
20 प्रतिशत तक झूलसे हैं बच्चे, उप मुख्यमंत्री ने रात में लिया जायजा
मेडिकल डीन लगातार बनाए हुए हैं बच्चों की स्थिति पर नजर
जबलपुर (जय लोक)। छिंदवाड़ा के जिला अस्पताल के नवजात बच्चों के लिए विशेष तौर पर बनाए गए केयर यूनिट में रखी वार्मर मशीनें जिससे नवजात बच्चों के शरीर के तापमान को निर्धारित कर उनका इलाज किया जाता है, उसमें शॉर्ट सर्किट होने के कारण आग लगने से तीन नवजात बच्चे झुलस गए। जबलपुर मेडिकल कॉलेज के सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में इन बच्चों का इलाज चल रहा है। चिकित्सकों के अनुसार हादसे के दौरान यह बच्चे 20त्न तक झुलस गए हैं इन बच्चों में एक बच्ची की उम्र 5 -6 दिन की है। एक बच्ची प्रीमेच्योर हुई थी जिसका वजन मात्र डेढ़ किलो है और वह भी इस हादसे का शिकार हुई है उक्त बच्ची के सामने जीवन का संकट बना हुआ है। हालांकि डॉक्टरों की लगातार निगरानी इन बच्चों के ऊपर बनी हुई है।
कल प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला भी इंटेंसिव केयर यूनिट में बच्चों का हाल-चाल जानने पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने पीडि़त बच्चों के परिजनों से भी मुलाकात की है और उन्हें वरिष्ठ डॉक्टरों की उपस्थिति में आश्वस्त किया है कि बच्चों को बेहतर से बेहतर इलाज दिया जाएगा। कल बच्चों को जबलपुर मेडिकल कॉलेज के सुपर स्पेशलिटी यूनिट में शिफ्ट किया गया था। उप मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान मेडिकल कॉलेज के डीन डॉक्टर नवनीत सक्सेना, सीएमएचओ डॉक्टर नवीन कोठारी मेडिकल अधीक्षक डॉक्टर अरविंद शर्मा, सुपर स्पेशलिटी डायरेक्टर डॉक्टर अर्पण ताम्रकार, अधीक्षक डॉक्टर जितेंद्र गुप्ता भी मौजूद रहे।
हादसे का शिकार हुए नवजात बच्चों को दिए जा रहे इलाज और उनकी स्थिति के संबंध में स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला को पूरा विवरण दिया गया। जिस पर उन्होंने संतोष व्यक्त करते हुए डॉक्टरों से कहा कि नवजात बच्चों के इलाज में किसी प्रकार की कोई कमी नहीं होनी चाहिए और उन्हें यथा संभव सर्वश्रेष्ठ उपचार उपलब्ध कराया जाए।
नेताजी सुभाष चंद्र मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ नवनीत सक्सेना ने जय लोक से चर्चा करते हुए बताया कि छिंदवाड़ा जिला अस्पताल में हुए हादसे के दौरान तीन नवजात बच्चे बुरी तरह झुलस गए थे। इनमें से एक नवजात बच्ची की कल मृत्यु हो गई। उसे बचाने के सभी प्रयास किए गए सीपीआर भी दिया गया लेकिन यह संभव नहीं हो पाया।
घायलों में एक 5-6 दिन की बच्ची भी शामिल है जिनकी स्थिति में सुधार हो रहा है। डॉ सक्सेना ने बताया कि उक्त बच्ची को आहार दिया जाना प्रारंभ कर दिया गया है। उसकी स्थिति में लगातार सुधार हो रहा है। वहीं एक अन्य एक दिन की बच्ची जो जन्म से प्रीमेच्योर थी और उसका वजन भी काफी कम है डेढ़ किलो की उक्त बच्ची के समक्ष जीवन का संकट बना हुआ है। वर्तमान में उसकी स्थिति स्थिर बनी हुई है डॉक्टरों की टीम लगातार नवजात बच्चे की मॉनिटरिंग कर रही है।

इनका कहना है
एक बच्ची की स्थिति में काफी सुधार हुआ है। हादसे में बच्चे 20त्न तक झूलते हैं जो गंभीर बात है। बच्चों को जल्द से जल्द ठीक करने और बचाने के लिए हर संभव प्रयास किया जा रहा है। एक अन्य एक दिन की बच्ची प्रीमेच्योर हुई थी उसका वजन भी केवल डेढ़ किलो है उसकी स्थिति स्थिर बनी हुई है। लगातार बच्चों की सेहत की मॉनिटरिंग की जा रही है।
-डॉ नवनीत सक्सेना, डीन मेडिकल कॉलेज

Author: Jai Lok





