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आखिर हम किस देश के वासी हैं कोई तो बताए….

चैतन्य भट्ट
(जयलोक)। अभी अभी एक ताजा खबर मिली है कि विदेश मंत्रालय ने पासपोर्ट को नागरिकता का दस्तावेज मानने से इंकार कर दिया है। जिससे हर भारतीय को खुद के भारत का नागरिक होने में सन्देह पैदा हो गया है। पाठकों को याद होगा पुराने दौर की एक मशहूर फिल्म ‘आवारा’ में राज कपूर ने ‘जापानी जूता और इंग्लिस्तानी पतलून’ के बावजूद दिल के हिंदुस्तानी होने का दावा किया था। यानी अगर आपका सिर्फ और सिर्फ दिल हिन्दुस्तानी है तो आप बेशक भारतीय नागरिक माने जाते थे। लेकिन उसके बाद एक और गाना हिट हुआ जिसमें सवाल उठाया गया कि ‘गंगा मेरी माँ का नाम बाप का नाम हिमाला, अब तुम खुद ही फैसला कर लो मैं किस सूबे वाला’। इस गाने को लेकर विवाद भी खड़ा हुआ था कि गंगा तो हिमालय की बेटी हैं फिर वो हिमालय की पत्नी कैसे बतला दी गीतकार ने? लगता है विदेश मंत्रालय ने इसी गाने की तर्ज पर नागरिकता के सवाल में और ज्यादा कंफ्यूजन पैदा कर दिया है। कोर्ट पहले ये भी कह चुके हैं कि आधार कार्ड अथवा वोटर कार्ड भी नागरिकता का सबूत नहीं हैं। तो फिर कोई खुद को नागरिक कैसे साबित करे?

सरकार के मुताबिक वैसे तो जन्म मृत्यु पंजीयन अधिनियम 1969 के लागू होने के बाद वर्ष 1970 से ही जन्म प्रमाण पत्र को अनिवार्य घोषित कर दिया गया था। लेकिन बाकी कानूनों की तरह इसका पालन भी पूरी गंभीरता से नहीं किया गया। जरूरत पडऩे पर लोग बोर्ड परीक्षा की मार्क शीट को पेश कर के कॉलेज में एडमिशन लेते थे और नौकरी भी करते रहे। बोर्ड परीक्षा की मार्कशीट की जन्मतिथि पर सरकार को इतना भरोसा था कि उसी के मुताबिक लोगों के पासपोर्ट तक जारी होते रहे। हालांकि 2025 में संशोधित पासपोर्ट नियमों के अनुसार 1 अक्टूबर 2023 के बाद पैदा होने वालों को आवेदन के साथ जन्म प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। लेकिन विदेश मंत्रालय ने यह कह कर नई मुश्किल खड़ी कर दी है कि पासपोर्ट भी भारत की नागरिकता का सबूत नहीं बल्कि केवल विदेश यात्रा का अनुमति पत्र है। इस बात पर हंगामा होने के बाद विदेश मंत्रालय ने फिर से स्पष्ट किया कि पासपोर्ट अधिनियम 1967 के अनुसार गैर भारतीयों को भी पासपोर्ट जारी किया जा सकता है। इसलिए पासपोर्ट को नागरिकता का सबूत नहीं माना जा सकता। अब लोग बेहद हैरान हैं कि जो पासपोर्ट विदेशी मुल्कों में हम को भारतीय नागरिक होने की पहचान देता है वो खुद भारत में नागरिकता की गारण्टी नहीं देता। मजे की बात यह है कि सरकार के पास इस बात का जवाब अभी भी नहीं है कि नागरिकता का सबूत आखिर है क्या? इसी दौरान वोटर लिस्ट के अपडेट करने की प्रक्रिया और जनगणना साथ साथ चल रहे हैं और नागरिकता के लिए डर के मारे घर की पुरानी संदूकें और अलमारियाँ खंगाल रहे हैं। ताकि खुद के या अपने बाप-दादों के ऐसे कागज़ात मिल जायें जो भारतीय होने का सबूत बन सकें। 1960 में रिलीज़ हुई राज कपूर की सुपरहिट फिल्म का प्रसिद्ध टाइटल गीत था ‘हम उस देश के वासी हैं जिस देश में गंगा बहती है’। लेकिन अब भारत में रह रहे हर नागरिक के मन में अहम सवाल उठ रहा है वो ये है कि आखिर हम किस देश के वासी हैं कोई तो बताए।

मानसून आखिर तुम कब आओगे –

परेश रावल की एक बड़ी मजेदार फिल्म थी ‘अतिथि तुम कब जाओगे’ उसी तर्ज पर आजकल हर आदमी आकाश की तरफ निगाहें डालकर एक ही बात पूछ रहा है कि हे मानसून आखिर तुम कब आओगे, बीच-बीच में थोड़े बहुत छींटे जमीन पर पड़ जाते हैं और लोग बात खुशी से नाचने लगते हैं कि लो भाई अब मानसून आ गया। लेकिन बाद में पता चलता है कि ये मानसून नहीं बल्कि लोकल बादल बारिश कर रहे हैं। अपने को तो समझ में नहीं आता की मानसून ट्रेनों की तर्ज पर लेट क्यों होने लगा है। क्या वो ट्रेन से आता है, लगता तो ऐसा ही है, फिर कभी रास्ता भटक जाता है फिर कहीं अटक जाता है। अरे भाई जब एक बार तुमको पूरी रोड मालूम है कि हमें यहां से वहां जाना है तो इतने कितने भुलक्कड़ हो गए हो कि हर बार रास्ता भूल जाते हो। यदि ‘डिमेंशिया’ हो गया हो तो किसी डाक्टर को दिखाओ कहीं भटक जाते हो कहीं अटक जाते हो, आदमी गर्मी से हलाकान है, पसीने से तर है, धूप ऐसी लग रही है जैसे आग के कुंड में बैठे हों सबकी निगाहें सिर्फ तुम्हारी तरफ गड़ी हुई हैं। जून खत्म होने को आ रहा है लोगबाग और मौसम वैज्ञानिक भी कहते थे कि 15 जून तक मानसून अपने प्रदेश में सक्रिय हो जाएगा। लेकिन 15 दिन ज्यादा हो गए दूर-दूर तक तुम्हारा कोई पता नहीं है ऐसे में आदमी करे तो करे क्या? सारे पानी के ोित सूख गए हैं उनकी सिल्ट बाहर झांकने लगी है नगर निगम आखिर पानी ले तो ले कहां से? टैंकर तो है लेकिन पानी भरा कहां से जाएगा ये भी तो बड़ा सवाल है। मानसून भैया तुमसे हाथ जोडक़र यही प्रार्थना है कि जहां कहीं भी अटके हो, लटके हो, भटके हो तो किसी चाय के टपरे वाले से रास्ता पूछ कर सीधे-सीधे आ जाओ या फिर हम अपनी लोकेशन मोबाइल पर भेज देते हैं उसी के सहारे आ जाओ लेकिन आ जरूर जाओ।

विदेश में भी हाहाकार

पता चला है कि यूरोप के बारह देशों में ऐसी गर्मी पड़ रही है कि वहां हाहाकार मच गया है अपने को तो ये बताया जाता था कि विदेश का मौसम बहुत अच्छा होता है वहां गर्मी नहीं पड़ती, ठंड पड़ती है बर्फ जमी रहती है लेकिन ये सारे भरम टूट गए, हाल ये है कि स्कूल बंद कर देने पड़े हैं, शराब पीने तक में रोक लगा दी गई है, शहरों में कूलिंग केंद्र बना दिए गए हैं। अभी तक ढाई सौ से ज्यादा मौतें भी हो चुकी हैं। लोग बाग सुबह से लेकर शाम तक तलाब और नदी में बैठे हैं। बताया गया है कि लोगों से कहा गया है कि दोपहर के बाद बाहर न निकलें। इन तमाम लोगों को भारत के लोगों से शिक्षा लेना चाहिए जो भरी दुपहरिया में बेहतरीन घूमते फिरते नजर आते हैं। लू से बचने प्याज जेब में रख लेते हैं, बहुत ज्यादा हुआ तो कान गमछे से ढक लेते हैं लेकिन घूमना नहीं छोड़ते, दरअसल उन्हें ऐसी गर्मी की भारी प्रैक्टिस भी है। तापमान पैंतालीस डिग्री हो या सैंतालीस डिग्री, उनके लिए कोई मायने रखता नहीं है। यूरोप के लोग बाल गोरे भी होते हैं उन्हें अपने काले होने का भी डर रहता है लेकिन अपने यहां अधिकांश लोग करिया ही होते हैं, कितनी धूप पड़े रंग और कितना काला पड़ेगा इसलिए उन्हें इस बात की चिंता नहीं रहती। अपनी तो यूरोप वालों को सलाह है कि भैया एक दो साल भारत में रहने आ जाओ और गर्मी से लडऩे की ताकत अपने अंदर पैदा कर लो वरना ऐसे ही अलसेट खाते रहोगे।

सुपर हिट ऑफ द वीक

‘पापा अगर मैं परीक्षा में पास हो गया तो आप को कैसा लगेगा’ श्रीमानजी के बेटे ने श्रीमान जी से पूछा‘मैं खुशी से पागल हो जाऊंगा’ श्रीमान जी ने कहा‘बस पापा इसी डर से मैं फेल हो गया’ बेटे में उत्तर दिया।

 

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Jai Lok
Author: Jai Lok

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