
जबलपुर (जयलोक)। सदर बाजार में स्थित 100 साल से भी पुरानी ऐतिहासिक जामा मस्जिद की वक्फ संपत्ति के दुरुपयोग का मामला अब तूल पकड़ चुका है। करोड़ों रुपये की वक्फ संपत्ति और हर जुमे को आने वाले लाखों के चंदे के कथित गबन का मामला मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय तक पहुंच गया है।न्यायमूर्ति मनिंदर एस भट्टी की एकलपीठ ने मोहम्मद इदरीस बनाम राज्य में सुनवाई करते हुए वक्फ बोर्ड को 60 दिन का अल्टीमेटम दे दिया है। कोर्ट ने कहा कि 15 दिन में शिकायत मिलने पर सीईओ को कानून के तहत कारण सहित आदेश देना होगा।

यह है पूरा मामला?
याचिकाकर्ता मोहम्मद इदरीस का आरोप है कि जामा मस्जिद सदर बाजार से जुड़ी दुकानों, जमीनों और चंदे की आय का सही उपयोग नहीं हो रहा। वक्फ अधिनियम 1995 की धारा 64, 65, 67 का उल्लंघन कर संपत्ति को मनमाने तरीके से इस्तेमाल किया जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि मस्जिद के स्कूल की जर्जर हालत और मदरसे की बदहाली देखकर लगता ही नहीं कि यहां से हर महीने लाखों की आमदनी होती है। जबकि वक्त अधिनियम में साफ है कि वक्फ की आय कि 50 प्रतिशत राशि स्कूल और मदरसे पर खर्च होगी।8 जुलाई 2026 को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता पहले वक्फ बोर्ड में अभ्यावेदन दे। एफआईआर के लिए मजिस्ट्रेट कोर्ट जाने की छूट भी दी। कोर्ट में याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुख्तार अहमद ने दलील दी कि वक्फ की संपत्ति गरीबों, यतीमों और तालीम के लिए है। इसका निजी इस्तेमाल कौम के साथ गद्दारी है।खबर फैलते ही मुस्लिम समाज में नाराजगी है। सोशल मीडिया पर ट्रेंड करने लगा है।

लोगों का कहना है कि चंदा हम देते हैं, हिसाब कोई नहीं देता।।अब सबकी नजरें भोपाल स्थित वक्फ बोर्ड के सीईओ पर हैं। 60 दिन में क्या कार्रवाई होती है, ये देखना बाकी है।हाईकोर्ट ने 60 दिन में कार्रवाई के आदेश दिए हैं। याचिकाकर्ता ने माँग की है कि वक्फ अधिनियम 1995 की धारा 64, 65, 67 के तहत तुरंत ऑडिट कराए और जिम्मेदार लोगों पर एफआईआर दर्ज कराएं। कौम की संपत्ति लूटने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।


Author: Jai Lok






