णय के ही प्रबंधक मनीष चौरसिया, कंप्यूटर ऑपरेटर नीलेश विश्वकर्मा और लेखापाल कमलेश साहू के नियुक्ति आदेश जारी कर दिए गए। इन नियुक्ति पत्रों पर न तो कोई तारीख दर्ज थी और न ही हस्ताक्षर एक समान थे। जाँच दल ने इन सभी नियुक्ति आदेशों को पूरी तरह फर्जी और कूटरचित पाया है, जिन्हें केवल कागजी खानापूर्ति और धोखाधड़ी को अंजाम देने के लिए तैयार किया गया था।

बैंक खाता और किसानों की सूची में गड़बड़ी
उपार्जन कार्य के लिए कंपनी के पास 50 लाख रूपये की नकदी या के्रडिट लिमिट होना अनिवार्य होता है। जिसके लिए बैंक का खाता दर्शाया जाता है।
कंपनी द्वारा जिस खाते की जानकारी दी गई उसका सत्यापन किया गया। जिसमें बड़ी गड़बड़ी सामने आई। खाते के सत्यापन में पता चला कि यह खाता बेगमगंज सीड प्रोड्यूसर लिमिटेड कंपनी का है ही नहीं। इसके अलावा कंपनी ने जो किसानों की सूची जमा की थी, उसमें किसी का पता या अन्य जानकारियाँ भी नहीं थीं। इतना ही नहीं जाँच दल ने जब दर्शाए गए नम्बरों पर बात की तो लोगों ने कंपनी का सदस्य होने से साफ  इनकार कर दिया।

सरकारी खजाने को लगाई लाखों की चपत
कंपनी के डायरेक्टर संदीप दुबे, अन्य पदाधिकारियों और कर्मचारियों ने मिलकर प्रासंगिक व्यय, हैंडलिंग और कमीशन के नाम पर कुल 39 लाख 67 हजार 7 सौ 81 रुपये की राशि फर्जी दस्तावेजों के दम पर हासिल कर ली। यह पूरी रकम शासन को आर्थिक नुकसान पहुंचाकर धोखाधड़ी से हड़पी गई थी। मामला उजागर होने के बाद कृषि विभाग के अधिकारियों ने थाने पहुंचकर लिखित आवेदन दिया, जिसके बाद कार्यवाहक प्रधान आरक्षक राममिलन रजक ने केस दर्ज किया।

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Jai Lok
Author: Jai Lok

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