
जबलपुर (जय लोक)। 7 दिन पहले ही सोनम वांगचुक का अनशन खत्म हो जाता अगर मोदी सरकार अपनी संवेदनशीलता का परिचय दे देती तो, यह कहना है राज्य सभा सांसद वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक कृष्णा तन्खा का। श्री तन्खा से यह बात बहुत दिन पहले अपने सोशल मिडिया पर भी लिखी थी कि सोनम वांगचुक की बिगड़ी स्वास्थ्य की स्थिति को लेकर मैं अत्यंत चिंतित हूं अब समय है सरकार संवेदनशीलता, संवाद और जिम्मेदारी का परिचय दे। सरकार को तुरंत हस्तक्षेप करना होगा सरकार की लापरवाही के कारण देश सोनम वांगचुक जैसे समर्पित नागरिक को खोने का जोखिम नहीं उठा सकता। सोनम वांगचुक का अनशन तुड़वाने में विवेक तन्खा ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने पहले भी सोनम के हक की लड़ाई कोर्ट के माध्यम से लड़ी है। विवेक तन्खा लगातार सोनम वांगचुक को अनशन समाप्त करने के मनाने का काम कर रहे थे। केंद्र सरकार के मंत्री जे पी नड्डा, जीतेन्द्र सिंह ने भी 3-4 दिन पहले से वांगचुक को मनाने समानांतर प्रयास शुरू कर दिए थे।

श्री तन्खा ने जय लोक से कहा कि 7 दिन पहले ही सोनम वांगचुक को अनशन खत्म करने के लिए तैयार कर लिया था। लेकिन सोनम का कहना था कि अगर उन्होंने अनशन खत्म कर दिया तो प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर दर्ज मामलों और उन पर हो रही कार्यवाही का क्या होगा। सरकार उन्हें आश्वासन दे दे की छात्रों पर कार्यवाही नहीं होगी तो वो अनशन खत्म कर देंगे।

वांगचुक को मेदांता में भी तन्खा ने ही भर्ती करवाया
सोनम वांगचुक की हालत बिगडऩे पर विवेक तन्खा ने ही दिल्ली हाईकोर्ट में मामला दायर मेदांता अस्पताल उन्हें भर्ती कराने का आदेश कराया। फिर उन्होंने डॉ. त्रेहन से चर्चा कर सोनम वांगचुक को मेदांदा में भर्ती करवाने की पूरी व्यवस्था की थी। हॉस्पिटल से सभी सुविधाओं के साथ एम्बुलेंस बुलवाने से लेकर उनके स्वास्थ की हर प्रकार से चिंता की गई थी।
लगातार बातचीत, सरकार के साथ संवाद और स्वास्थ्य को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अपना अनिश्चितकालीन अनशन समाप्त कर दिया। सूत्रों के अनुसार इस पूरे घटनाक्रम में वरिष्ठ अधिवक्ता एवं राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा की भूमिका महत्वपूर्ण रही। बताया जाता है कि जब वांगचुक के स्वास्थ्य में लगातार गिरावट आने लगी और उनका वजन 11 किलोग्राम से अधिक कम हो गया, तब उनके निकट सहयोगियों और विभिन्न जनप्रतिनिधियों ने उन्हें अनशन समाप्त करने के लिए मनाने के प्रयास तेज किए। इसी दौरान विवेक तन्खा ने भी उनसे विस्तृत चर्चा की और स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने की सलाह दी। सूत्रों के अनुसार विवेक तन्खा उन अधिवक्ताओं में शामिल रहे जिन्होंने सोनम वांगचुक के विरुद्ध राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम से जुड़े मामले में सर्वोच्च न्यायालय में उनकी ओर से कानूनी पैरवी की थी। इसके बाद भी उन्होंने वांगचुक से लगातार संपर्क बनाए रखा और हालिया घटनाक्रम में संवाद स्थापित करने में सक्रिय भूमिका निभाई।
कहा जा रहा है कि सरकार और लद्दाख के प्रतिनिधियों के साथ कई दौर की बातचीत के बाद माहौल सकारात्मक बना। इसके पश्चात विवेक तन्खा द्वारा स्वास्थ्य और आंदोलन के भविष्य को ध्यान में रखते हुए दिए गए सुझावों पर विचार करते हुए वांगचुक ने अपना अनशन समाप्त करने का निर्णय लिया।
राजनीतिक और सामाजिक हलकों में इस घटनाक्रम को संवाद और संवैधानिक प्रक्रिया के माध्यम से समाधान खोजने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। वहीं वांगचुक ने संकेत दिया है कि शिक्षा और सुधारों से जुड़े मुद्दों पर उनका अभियान आगे भी जारी रहेगा।





