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Home » News » 25 से 30 हजार में बिक रही चोरी की रेत प्रशासन के खाते में आ रहा शून्य, नवंबर 25 से रेत खदानें बंद है तो कहाँ से खोदी जा रही रेत, फिर पकड़ी गई कई गाडिय़ाँ

25 से 30 हजार में बिक रही चोरी की रेत प्रशासन के खाते में आ रहा शून्य, नवंबर 25 से रेत खदानें बंद है तो कहाँ से खोदी जा रही रेत, फिर पकड़ी गई कई गाडिय़ाँ

जबलपुर (जयलोक)। जिले में खनन माफिया इस कदर बेलगाम हो चुका है कि प्रशासनिक अमला लाख प्रयासों के बाद भी रेत का अवैध उत्खनन नहीं रोक पा रहा है। ऐसा नहीं है प्रशासन कार्यवाही नहीं कर रहा है लेकिन निचले स्तर से लेकर ऊपर बैठे अधिकारी जिला कलेक्टर की मंशा के अनुरूप कार्यवाही नहीं कर रहे है। खनिज अधिकारी भी लगातार क्षेत्र के जिम्मेदारों को कार्रवाही के निर्देश दे रहे हैं लेकिन उसके अनुरुप परिणाम सामने नहीं आ पा रहे हैं। सबको पता है और सबके सामने है कि अवैध रेत से भरी रोजाना 80 से 100 गाडिय़ाँ शहर की सडक़ों में इधर से उधर दौड़ रही हैं। लेकिन हफ्ते दस दिन में कलेक्टर को आंकड़े दिखाने के उद्देश्य से एक दो वाहनों को पकड़ कर रस्म आदायगी की जा रही है। जिला खनिज अधिकारी भी अवैध उत्खनन के मामलों में सख्त प्रकरण तैयार करवा रहे हैं और जुर्माने की बड़ी राशि भी अधिरोपित हो रही है।

अभी हाल ही में 6 करोड़ रुपयों का जुर्माना विभिन्न प्रकरणों में अधीरोपित किया गया है। बहुत से नए मामले कोर्ट में चल रहे है। नवंबर 2025 से वैध खदानें बंद हैं, जिससे सरकार को करोड़ों का नुकसान हो रहा है, लेकिन रक्षक ही भक्षक बनकर चुप बैठे हैं। जमीनी स्तर पर जिनकी  जिम्मेदारी अवैध खनन को रोकने की है वो ही इसको बढ़ावा दे रहे है और वरिष्ठ अधिकारियों तक समय पर मामलों की जानकारी नहीं पहुंच पा रही है।

बेलखाड़ू, बरगी, सिहोरा और चरगंवा में माफिया बेखौफ  है। यहां रेत के साथ साथ सरकारी मुरम के पहाड़ों को बेखोफ दिनदहाड़े खोदा जा रहा है। इस व्यापार से जुड़े सूत्रों का दावा है कि एनजीटी से पास 31 खदानों का साढ़े 16 करोड़ का टेंडर जानबूझकर उलझाया गया ताकि अवैध कमाई का खेल चलता रहे। चर्चाओं में इस बात का अनुमान लगाया जा रहा है कि 5 लाख घनमीटर रेत की सरकारी नीलामी फेल होने के पीछे अफसरों और माफिया की बड़ी सांठगांठ है, जिसकी फाइलें अब भोपाल तलब हुई हैं। सच्चाई को बाहर लाने के लिए निष्पक्ष जाँच की जरूरत है।

रात होते ही नर्मदा, हिरण और गौर नदी में पोकलेन और हाइवा उतर जाते हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस और प्रशासन की नाक के नीचे रातभर ट्रैक्टर दौड़ रहे हैं, क्योंकि हर गाड़ी के हिसाब से तय कमीशन ऊपर तक जा रहा है।

वैध खदानें बंद रखकर बाजार में रेत की कृत्रिम किल्लत पैदा कर दी गई है। जबलपुर में जो रेत आसानी से मिलनी चाहिए थी, उसके दाम अब 28 से 30 हजार रुपए प्रति हाइवा पहुंच चुके हैं। पड़ोसी जिले कटनी में तो यह आंकड़ा 50 हजार रुपए छू रहा है। आम आदमी का घर बनाना दूभर हो चुका है और जिम्मेदार आंखें मूंदकर बैठे हैं।

65 डंपर रेत जप्त

शहपुरा तहसील के ग्राम नीमखेड़ा झांसीघाट में कार्रवाई कर अवैध रूप से संग्रहित 65 डंपर रेत जप्त की है। एसडीएम शहपुरा मदन सिंह रघुवंशी से प्राप्त जानकारी के अनुसार जप्त की गई रेत का उत्खनन और भंडारण वाले व्यक्तियों के बारे में जानकारी एकत्रित की जा रही है।

रास्ता खोदकर भर दिया था पानी

सिहोरा अनुभाग के अंतर्गत पोंडा तहसील के ग्राम खिन्नी में खनिज, राजस्व और पुलिस अधिकारियों की संयुक्त टीम ने छापामार कार्यवाही कर हिरन नदी से रेत के अवैध उत्खनन करते पाये जाने पर दो जेसीबी, एक दस चक्का हाइवा और एक ट्रैक्टर-ट्राली को जब्त किया है। वहीं मौके से दोनों जेसीबी मशीनों के ऑपरेटरों (चालकों) को भी पकड़ा गया। पकड़े गए चालक ने बताया कि प्रशासन और लोग यहां ना पहुँच सकें इसलिए यहां आने वाले मार्ग को खोदकर उसमें पानी भर दिया गया था। ताकि कोई यहां तक ना आ सके।

कार्यवाही के दौरान रेत का अवैध उत्खनन करते पाये जाने पर दोनों जेसीबी के ऑपरेटर

मोहम्मद रहमान उर्फ  मोहम्मद रियाज मंसूरी तथा मोहित बर्मन को पकड़ कर गोसलपुर थाने में पूछताछ की जा रही है। पूछताछ के दौरान एक जेसीबी के आपरेटर मोहम्मद रियाज मंसूरी पुलिस को बताया कि खिन्नी में हिरन नदी से रेत का अवैध उत्खनन चन्नोटा निवासी बलराम ऊर्फ  गोलू सिंह द्वारा कराया जाता है। वहीं जेसीबी ऑपरेटरों ने एक जेसीबी मशीन अरुण प्रताप भदौरिया ऊर्फ  सोनू भदौरिया निवासी चन्नोटा तथा दूसरी जेसीबी पनागर के शुभम पटेल की होना बताई है। कार्यवाही में जप्त दस चका हाइवा के मालिक का पता लगाया जा रहा है। संलिप्त व्यक्तियों के विरुद्ध खनिज नियमों के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है।

 

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Jai Lok
Author: Jai Lok

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