
प्रशासन के सामने 2019 जैसी बाढ़ रोकने की चुनौती
पटना/ (जयलोक)।राजधानी इस समय पानी से चारो ओर घिरा हुआ है। दियारा क्षेत्र के अलावा अब जिले के निचले इलाकों में नदियों का पानी घुस चुका है। कई तटबंध से रिसाव शुरू हो गया तो कई सडक़ें बह गईं या जलमग्न हो गई हैं। राजधानी क्षेत्र में 2019 की तरह नावें नहीं चलें इसकी रोकथाम की चुनौती ने प्रशासन की नींद उड़ा दी है। इसका कारण भी है, जिले में बाढ़ का कारण कोई एक नदी नहीं बल्कि चार नदी तंत्र हैं।
उत्तर में गंगा, पश्चिम-दक्षिण में सोन व दक्षिण से उत्तर-पूर्व की ओर बढऩे वाली पुनपुन और उसकी मुख्य सहायक दरधा नदी की धाराएं घेरती हैं। पटना के उत्तर गंडक का बढ़ा जलस्तर गंगा पर दबाव बढ़ाकर पानी फैलने के रास्ते बंद कर दे रहा है।
अधिकारियों के अनुसार, यदि गंगा का जलस्तर ड्रेनेज पाइप से ऊपर गया तो सीवरेज के पानी के साथ गंगा का पानी शहर में घुस जाएगा। बाढ़ का खतरा इसी से समझा जा सकता है कि प्रशासन ने जिले के 31 स्थानों को अंतिसंवेदनशील व 181 स्थल को संवेदनशील घोषित किया है।
गंगा की भयावहता तीसरे चरण तक पहुंची- जिले में बाढ़ का सबसे बड़ा कारण गंगा है। मनेर से लेकर दानापुर, दीघा, पटना शहर, पटना सिटी, फतुहा, खुसरूपुर, बख्तियारपुर व मोकामा तक इसके जलस्तर का दुष्प्रभाव सामने आता है।

गंगा के बाढ़ का प्रकोप मनेर-दानापुर दियारा से शुरू होकर दीघा-कुर्जी-बिंद टोली, पटना व पटनासिटी के अन्य घाटों से होता हुआ फतुहा, बख्तियारपुर व मोकामा की ओर जाता है।
लंबे समय तक जलस्तर ऊंचा रहने पर तटबंध और शहर का ड्रेनेज आउटफाल प्रभावित होता है। सोन का मनेर के पास गंगा से संगम होता है, इसलिए सोन और गंगा, दोनों का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर होने पर मनेर और आसपास के निवासी दोहरी मार झेल रहे हैं।

जलस्तर बढ़ते ही पहले किनारे के दियारा, खेत व संपर्क मार्ग डूबते हैं और इसके बाद तटबंध व निचले गांव। वहीं, पुनपुन में उफान से पालीगंज, नौबतपुर, पुनपुन, संपतचक व फतुहा के निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ा हुआ है। पुनपुन की मुख्य सहायक नदी है, लेकिन दक्षिणी पटना में इसका उफान बड़े संकट का संकेत है। धनरुआ व मसौढ़ी के आसपास इसके बढ़े पानी का असर गांवों, खेतों, सडक़ों व तटबंधों पर दिख रहा है। दरधा में बढ़ा पानी स्थानीय स्तर पर तबाही मचाने के साथ पुनपुन के बाढ़ दबाव को बढ़ाता है।


Author: Jai Lok





