
जबलपुर (जय लोक)। शहर की 17 लाख से अधिक आबादी को वर्तमान में पीने के पानी की काफी परेशानी हो रही है। स्थिति को देखते हुए नगर निगम प्रशासन ने अपनी रणनीति में बदलाव किया है। पेयजल की महत्वता को समझते हुए और किसी भी आपातकालीन स्थिति का सामना करने के लिए यह रणनीति बनाई गई है कि फिलहाल पेयजल की सप्लाई एक ही टाइम पर की जाएगी। इस रणनीति के तहत अगर बारिश आने में एक माह का विलंब और हो जाता है तो भी शहर के लोगों को एक महीने तक सीमित मात्रा में पेयजल उपलब्ध कराया जा सके।
नगर निगम के कार्यपालन यंत्री एवं जल विभाग प्रभारी कमलेश श्रीवास्तव ने जयलोक को जानकारी देते हुए बताया कि भविष्य की संभावनाओं को देखते हुए यह रणनीति तैयार की गई है। प्रयास किया जा रहा है कि हर क्षेत्र में चाहे वो बस्तियाँ हो या कॉलोनियाँ सभी जगह बराबरी से पेयजल उपलब्ध हो सके।
बारिश की आस लगाए बैठे लोगों के लिए भीषण गर्मी परेशानी का कारण बन गई हैं। एक ओर जहां भीषण गर्मी दिन का चैन और रातों की नींद उड़ा रही है तो वहीं शहरवासियों की प्यास बुझाने वाले जलाशय भी सूखने की कगार पर पहुँच गए हैं। आलम यह है कि इन जलाशयों में कुछ दिनों का ही पानी शेष बचा है। अगर कुछ दिनोंं में अच्छी बारिश नहीं हुई तो जलाशयों का बचा हुआ पानी भी खत्म हो जाएगा। जिससे शहर वासियों को बूंद बूंद पानी के लिए तरसना पड़ेगा। अभी भी शहर के कई हिस्सों में पानी की सप्लाई नहीं हो रही है। इसके साथ ही जिन क्षेत्रों में पानी की सप्लाई की जा रही है वहां एक ही समय पर जलापूर्ति की जा रही है।

कम पड़ रहे निगम के टैंकर
पानी की समस्या के बीच निगम प्रशासन द्वारा टैकरों से क्षेत्रों में पानी की सप्लाई की जा रही है। लेकिन शहरवासियों का कहना है कि टैंकरों से पानी की सप्लाई कम पड़ रही है। आधे शहर में टैंकरों से पानी की सप्लाई कम पड़ रही है। अब लोग बारिश की आस लगाए बैठे हैं। ताकि पानी की सप्लाई दोनों समय हो सके।

बरगी बांध में केवल 5 मीटर पानी शेष
मध्य प्रदेश की जीवन रेखा मानी जाने वाली माँ नर्मदा नदी से ही कई छोटे बड़े गांव से लेकर बड़े-बड़े शहरों तक पानी पहुंचाया जाता है। बरगी बांध में अब मात्र 5 मीटर पानी ही शेष बचा है। जबकि बरगी बांध में बरसात के सीजन में 422.75 मीटर पानी था।


कई इलाकों में होता है नर्मदा का जल सप्लाई
बरगी बांध से नर्मदा नदी में पानी बिजली संयंत्र के माध्यम से छोड़ा जाता है, लेकिन बिजली संयंत्र में दो में से एक इकाई मेंटेनेंस के लिए बंद की गई है और दूसरी इकाई को भी पानी कम होने की वजह से कम समय के लिए ही चलाया जा रहा है। इसकी वजह से नर्मदा नदी में पानी की मात्रा बहुत अधिक घट गई है। नर्मदा नदी में पानी कम छोड़े जाने का असर जबलपुर शहर के जनजीवन पर भी दिखने लगा है। दरअसल जबलपुर में बेस्ट सेंट्रल रेलवे, जबलपुर नगर निगम और दूसरी संस्थाओं के लिए भी पानी नर्मदा नदी से ही जाता है।
पर्यटकों की संख्या हुई कम
कुछ ऐसा ही हाल भेड़ाघाट का है, भेड़ाघाट में धुआंधार की धार विलुप्त हो गई है, धुआंधार में कम पानी होने की वजह से पर्यटक नहीं आ रहे हैं और धुआंधार की सुंदरता कम हो गई है। लोगों को नर्मदा नदी में पत्थर ही पत्थर नजर आ रहे हैं।
बारिश कम हुई तो खड़ा हो सकता है जलसंकट
इस साल पहले ही मौसम वैज्ञानिकों ने अल नीनो इफेक्ट के कारण कम बारिश होने की संभावना जताई है। मध्य प्रदेश के बांधों में भी पानी अपने निचले स्तरों तक पहुंच गया है, ऐसी हालत में यदि बारिश कम होती है तो आने वाला साल सभी के लिए कष्टदायक होगा।
जलस्त्रोतों की वर्तमान स्थिति
बरगी बाँध
८ अधिकतम जलस्तर : 422.75 मीटर
८ न्यूनतम जलस्तर : 403 मीटर
८ वर्तमान जलस्तर : 407.70 मीटर
८ उपलब्ध पानी: लगभग 5 मीटर
परियट जलाशय
८ अधिकतम जलस्तर : 1390.90 फीट
८ न्यूनतम जलस्तर : 1360 फीट
८ वर्तमान जलस्तर : 1363.5 फीट
८ उपलब्ध पानी : सिर्फ साढ़े 3 फीट
खंदारी जलाशय
८ अधिकतम जलस्तर : 1454.50 फीट
८ न्यूनतम जलस्तर : 1417.50 फीट
८ वर्तमान जलस्तर : 1426 फीट
८ उपलब्ध पानी : 9 फीट
इनका कहना है
खंदारी में 9 फुट और परियट में 3 फुट पानी बचा है। जो अनुमानित एक माह के लिए पर्याप्त है। पानी की एक टाईम सप्लाई की जा रही है। वहीं बारिश होते ही जलाशयों का जलस्तर बढऩे के बाद दोनों समय पानी की सप्लाई की जाएगी। कमलेश श्रीवास्तव
कार्यपालन यंत्री, जल विभाग
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Author: Jai Lok






