
जबलपुर (जय लोक)। कल देर शाम कंट्रोल रूम में आयोजित जिले में अपराध और अन्य विषयों की समीक्षा बैठक में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संपत उपाध्याय के खड़े खड़े सवालों को सुनकर जवाब देने में बैठक में मौजूद अधिकारियों के हलक सूख गए। अधिकांश लोग सामान्य समीक्षा बैठक की अपेक्षा और अनुमान लगाकर शामिल हुए थे अधिकारियों को अंदाजा नहीं था कि पुलिस अधीक्षक ने थानेवार क्षेत्र के वर्तमान परिदृश्य की पूरी जानकारी अपने अंदरूनी नेटवर्क से हासिल कर ली है। इसी का नतीजा था जब उन्होंने थानेवार घट रहे अपराधों को इंगित करते हुए एक थाना प्रभारी से पूछा की किसकी शहर पर भेड़ाघाट क्षेत्र से जगह बदल कर उनके थाना क्षेत्र में आया जुआँ फड़ पर चल रहा है तो अधिकारी सकपक्का गए। अगला खड़ा सवाल बैठक में उपस्थित उन थाना प्रभारियों से पूछा गया जिनको उनके अपने थाना क्षेत्र में घटित हुई सडक़ दुर्घटनाएं, वह अन्य अपराधों, आरोपियों की गिरफ्तारी के संबंध में जानकारी नहीं थी और वह पूछे जाने पर बगलें झांकने लगे इस पर पुलिस अधीक्षक ने सीधा सवाल दागा की जब जानकारी नहीं है तो टी आई क्यों बने हुए हो? वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संपत उपाध्याय ने बैठक में स्पष्ट रूप से कहा कि थाने के कमरों में बैठकर पॉलिसिंग नहीं हो सकती अगर थाना प्रभारी और सीएसपी बने रहना है तो दोनों ही पदासीन लोगों को मैदान में उतर कर काम करना पड़ेगा। अपराध की रोकथाम के प्रति किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। ऐसा हुआ तो जो जिम्मेदार होगा वह दंड उठाने के लिए तैयार रहे।

बरगी-संजीवनी नगर टीआई ने झांकी बगलें – समीक्षा के दौरान बरगी और संजीवनी नगर थाना प्रभारियों से उनके क्षेत्रों में हुई सडक़ दुर्घटनाओं की जानकारी मांगी गई, लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर पुलिस अधीक्षक श्री उपाध्याय ने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा जब मालूम नहीं तो काहे को टीआई बने हैं? पुलिस अधीक्षक श्री उपाध्याय ने स्पष्ट किया कि सडक़ दुर्घटनाओं को केवल आंकड़ों तक सीमित न रखा जाए, बल्कि हर घटना की विवेचना, दोषियों पर कार्रवाई, पीडि़तों की मदद और दुर्घटना रोकने के उपायों की पूरी जानकारी थाना प्रभारी के पास होनी चाहिए।

मैदान में उतर कर होगी पुलिसिंग सीएसपी साहब – पुलिस अधीक्षक ने एक मामले में गोरखपुर सीएसपी महादेव नागोतिया से सवाल किये जवाब अनमना और सटीक नहीं मिला, जिस पर पुलिस अधीक्षक ने नाराजगी भरे अंदाज में कहा की काम करो, जानकारी रखो। प्रकरण की जानकारी नहीं है और उसके बाद भी हां में हां मिला रहे हो, ऐसा नहीं चलेगा। सुपरविजन ऐसे होता है उन्होंने प्रभावी सुपरविजन के लिए निर्देशित किया और कहा कि मैदान में उतर पर पुलिसिंग करिये।


सीएम हेल्पलाइन, महिला संबंधी अपराधों, सडक़ दुर्घटनाओं, फरार आरोपियों की गिरफ्तारी, लंबित शिकायतों और गंभीर अपराधों की समीक्षा से जुड़े मद्दे बैठक में शामिल थे। बैठक में थानावार लंबित हत्या, हत्या के प्रयास, लूट, झपटमारी, नकबजनी, एससी-एसटी एक्ट, महिला संबंधी अपराध एवं संपत्ति संबंधी अपराधों की विस्तृत समीक्षा की गई।
एसपी श्री उपाध्याय ने अपहृत नाबालिग बालक-बालिकाओं की हरसंभव प्रयास कर दस्तयाबी सुनिश्चित करने और जिले के बाहर होने की जानकारी मिलने पर तत्काल टीम रवाना करने के निर्देश दिए।
तकनीक का उपयोग विवेचना की गुणवत्ता- बैठक में सीसीटीएनएस, ई-साक्ष्य, ई-विवेचना, ई-एफआईआर, ई-चालान और ई-समंस की भी समीक्षा हुई। पुलिस मुख्यालय से प्राप्त टैब विवेचकों को वितरित कर डिजिटल विवेचना, डायरी लेखन, नक्शा मौका, फोटो, वीडियो और दस्तावेज अपलोड करने का प्रशिक्षण दिया गया। कप्तान उपाध्याय ने कहा कि तकनीक का उपयोग विवेचना की गुणवत्ता और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए प्रभावी ढंग से किया जाए।
यह रहे उपस्थित
बैठक में एएसपी सिटी आयुष जाखड़, एएसपी ग्रामीण अनु बेनिवाल, एएसपी क्राइम जितेन्द्र सिंह, एएसपी जोन-2 पल्लवी शुक्ला, एएसपी जोन-4 अंजना तिवारी, एएसपी मुख्यालय सूर्यकांत शर्मा, एएसपी यातायात अखिलेश तिवारी सहित सभी राजपत्रित अधिकारी, थाना प्रभारी और चौकी प्रभारी मौजूद रहे।
Author: Jai Lok






