
जबलपुर (जय लोक)।ध्यान केवल हमें शांतिपूर्ण जीवन ही नहीं देता, बल्कि जीवन जीने की कला भी सिखाता है। आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली में ध्यान स्वयं से परिचय कराने का सर्वोत्तम साधन है। ध्यान के लिए मन का अनुकूलन तथा स्वस्थ मानसिक स्थिति आवश्यक है, और ध्यान स्वयं इस दिशा में सबसे उपयुक्त माध्यम है। ये विचार श्रीमति आभा जैन (जीएसटी जॉइन्ट कमिश्नर) ने एक दिवसीय ध्यान कार्यशाला में व्यक्त किए।

उन्होंने कहा कि मानव जीवन की आंतरिक यात्रा में ‘स्व’ से ‘स्व’ का मिलन हमें उच्चतम चेतना तक पहुँचाकर जागृति का अनुभव कराता है। आज की व्यस्त दिनचर्या में भी ध्यान के माध्यम से यह अनुभव सहज और सरलता से प्राप्त किया जा सकता है।

यह एक दिवसीय कार्यशाला सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया इंजीनियर फोरम द्वारा पाटन बायपास रोड स्थित हार्टफुलनेस ध्यान केंद्र के सहयोग से आयोजित की गई। इस अवसर पर श्री राजेश जैन ने कहा कि ध्यान भौतिक एवं आध्यात्मिक दोनों ही जीवन-पथों को सहजता से साधने का प्रभावी माध्यम है।


कार्यक्रम में श्रीमति ज्योत्स्ना श्रीवास्तव (प्रशिक्षक) ने हार्टफलनेस की तनाव-मुक्त रिलैक्सेशन पद्धति की विस्तार से जानकारी दी, जबकि के. के. श्रीवास्तव (प्रशिक्षक) ने उपस्थित प्रतिभागियों को ध्यान का अभ्यास कराया।कार्यक्रम में फोरम के अध्यक्ष एवं सेवानिवृत्त मुख्य अभियंता प्रभात श्रीवास्तव उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता गिरिष श्रीवास्तव, तथा ओरिएंटल कॉलेज के पूर्व निदेशक की विशेष उपस्थिति रही। अंत में हार्टफुलनेस सेंटर के समन्वयक संजीव ताम्रकार ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों एवं आश्रम परिसरवासियों का आभार व्यक्त किया।
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Author: Jai Lok






