Download Our App

Home » जबलपुर » जमीन जिसके नाम, खाद उसी के नाम

जमीन जिसके नाम, खाद उसी के नाम

बटाईदार किसानों के लिए सरकारी खाद व्यवस्था बनी मुसीबत

जबलपुर (जय लोक)ं।  जबलपुर जिले में धान की फसल में खाद डालने का समय शुरू होते ही यूरिया और डीएपी की उपलब्धता को लेकर किसानों की परेशानी बढ़ गई है। सबसे ज्यादा दिक्कत उन किसानों को हो रही है जो बटाई, सिकमी या अन्य व्यवस्था के तहत जमीन लेकर खेती कर रहे हैं। जमीन उनके नाम नहीं होने के कारण सहकारी समितियों से उन्हें निर्धारित प्रक्रिया के तहत खाद नहीं मिल पा रही, जबकि फसल की जिम्मेदारी पूरी तरह उन्हीं पर है।सरकारी व्यवस्था में जमीन के रकबे के आधार पर खाद का वितरण होने से वास्तविक रूप से खेती कर रहे छोटे काश्तकारों के सामने संकट खड़ा हो गया है। ऐसे किसानों को मजबूरी में निजी दुकानों का रुख करना पड़ रहा है, जहां सरकारी दर से अधिक कीमत चुकाने की शिकायतें सामने आ रही हैं।तहसील स्तर पर बनाए गए सेंट्रल लॉक केंद्रों से खाद लेने के लिए ग्रामीण किसानों को कई किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ रही है। छोटे किसानों के लिए आने-जाने का खर्च, मजदूरी का नुकसान और कतार में लगने का समय अलग परेशानी है। कई स्थानों पर नकद बिक्री की सीमित व्यवस्था के कारण किसानों को तत्काल जरूरत के बावजूद खाद उपलब्ध नहीं हो पा रही।सहकारी समितियों से खाद नहीं मिलने की स्थिति में किसान निजी विक्रेताओं पर निर्भर हो रहे हैं। किसानों का आरोप है कि इसी मजबूरी का फायदा उठाकर कुछ दुकानदार सरकारी मूल्य से अधिक राशि वसूल रहे हैं। 267 रुपये मूल्य वाली बोरी के लिए 330 से 340 रुपये तक वसूले जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
स्टॉक की अफवाह से बढ़ रही खरीदारी
ग्रामीण क्षेत्रों में यह भी चर्चा है कि खाद का स्टॉक खत्म होने वाला है और आने वाले दिनों में आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इसके चलते किसान जरूरत से पहले ही खाद खरीदने के लिए मजबूर हो रहे हैं। यदि वास्तव में पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है तो प्रशासन को समितिवार और केंद्रवार उपलब्धता सार्वजनिक कर किसानों की आशंका दूर करनी चाहिए।
सरकार से किसानों की मांग
किसानों की मांग है कि केवल भूमि रिकॉर्ड के आधार पर खाद वितरण करने के बजाय बटाई और सिकमी पर वास्तविक खेती करने वाले किसानों के लिए भी सरल व्यवस्था बनाई जाए। प्रत्येक प्राथमिक सहकारी समिति स्तर पर नकद बिक्री काउंटर शुरू किए जाएं और निजी दुकानों पर खाद की कीमत व स्टॉक की नियमित जांच की जाए।
एक लाइसेंस, कई ठिकानों पर कारोबार का आरोप
ग्रामीण क्षेत्रों में कुछ खाद विक्रेताओं द्वारा एक लाइसेंस के आधार पर अलग-अलग स्थानों से कारोबार करने और बिना वैध पंजीयन के खाद भंडारण किए जाने के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। किसानों का कहना है कि यदि ऐसे स्थानों की नियमित जांच हो तो वास्तविक स्टॉक और कालाबाजारी की स्थिति सामने आ सकती है।
https://jailok.com/%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%a8%e0%a5%8b%e0%a4%9f-%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%a1-11-%e0%a4%b9%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%a1%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be/
Jai Lok
Author: Jai Lok

RELATED LATEST NEWS

Home » जबलपुर » जमीन जिसके नाम, खाद उसी के नाम

Top Headlines

राम मंदिर के चंदे को लेकर जयराम ने भाजपा को घेरा पूछा-कितने करोड़ लोगों ने कितना दान दिया?

कांग्रेस नेता ने पीएम मोदी, शाह और योगी से कहा- व्यापक जाँच क्यों नहीं कराई जा रही नई दिल्ली। अयोध्या

Live Cricket

error: Content is protected !!