
यात्रियों का बना रहे थे वीडियो, आरपीएफ ने की कार्रवाही
जबलपुर (जय लोक)। अब तक फर्जी पत्रकारों का जाल एसपी, कलेक्टर और अन्य शासकीय कार्यालयों तक फैला हुआ था, लेकिन फर्जी पत्रकारों की गैंग अब रेलवे स्टेशन में भी दिखने लगी है। एक ऐसे ही मामले में आरपीएफ ने चार लोगों को गिरफ्तार किया है। जो स्टेशन में यात्रियों और वेंडरों के वीडियो बनाकर उन्हें धमका रहे थे। आरोपियों का एक साथी मौके से फरार हो गया जिसकी तलाश की जा रही है।

बताया जा रहा है कि रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म दो व तीन में कुछ लोगों को यात्रियों और वेंडरों के साथ अभद्रता करते हुए देखा गया। आरपीएफ जवान योगेन्द्र ङ्क्षसह की नजर जब इन युवकों पर पड़ी तो उनकी स्थिति को देखते हुए उन्हें संदेह हुआ। जिसके बाद युवकों से पूछताछ के दौरान उनके पास रेलवे परिसर में प्रवेश का कोई वैध अधिकार पत्र नहीं मिला। उनसे जब पूछताछ की गई तो उन्होंने खुद को पत्रकार बताया। हालांकि इनके पास पत्रकार होने के भी कोई सबूत नहीं मिले। जिसके बाद आरपीएफ ने चार युवकों को गिरफ्तार कर लिया। वहीं मौका पाकर एक युवक भागने में सफल रहा।

यात्रियों और वेंडरों से अभद्रता
आरपीएफ का कहना है कि पकड़े गए युवकों का नाम तुलसी मोहल्ला निवासी रोहित रजक, देवेंद्र विनोदिया, हनुमानताल निवासी संतोष लालवानी और सदर निवासी फिरोज खान उर्फ अक्कू के रूप में हुई है। घमापुर निवासी दीपक सोनकर फरार है। ये सभी मिलकर कई दिनों से रेलवे स्टेशन में डेरा जमाए हुए थे और यात्रियों और वेंडरों को धमकाकर उनके वीडियो बनाकर अवैध वसूली कर रहे थे। जांच में सामने आया कि गत 15 जून की रात सभी आरोपित प्लेटफार्म नंबर दो-तीन पर पहुंचे थे, जहां उन्होंने यात्रियों, महिलाओं एवं वेंडरों के मोबाइल से वीडियो बनाए और उनसे अभद्र व्यवहार किया। आरोपियों ने स्वयं को मीडियाकर्मी बताया और वेंडरों को धमकाया। सभी के खिलाफ रेल अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर कार्रवाई की गई है।


इनका कहना है
खुद को पत्रकार बताकर वेंडरों और यात्रियों से बदसलूकी करने वाले चार लोगों को पकड़ा गया है। इनके पास से ऐसा कोई दस्तावेज नहीं मिला जिससे यह साबित हो सके कि ये पत्रकार हैं।
– राजीव खरक, आरपीएफ थाना प्रभारी
जबलपुर (जयलोक)। युवा अवस्था में एक 45 वर्षीय व्यक्ति को आये हार्ट अटैक के एक मामले में दो निजी अस्पतालों के द्वारा केस की विषमता को देखते हुए मरीज को नागपुर ले जाने के लिए कह दिया गया। एक निजी अस्पताल ने तो मरीज को नागपुर के निजी अस्पताल में भर्ती करने की जिद्द ही पकड़ ली थी। लेकिन फिर परिजनों ने विचार विमर्श करने के बाद उन्हें अपोलो जबलपुर हॉस्पिटल में भर्ती करवाया। इसके पूर्व मरीज के परिजनों ने बताया कि जब उनके मन में असमंजस की स्थिति थी तो सबसे पहले वह मरीज की रिपोर्ट लेकर अपोलो हॉस्पिटिल के कार्डियक यूनिट में पहुंचे। यहां पर उनकी मुलाकात अनुभवी कार्डियोलॉजिस्ट डॉ गुंजन घोड़ेश्वर से हुई। डॉ गुंजन जबलपुर के उन चुनिंदा अनुभवी कार्डियोलॉजिस्ट में शामिल हैं जो की विषम परिस्थितियों वाले हार्ट अटैक के समय एडवांस और क्रिटिकल केयर मैनेजमेंट में महारत रखते हैं। वे एम्स हॉस्पिटल नागपुर में भी सेवाएं दे चुके हैं और आधुनिक मशीनों के उपयोग से हार्ट अटैक के समय उसके उपचार के बेहतर विकल्पों पर लगातार काम कर रहे हैं। डॉ. गुंजन ने मरीज के परिजनों को बताया कि मरीज का हार्ट वर्तमान में 40 प्रतिशत कार्य कर रहा है। और बीपी-शुगर जैसी समस्याएं भी मरीज को है। मरीज का नाम न उजागर करने के साथ शर्मा परिवार ने बताया कि उनके सामने अब बड़ी चुनौती थी। डॉ गुंजन ने परिवार को यह भी बताया कि एंडोस्कोपी की रिपोर्ट में दो बड़े ब्लॉकेज नजर आ रहे हैं जो 80 से 90 प्रतिशत तक है और यह सामान्य ब्लॉकेज नहीं है बल्कि बड़े ब्लॉकेज हैं। इनके निराकरण का तरीका यही है कि इसमें 24 एमएम की साइज वाले बड़े स्टंट डाले जाएं। इसके लिए अपोलो जबलपुर हॉस्पिटल में वह तकनीक और वह आधुनिक मशीन उपलब्ध है जिसके माध्यम से हार्ट की अल्ट्रासाउंड कर यह पता लगाया जा सकता है कि जो स्टंट डालने हैं वह कितने मोटे होंगे, किस पदार्थ के होंगे, और किस साइज के होंगे। इतनी अधिक बारीक से महत्वपूर्ण जानकारी जुटाने में सक्षम आधुनिक मशीन इस प्रकार के जटिल हार्ट के ऑपरेशन में बहुत कारगर साबित होती है। अभी तक यह पद्धति जबलपुर में विकसित नहीं थी। इसलिए सीधे मरीजों को नागपुर का रास्ता दिखा दिया जाता था।
लेकिन जबलपुर में अपोलो अस्पताल में अब आईलेक्स तकनीक के माध्यम से यह संभव हो रहा है।
नसों के माध्यम से दिल का अल्ट्रा साउंड कर अब जटिल हार्ट के ऑपरेशन को भी सफलतापूर्वक और बिना जीवन के अधिक रिस्क के किया जा सकता है। ऑपरेशन के 2 दिन बाद मरीज को घर जाने की अनुमति भी मिली साथ में उन्हें इस बात का परामर्श भी दिया गया उन्हें आगे अपने स्वस्थ जीवन के लिए क्या-क्या कदम उठाने हैं। यह केवल एक मामला नहीं है बल्कि जबलपुर में बढ़ते चिकित्सा के दायरे और दूसरे शहरों पर आधुनिक इलाज के लिए हमारी निर्भरता को कम होने का मामला भी है।
Author: Jai Lok






