
परफॉर्मेंस रिपोर्ट बनेगी पैमाना, कई मंत्रियों की विदाई के संकेत
भोपाल (जयलोक)। मध्यप्रदेश की राजनीति में दतिया विधानसभा उपचुनाव के बाद बड़ा सत्ता परिवर्तन देखने को मिल सकता है। पशुपालन एवं डेयरी राज्यमंत्री लखन पटेल से विभाग वापस लेने के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के फैसले ने राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। भाजपा संगठन और सत्ता के गलियारों में चर्चा है कि उपचुनाव के परिणाम आने के बाद मुख्यमंत्री अपने मंत्रिमंडल का विस्तार और व्यापक फेरबदल कर सकते हैं। माना जा रहा है कि इस प्रक्रिया में लगभग छह नए चेहरों को मौका मिल सकता है, जबकि कई मौजूदा मंत्रियों की जिम्मेदारियां बदल सकती हैं। राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि इस बार केवल क्षेत्रीय और जातीय संतुलन ही नहीं, बल्कि मंत्रियों के पिछले दो वर्षों के प्रदर्शन, विभागीय कार्यशैली और संगठन तक पहुंची शिकायतों को भी अहम आधार बनाया जाएगा। यही वजह है कि मंत्रिमंडल में बैठे कई मंत्री इन दिनों अपनी राजनीतिक स्थिति को लेकर असहज बताए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने मंत्रियों के दो वर्ष के कार्यकाल की विस्तृत समीक्षा कराई है। प्रत्येक मंत्री के विभागीय प्रदर्शन, योजनाओं की प्रगति, प्रशासनिक कार्यशैली और जनप्रतिनिधियों के फीडबैक के आधार पर रिपोर्ट तैयार कर दिल्ली भेजी गई है। सूत्रों के अनुसार, आगामी मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल में यही रिपोर्ट सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज होगी। जिन मंत्रियों का प्रदर्शन संतोषजनक नहीं माना गया है, उनके विभाग बदले जा सकते हैं या उन्हें मंत्रिमंडल से बाहर भी किया जा सकता है।
लखन पटेल के बाद बढ़ी अन्य मंत्रियों की चिंता
पशुपालन एवं डेयरी विभाग वापस लेने की कार्रवाई को भाजपा संगठन और सरकार एक स्पष्ट संदेश के रूप में देख रहे हैं। बताया जा रहा है कि जिन शिकायतों के आधार पर लखन पटेल से विभाग वापस लिया गया, उसी प्रकार की शिकायतें चार अन्य मंत्रियों के खिलाफ भी मुख्यमंत्री कार्यालय और भाजपा के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंच चुकी हैं। इन शिकायतों की जांच संगठन अपने स्तर पर करा रहा है। यदि रिपोर्ट प्रतिकूल आती है तो आने वाले दिनों में कुछ और चौंकाने वाले फैसले सामने आ सकते हैं।
तीन से चार मंत्रियों की हो सकती है विदाई
भाजपा संगठन से जुड़े सूत्रों का दावा है कि मंत्रिमंडल विस्तार के साथ तीन से चार मंत्रियों की विदाई लगभग तय मानी जा रही है। इनमें ऐसे मंत्री शामिल बताए जा रहे हैं जिनके विवादित बयानों या कार्यशैली के कारण सरकार और संगठन को कई बार असहज स्थिति का सामना करना पड़ा। इसके अलावा कुछ वरिष्ठ मंत्रियों के विभाग बदलने की भी चर्चा है। माना जा रहा है कि प्रभावशाली विभागों की जिम्मेदारी नए चेहरों को देकर कुछ वरिष्ठ मंत्रियों को अपेक्षाकृत हल्के विभाग सौंपे जा सकते हैं।
छह नए चेहरों को मिल सकता है मौका
सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री इस विस्तार के जरिए विधानसभा चुनाव से पहले संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल बनाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। संभावना है कि नए मंत्रियों के चयन में जिन बिंदुओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, उनमें क्षेत्रीय संतुलन, जातीय प्रतिनिधित्व, युवा और अनुभवी चेहरों का मिश्रण और संगठन के प्रति सक्रियता शामिल हैं। वहीं आगामी विधानसभा चुनाव की रणनीतिक जरूरतों को देखते हुए इस बार ओबीसी, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और ब्राह्मण वर्ग के प्रतिनिधित्व पर भी विशेष ध्यान दिए जाने की संभावना जताई जा रही है। वर्तमान में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व वाले मंत्रिमंडल में 30 मंत्री हैं। संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार वे अभी चार और विधायकों को मंत्रिमंडल में शामिल कर सकते हैं। रामनिवास रावत के चुनाव हारने और मंत्रिमंडल से बाहर होने के बाद वन एवं पर्यावरण विभाग मुख्यमंत्री के पास ही है। अब पशुपालन एवं डेयरी विभाग भी उनके पास आ गया है। इसके अलावा मुख्यमंत्री के पास लगभग एक दर्जन विभागों की जिम्मेदारी बताई जा रही है।
Author: Jai Lok






