
नगर निगम अधिकारियों एवं ठेकेदार की भूमिका की जांच की मांग
जबलपुर (जयलोक)। गंज़ीपुरा क्षेत्र में नवनिर्मित सुलभ शौचालय के निर्माण कार्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। निर्माण पूर्ण होने के कुछ ही समय बाद सीलिंग गिरने, टाइल्स उखडऩे, पानी का रिसाव एवं सीलन जैसी समस्याएं सामने आने के बाद अब निर्माण कार्य की गुणवत्ता एवं शासकीय राशि के उपयोग को लेकर नगर निगम के संबंधित अधिकारियों एवं ठेकेदार की भूमिका की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई गई है। इसी संबंध में आयुष पहारिया द्वारा आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ के पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं तकनीकी जांच की मांग की गई।ज्ञापन में कहा गया है कि नवनिर्मित भवन में इतनी जल्दी गंभीर तकनीकी खामियां सामने आना अपने आप में निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल खड़ा करता है। विशेष रूप से टाइल्स के उखडऩे का मामला गंभीर है। आरोप है कि कई स्थानों पर टाइल्स लगाने से पहले आवश्यक प्लास्टर का कार्य नहीं किया गया। वर्तमान में शौचालय को बंद कर पुन: प्लास्टर का कार्य कराया जा रहा है। ऐसे में यह जांच का विषय है कि यदि प्लास्टर का कार्य पहले ही स्वीकृत निर्माण का हिस्सा था, तो क्या उसके नाम पर पूवज़् में शासकीय भुगतान किया जा चुका है।
अधिकारियों और ठेकेदार की जवाबदेही तय करने की मांग- आयुष पहारिया और अभिनव मिश्रा ने कहा कि निर्माण कार्य केवल ठेकेदार की जिम्मेदारी नहीं होता, बल्कि संबंधित अधिकारियों की निगरानी, माप एवं गुणवत्ता सत्यापन भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इसलिए यह स्पष्ट होना चाहिए कि निर्माण कार्य की निगरानी किस अधिकारी द्वारा की गई, कार्य की गुणवत्ता का सत्यापन किसने किया और भुगतान से पहले मौके पर वास्तविक कार्य का परीक्षण किस स्तर पर किया गया।

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