
सार्वजनिक जीवन में निरंतरता, दीर्घकालिक दृष्टि और निर्णय लेने की क्षमता किसी भी लोकतांत्रिक नेतृत्व की महत्वपूर्ण कसौटी होती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए वर्ष 2026 एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने के बाद उनकी सरकार के मुखिया के रूप में सेवा यात्रा 25वें वर्ष में प्रवेश कर चुकी है। नरेन्द्र मोदी जून 2026 में हुए लगातार दिनों के आधार पर भारत के सबसे लंबे लंबे समय तक सेवा करने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री भी बने। नरेंद्र मोदी के लगभग ढाई दशक के शासनकाल को केवल पद पर रहने की अवधि के रूप में देखना पर्याप्त नहीं होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 वर्षों में देश की दिशा और दशा को बदलने के निरंतर प्रयास किए हैं। उनके कार्यकाल के दौरान शासन की प्राथमिकताओं, प्रशासनिक कार्य शैली और विकास की अवधारणा में कई बदलाव दिखाई दिए हैं। गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने बुनियादी ढांचे, बिजली, पानी, कृषि और औद्योगिक विकास पर जोर दिया। प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी का यही दृष्टिकोण राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक रूप से सामने आया। पिछले वर्षों में गरीब कल्याण और प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण, आवास, बिजली, स्वछता, स्वच्छ पानी, स्वास्थ्य सुरक्षा, डिजिटल भुगतान आधारित सेवाओं के विस्तार में जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन का स्वरूप बदला है। सरकार के अनुसार करोड़ों लोगों को इन योजनाओं का लाभ मिला है और बड़ी संख्या में लोगों को गरीबी से बाहर आने में मदद मिली है। इन उपलब्धियों का वास्तविक मूल्यांकन करते समय आंकड़ों के साथ जमीनी स्तर पर उनकी गुणवत्ता, पहुँच और स्थायित्व को भी कसौटी बनाना आवश्यक है।
आर्थिक क्षेत्र में भी भारत की महत्वाकांक्षायें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बदली हैं । मेक इन इंडिया, डिजिटल अर्थव्यवस्था, बुनियादी ढांचे के विस्तार और विनिर्माण को बढ़ावा देने की कोशिशें में भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की दिशा में आगे बढ़ा है। इसी के साथ रोजगार , कृषि आय, असमानता, छोटे कारोबारों की चुनौतियों और मानव विकास जैसे प्रश्न आज भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।
विकास की गति तभी सार्थक मानी जाएगी जब उसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक टिकाऊ रूप से पहुँचे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में भारतीय विदेश नीति में भी महत्वपूर्ण सक्रियता बढ़ी है। विभिन्न शक्ति केंद्रों के साथ संबंधों को समानांतर रूप से आगे बढ़ाना, वैश्विक मंच पर भारत की भूमिका बढ़ाना और विकासशील देशों की आवाज को प्रमुखता देना मोदी सरकार की विदेश नीति की प्रमुख विशेषता रही है। 2024 में नरेन्द्र मोदी का तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ लेना भी भारतीय लोकतंत्र में मिले लगातार तीन जनादेशों की महत्वपूर्ण राजनीतिक घटना है। हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 25 वर्षों की यात्रा का मूल्यांकन केवल उपलब्धियों के आधार पर नहीं होना चाहिए। लोकतंत्र में सरकार से जवाबदेही, संस्थाओं की मजबूती, सामाजिक सद्भाव, रोजगार, शिक्षा स्वास्थ्य और नागरिक स्वतंत्रता से जुड़े प्रश्न भी लगातार पूछे जाने चाहिए। किसी भी लंबे शासनकाल की सबसे बड़ी परीक्षा यही होती है कि विकास और प्रशासनिक क्षमता के साथ लोकतांत्रिक संस्थाएं कितनी मजबूत होती हैं और समाज के विभिन्न वर्गों का विश्वास कितना कायम रहता है। आज भारत एक ऐसे दौर में है जब उसे तेजी से बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था, तकनीकी क्रांति, ऊर्जा सुरक्षा, राष्ट्रीय सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। ऐसे समय में अगले चरण का लक्ष्य केवल तेज विकास नहीं बल्कि समावेशी टिकाऊ और रोजगारसृजक विकास होना चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 25 वर्ष की शासन यात्रा इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि इस ने भारतीय राजनीति और शासन को एक लंबी निरंतरता दी है। अब इस यात्रा का अगला अध्याय इस बात से तय होगा कि भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की परिकल्पना कितनी प्रभावी ढंग से जमीन पर उतरती है। अंतत: किसी भी नेता की सबसे स्थाई विरासत नारों में नहीं बल्कि नागरिक जीवन में आए वास्तविक और टिकाऊ बदलाव में दिखाई देती है। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस पर उन्हें बहुत-बहुत बधाई और हार्दिक शुभकामनाएं।





