
मनोवैज्ञानिकों ने जाहिर की चिंता, आपसी रिश्तों पर अधिक ध्यान देने की जरूरत
जबलपुर (जयलोक)। हाल ही में एक आंकड़ा सामने आया है जिसमें जबलपुर जिले में पिछले 5 महिनों में 38 हत्याएं विभिन्न थाना क्षेत्रों के अंतर्गत दर्ज हुई हैं। चौकाने वाली बात यह नहीं हैं कि इतनी बड़ी संख्या में हत्याएं हुईं हैं। इससे अधिक चौकाने वाली बात यह है कि इन सभी हत्याओं को अंजाम देने वाले आपसी रिश्ते के लोग ही निकले। एक मामले में तो बेटे ने ही अपनी माँ को नशे की हालत में मौत के घाट उतार दिया। इस मनोप्रवृत्ति पर दैनिक जयलोक ने मनोवैज्ञानिक और मनोचिकित्सक से चर्चा की। उन्होंने भी बदलते परिवेश में कमजोर होते रिश्तों को इसका मुख्य कारण बताते हुए चिंता व्यक्त की। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार अधिकांश हत्याओं में आरोपी मृतकों के करीबी, दोस्त, प्रेमी, रिश्तेदार, पड़ोसी या परिचित ही निकले।

संस्कार की कमी ने बढ़ाई दूरियाँ
मनोचिकित्सक डॉ. गुरमीत सिंह का कहना है कि ऐसे मामलों में देखा जाता है कि संस्कार की कमी रिश्तों में दूरियाँ बढ़ा रही हैं। घर के बड़े बुजुर्गों की संख्या कम होती जा रही है, जो युवाओं का मार्गदर्शन करते थे और इस तरह के गलत रास्तों पर जाने से रोकते थे। लेकिन बदलते समय में जो संस्कार युवाओं को अपने बुुजुर्गों से नहीं मिल पाया है उसे वे सोशल मीडिया पर खोज रहे हैं। यहीं से अपराध करने की प्रवृत्ति पनपती है। सोशल मीडिया, टीवी और मोबाईल से धीरे-धीरे मन में अपराध करने का भाव पैदा हो रहा है और यह भाव अपनों से दूरी बनाकर उनकी हत्या करने की साजिश रच रहा है।

ये हैं मामले
दोस्त निकला हत्यारा
गोहलपुर क्षेत्र में आकाश अहिरवार हत्याकांड शहर के सबसे दर्दनाक मामलों में शामिल रहा। मां कलावती बाई ने अपने बेटे को सडक़ किनारे खून से लथपथ हालत में देखा। आरोप है कि अपराध को अंजाम देने वाले ये वहीं युवक थे जिनके साथ आकाश रोज उठता-बैठता था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार मां लगातार मदद की गुहार लगाती रही, लेकिन आरोपी हमला करते रहे। गंभीर घायल आकाश ने मां की गोद में दम तोड़ दिया।


प्यार का अंत हत्या में बदला
पाटन क्षेत्र की युवती तनु चक्रवर्ती अपने प्रेमी के साथ जीवन बिताने का सपना देख रही थी। लेकिन वही प्रेमी उसकी मौत की वजह बन गया। पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी ने अपने साथियों के साथ युवती को सुनसान इलाके में बुलाया और गला दबाकर हत्या कर दी। बाद में शव छिपाने की कोशिश भी की गई।
प्रेम संबंधों में बहा खून
मझौली क्षेत्र में अर्जुन सिंह उर्फ अज्जू गोंड की हत्या प्रेम संबंधों के विरोध में हुई। युवती का परिवार इस रिश्ते से नाराज था। विवाद इतना बढ़ा कि प्रेमिका के भाई ने कुल्हाड़ी से हमला कर दिया। घायल अर्जुन अस्पताल पहुंचने से पहले ही दम तोड़ बैठा।
दोस्ती का दर्दनाक अंत
पाटन में 20 वर्षीय मनीष चढ़ार की हत्या ने यह साबित किया कि अब मामूली विवाद भी जानलेवा बनते जा रहे हैं। गांव के ही युवकों ने पहले विवाद किया और फिर गमछे से गला घोंटकर हत्या कर दी। परिवार को देर तक लगा कि बेटा सो रहा है, लेकिन जब सच्चाई सामने आई तो पूरे गांव में मातम पसर गया।
प्रेम संबंध में हत्या
कुंडम क्षेत्र में दिलीप पटेल उर्फ मिंटू की हत्या के पीछे प्रेम संबंध और शक की कहानी सामने आई। आरोपियों ने हत्या के बाद शव नदी में फेंक दिया ताकि घटना को छिपाया जा सके।
मां सुनती रही बेटी की चीख
19 वर्षीय ऋचा रजक की हत्या ने हर किसी को भावुक कर दिया। युवती पर चाकू से हमला किया गया। मां-बेटी को बचाने के लिए चीखती रही, लेकिन उसकी आंखों के सामने बेटी की जिंदगी खत्म हो गई। जांच में सामने आया कि आरोपी परिचित थे और पहले से विवाद चल रहा था।
बच्चों से छिन गई मां
पनागर क्षेत्र में महिला का शव नहर में मिलने से सनसनी फैल गई। शुरुआती जांच में हत्या कर शव फेंके जाने की आशंका जताई गई। सबसे दर्दनाक दृश्य छोटे बच्चों का था, जो लगातार अपनी मां को तलाशते रहे।
शराब और गुस्से ने छीनी जान
भेड़ाघाट, मदनमहल, संजीवनी नगर, रांझी और गोराबाजार सहित कई थाना क्षेत्रों में शराब पार्टी के दौरान हुए विवाद हत्या की वजह बन गए। कहीं उधार के पैसों को लेकर चाकू चले तो कहीं छोटी बहस जानलेवा साबित हुई। कई मामलों में आरोपी मृतकों के रोजमर्रा के साथी और दोस्त निकले।
प्रेम संबंध बने बड़ी वजह
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार हत्या के कई मामलों में प्रेम संबंध मुख्य कारण बनकर सामने आए। शादी का दबाव, अवैध संबंधों का शक, सोशल मीडिया विवाद, ब्रेकअप और बदले की भावना ने कई जिंदगियां खत्म कर दीं। विशेषज्ञों का कहना है कि युवाओं में संवाद और सहनशीलता की कमी चिंता का विषय बनती जा रही है। छोटी भावनात्मक असफलताएं अब हिंसक रूप ले रही हैं।
बचने के लिए सोशल मीडिया का सहारा
हत्याओं के मामले में आरोपी पुलिस से बचने के लिए कई दिनों पूर्व से ही तैयारी में लग जाता है। जिसमें उसे टीवी सीरीयल और मोबाईल के जरिए पुलिस से बचने का सहारा ले रहे हैं। इनमें क्राइम सीरीयल इनके लिए अहम रोल अदा कर रहे हैं जिनमें वारदात से लेकर उससे बचने तक की जानकारी युवाओं को मिल रही है।
38 हत्याओं का आंकड़ा
दोस्तों द्वारा हत्या के 9 मामले, अन्य संबंधों में 8 मामले, प्रेमियों द्वारा हत्या के 5 मामले, परिचितों द्वारा हत्या के 5 मामले, अज्ञात आरोपियों द्वारा हत्या के 4 मामले, पुत्र द्वारा हत्या के 3 मामले, पड़ोसी द्वारा हत्या के 2 मामले, पार्टनर द्वारा हत्या का 1 मामला, मृतक के भाई द्वारा हत्या का 1 मामला। आंकड़े बताते हैं कि अधिकांश हत्याएं करीबी रिश्तों और परिचितों के द्वारा की गई हैं ये हत्याएं सामाजिक रिश्तों में बढ़ते तनाव और अविश्वास की गंभीर तस्वीर पेश करती हैं।
इनका कहना है…
पारिवारिक विवाद, नशा और आपसी तनाव कई अपराधों की मुख्य वजह बन रहे हैं। पुलिस लगातार जनजागरूकता अभियान, निगरानी और संवेदनशील क्षेत्रों में सक्रिय कार्रवाई कर रही है। समाज और परिवारों को भी संवाद बढ़ाकर रिश्तों में बढ़ती कटुता रोकने की दिशा में आगे आना होगा। हत्या जैसे गंभीर अपराधों पर नियंत्रण और आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकता है। जिले में दर्ज सभी मामलों की गहनता से जांच कर त्वरित कार्रवाई की जा रही है। अधिकांश मामलों में आरोपियों को चिन्हित कर गिरफ्तार किया जा चुका है।
संपत उपाध्याय, पुलिस अधीक्षक
बुजुर्गों की जगह सोशल मीडिया ने ली- डॉ. गुरमीत सिंह, मनोचिकित्सक
आज के दौर में युवा पीढ़ी अपने बुजुर्गों से दूर होती जा रही है। उनका अधिकांश समय मोबाईल और टीवी में व्यतीत हो रहा है। ऐसे में बढ़े बुजुर्गों से दूरी बन रही है और किसी समस्या से निपटने के लिए युवा बुजुर्गों से संवाद करने के बजाया टीवी सीरीयल और सोशल मीडिया में इसका हल खोज रहा है। जिससे युवाओं में वारदातों की मानसिकता बढ़़ती जा रही है। ऐसे में मामलों में परिजनों को अपने बच्चों से बातें करना चाहिए। उनके जीवन में क्या चल रहा है इस बात की जानकारी अभिभावकों को होना जरूरी हैं। ताकि उनका सही मार्गदर्शन किया जा सके।
परिवार में लड़ाई झगड़ों का बच्चों के मन में अधिक प्रभाव-डॉ. अवंतिका वर्मा, मनोवैज्ञानिक
आज के परिवेश में संवेदनाओं पर गहरा असर पड़ रहा है। एक दूसरे के प्रति भावनाएं कम होती जा रही है। इस तरह की मानसिकता वाले युवा को केवल अपनी चिंता है सिर्फ अपना अच्छे बुरे के बारे में वह सोच रहा है। इसका सबसे बड़ा कारण पारिवारिक पृष्ठभूमि है। बच्चा परिवार में बचपन से जो देखता है वहीं उसके मन में चलता है। परिवार में लड़ाई झगड़ों का बच्चों के मन में अधिक प्रभाव पड़ता है। बच्चा बचपन से ही इमोशनलैस होता है। वह अपनी भावनाएं परिवार के साथ प्रदर्शित नहीं कर पा रहा है। इसका सबसे बड़ा हल यहीं है कि अभिभावकों को अपने बच्चों से बातें करना चाहिए। अगर उन्हें बच्चों के व्यवहार में परिवर्तन दिखे तो उस पर गौर कर चिकित्सक की सलाह लेना चाहिए। ताकि बच्चा आगे चलकर कुछ गलत कदम ना उठा सके। आज का युवा टीवी सीरियल और मोबाईल को ही अपनी असल जिंदगी मान रहा है। जो वह टीवी सीरियल और मोबाईल पर देखता है उसे रीयल जिंदगी भी वैसी ही नजर आती है। ऐसे में बच्चों को सोशल मीडिया और मोबाईल से दूरी बनाएं और उन्हें रीयल और रील लाईफ का फर्क समझाएं।
Author: Jai Lok






