
जबलपुर (जय लोक)। हिंदू धर्म में माँ शक्ति की आराधना के लिए नवरात्रि को अत्यंत पवित्र पर्व माना जाता है। यह त्यौहार वर्ष में चार बार मनाया जाता है, जिसमें दो नवरात्रि सार्वजनिक रूप से मनाई जाती हैं और दो गुप्त रूप में होती हैं। चैत्र और शारदीय नवरात्रि को प्रकट नवरात्रि कहा जाता है, जिन्हें पूरे देश में उत्साह के साथ मनाया जाता है। वहीं माघ और आषाढ़ मास में आने वाली नवरात्रि को ‘गुप्त नवरात्रि’ के नाम से जाना जाता है।
पंचांग के अनुसार साल 2026 में आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि आज 15 जुलाई से शुरू हो गई है जो 23 जुलाई तक चलेगी। तांत्रिक शास्त्रों जैसे मेरु तंत्र और डामर तंत्र में इन दिनों को विशेष साधना के लिए श्रेष्ठ बताया गया है। इन्हें साधना की रात्रियां भी कहा जाता है, क्योंकि इस दौरान बाहरी दिखावे की बजाय व्यक्तिगत और गोपनीय साधना को अधिक महत्व दिया जाता है। जहां सामान्य नवरात्रि में माँ दुर्गा के नौ रूपों की पूजा होती है, वहीं गुप्त नवरात्रि में दस महाविद्याओं की आराधना की जाती है। यह साधना विशेष रूप से तांत्रिकों के लिए महत्वपूर्ण होती है, लेकिन गृहस्थ भी नियमों का पालन करते हुए इसका लाभ ले सकते हैं। आज प्रमुख मंदिरों जैसे त्रिपुर सुंदरी मंदिर और बड़ी खेरमाई में सुबह से विशेष पूजा-अर्चना और कलश स्थापना (घटस्थापना) हुई। इसके साथ ही बगलामुखी देवी मंदिर, सहित अन्य देवी मंदिरों में भी विशेष पूजन अर्चन का दौर शुरू हो गया है। यहां सुबह से ही भक्तों का आना शुरू हो गया था जो लगातार नौ दिनों तक चलेगा। इसके साथ ही आज से लगातार नौ दिनों तक विशेष पूजन अर्चन का कार्यक्रम चलेगा।

कलश स्थापना और पूजा विधि
अगर कोई व्यक्ति जटिल तांत्रिक विधियों का पालन नहीं करना चाहता, तो वह सरल तरीके से घर पर भी पूजा कर सकता है। इसके लिए सुबह स्नान के बाद घर के ईशान कोण को साफ करके वहां एक चौकी पर लाल वस्त्र बिछाएं और मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित करें। एक पात्र में मिट्टी डालकर उसमें जौ बोएं। इसके बाद तांबे या मिट्टी के कलश में जल, अक्षत, सुपारी और सिक्का डालें, आम के पत्ते लगाएं और ऊपर नारियल रखकर उसे स्थापित करें। फिर दीपक जलाकर माँ से अपनी मनोकामना का संकल्प लें।

क्या कहते हैं ज्यातिषाचार्य
ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि गुप्त नवरात्रि साधना, पूजा और मनोकामना पूर्ण करने का पर्व माना जाता है। इस दौरान माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों के साथ दस महाविद्याओं की भी विशेष आराधना की जाती है। इस बार गुप्त नवरात्रि की शुरुआत आज 15 जुलाई से हुई हैं। पहले ही दिन गुरु और चंद्रमा की युति से लक्ष्मी नारायण योग बना है जो बेहद शुभ संयोग है, ऐसे योग बार-बार नहीं बनते हैं।


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Author: Jai Lok






