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म.प्र. में अब सडक़ सफर होगा महँगा!

12 और सडक़ों पर लगेगा टोल, सरकार का सालाना 3 हजार करोड़ कमाई का प्लान
भोपाल (जयलोक)। मध्यप्रदेश में आने वाले समय में सडक़ से सफर करना महंगा हो सकता है। राज्य सरकार सडक़ों से होने वाली आय बढ़ाने के लिए टोल व्यवस्था का विस्तार करने की तैयारी में है। कम से कम 12 और सडक़ों को टोल के दायरे में लाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इसके अलावा कुछ अन्य सडक़ों को भी भविष्य में इस व्यवस्था से जोडऩे की योजना है। फिलहाल प्रदेश में मध्यप्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एमपीआरडीसी) की अलग-अलग योजनाओं के तहत 93 सडक़ों पर 139 टोल प्लाजा संचालित हो रहे हैं। विभाग का मानना है कि नई सडक़ों को टोल व्यवस्था से जोडक़र सरकार की आय में बड़ा इजाफा किया जा सकता है।
अभी 400 करोड़, लक्ष्य 3 हजार करोड़ तक
पीडब्ल्यूडी से जुड़े अधिकारियों के अनुसार प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के टोल से सालाना करीब 4 हजार करोड़ रुपये की आय होती है। इसके मुकाबले पीडब्ल्यूडी और एमपीआरडीसी की टोल से कमाई करीब 400 करोड़ रुपये सालाना है। इसी अंतर को देखते हुए विभाग अगले 10 से 15 साल में टोल से होने वाली आय को बढ़ाकर 2 हजार से 3 हजार करोड़ रुपये सालाना तक पहुंचाना चाहता है। इसके लिए नई सडक़ों का निर्माण टोल आधारित मॉडल पर करने पर जोर दिया जा रहा है। पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों के अनुसार टोल आधारित नई सडक़ों से विभाग की आय बढ़ेगी। इससे सडक़ क्षेत्र में निवेश के साथ राज्य के राजस्व में भी विभाग का योगदान बढ़ाया जा सकेगा।
निजी कंपनियों के बजाय सरकार के पास आएगा टोल
सडक़ निर्माण के लिए पीडब्ल्यूडी अब हाइब्रिड एन्युटी मॉडल यानी एचएएम को ज्यादा बढ़ावा देने की तैयारी में है। इसका उद्देश्य यह भी है कि सडक़ बनने के बाद टोल से मिलने वाली राशि सरकार के पास आए। बीओटी मॉडल में सडक़ बनाने वाली निजी कंपनी निवेश करती है और तय अवधि तक टोल से अपनी लागत और मुनाफा वसूलती है। वहीं एचएएम में सडक़ निर्माण की लागत का 40 प्रतिशत हिस्सा सरकार देती है, जबकि बाकी 60 प्रतिशत राशि निजी कंपनी लगाती है। इस मॉडल में सडक़ बनने के बाद टोल वसूली पीडब्ल्यूडी के माध्यम से किए जाने का प्रावधान है। यही वजह है कि विभाग नई परियोजनाओं के लिए एचएएम मॉडल को प्राथमिकता देने पर विचार कर रहा है। एमपीआरडीसी के टोल आधारित सडक़ प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक हाल में कुछ सडक़ों को एचएएम के तहत मंजूरी दी गई है। इनमें सिवनी-बालाघाट, विदिशा-भोपाल और दमोह-कटनी सडक़ परियोजनाएं शामिल हैं। इन सडक़ों पर टोल प्लाजा बनाए जाने की योजना है। इसके अलावा आने वाले समय में एचएएम के तहत और सडक़ परियोजनाएं मंजूर किए जाने की तैयारी है।
वाहन चालकों पर बढ़ेगा खर्च
नई सडक़ों को टोल नेटवर्क में शामिल किए जाने का सीधा असर वाहन चालकों पर पड़ेगा। इन सडक़ों का इस्तेमाल करने वाले लोगों को निर्धारित शुल्क देना होगा। सरकार जहां इसे सडक़ निर्माण और रखरखाव के लिए अतिरिक्त आय का जरिया मान रही है, वहीं यात्रियों और माल परिवहन करने वाले वाहनों के लिए यात्रा की लागत बढऩे की संभावना है। नई सडक़ों पर टोल लागू होने से पहले शुल्क की दर और वसूली की व्यवस्था तय की जाएगी।

 

 

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Jai Lok
Author: Jai Lok

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