
जबलपुर (जय लोक)। बीमारी, पारिवारिक जिम्मेदारियों और कारोबार में हुए नुकसान के बीच लिया गया कर्ज एक कारोबारी के लिए कथित तौर पर ऐसा जाल बन गया, जिसमें रकम चुकाने के बाद भी पीछा नहीं छूटा। गढ़ा थाना क्षेत्र में सामने आई शिकायत ने कथित सूदखोरी के उस खेल पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिसमें मूल रकम से कई गुना अधिक राशि वसूलने के बावजूद कथित तौर पर दोबारा पैसे और ब्याज की मांग की जा रही थी। भारत कॉलोनी, मदनमहल निवासी 47 वर्षीय संतोष कुनबी की शिकायत पर गढ़ा पुलिस ने 12 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि अलग-अलग समय पर लिए गए कर्ज के बदले वह बड़ी रकम ब्याज के रूप में चुका चुका है, इसके बावजूद कर्ज देने वाले लोग मूल रकम और अतिरिक्त ब्याज की मांग कर उसे कथित रूप से परेशान कर रहे हैं।

5 लाख लिए, 3.61 लाख ब्याज दिया

शिकायत के मुताबिक, सूखा निवासी अनिल पटेल से सितंबर 2025 में 5 लाख रुपये लिए गए थे। इसके बदले करीब 3.61 लाख रुपये ब्याज के रूप में देने का दावा किया गया है, लेकिन इसके बाद भी 5 लाख रुपये मूल रकम की मांग की जा रही है।इसी तरह शक्ति नगर निवासी उमेश पटेल से 1.75 लाख रुपये लेने और करीब 1.68 लाख रुपये ब्याज देने के बावजूद 3.50 लाख रुपये मांगने का आरोप लगाया गया है।
6 लाख के कर्ज के बदले 9.65 लाख देने का दावा
बेदीनगर निवासी आशू नेल्सन से वर्ष 2022-23 में कुल 6 लाख रुपये लेने की बात शिकायत में कही गई है। शिकायतकर्ता का दावा है कि वह 9.65 लाख रुपये चुका चुका है, इसके बावजूद 6 लाख रुपये मूल रकम और आठ माह के ब्याज की अतिरिक्त मांग की जा रही है।कृपाल चौक निवासी अंकुर डाबर पर 80 हजार रुपये के बदले 2.40 लाख रुपये वसूलने और फिर 70 हजार रुपये की मांग करने का आरोप लगाया गया है।
30 हजार बाकी थे, 91 हजार वसूले
शिकायत के अनुसार अजय महोबिया से करीब 50 हजार रुपये उधार लिए गए थे। 20 हजार लौटाने के बाद बचे 30 हजार के बदले कथित तौर पर 91 हजार रुपये वसूल लिए गए, फिर भी 1.98 लाख रुपये और मांगने का आरोप है। गुप्तेश्वर निवासी सन्नी अरोरा से 30 हजार रुपये लेने के बदले 42 हजार रुपये देने के बावजूद 42 हजार रुपये और मांगने की शिकायत की गई है। मामले में सबसे गंभीर आरोप जॉनसन टावर, गोरखपुर निवासी सचिन चैकसे को लेकर है। शिकायतकर्ता के अनुसार उसने करीब डेढ़ वर्ष पहले 15 लाख रुपये तीन प्रतिशत ब्याज पर लिए थे। आरोप है कि मकान के बिक्री संबंधी दस्तावेज के रूप में 2 लाख रुपये का रजिस्टर्ड एग्रीमेंट भी कराया गया। शिकायतकर्ता का दावा है कि वह 18 लाख रुपये और 2.21 लाख रुपये ब्याज के रूप में चुका चुका है, इसके बावजूद 2 लाख रुपये की और मांग की जा रही है।
एक से कर्ज, दूसरे का ब्याज
शिकायत में कथित सूदखोरी के एक पूरे चक्र का भी आरोप लगाया गया है। संतोष का कहना है कि आरोपी आपस में मिले हुए हैं और एक से लिया पैसा दूसरे को ब्याज के रूप में चुकाने के लिए फिर किसी अन्य व्यक्ति से ब्याज पर रकम दिलाई जाती है। रकम बढऩे पर तीसरे व्यक्ति से नया कर्ज लेने की स्थिति बनती जाती है।शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि इस कथित चक्र में फंसाकर उससे मूल रकम से कहीं अधिक राशि वसूल की गई तथा गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी भी दी गई। शिकायत में कहा गया है कि कर्ज चुकाने के लिए उसने अपना मकान तक बेच दिया, लेकिन इसके बाद भी कथित रूप से रकम की मांग जारी रही।
मामले में पुलिस ने शिकायत के आधार पर धारा 296(बी), 351(3), 61(2) बीएनएस तथा धारा 4 मध्यप्रदेश ऋणियों का संरक्षण अधिनियम के तहत अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।





