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ई-सिगरेट पकडऩे वाले बहादुरों को क्यों नहीं नजर आ रहे धड़ल्ले से हुक्का पिलवा रहे होटल

खुलेआम बिक रहा गाँजा, स्मैक, अवैध शराब, चल रहे अवैध अहाते

जबलपुर (जय लोक)। कैंट पुलिस के बहादुर जवानों ने विगत दिवस सदर के एक पान दुकान संचालक के कब्जे से पांच ई-सिगरेट बरामद की। कैंट पुलिस के लिए यह बहुत बड़ी उपलब्धि थी लेकिन इसके साथ ही यह सवाल भी उठ रहा है कि इतने सक्रिय पुलिस कर्मचारियों को आखिर अपने ही थाना क्षेत्र और आसपास के इलाकों में संचालित हो रहे खुलेआम बेधडक़-धड़लल्ले से चल रहे हुक्का बार नजर क्यों नहीं आते। इन पर कार्यवाही क्यों नहीं होती। शहर के आधा दर्जन से अधिक ऐसे बड़े होटल हैं जहां खुलेआम हुक्का परोसा जा रहा है। रईसों की बिगड़ी औलादें यहां अपने शौक फरमाने के लिए आते हैं। इस सेटिंग के बदले प्रतिमाह संबंधित थानों में मोटी रकम भी दी जाती है। शायद वह पान वाला यह प्रक्रिया समझ नहीं पाया और उच्च कोटि की व्यवस्था का हिस्सा नहीं बन पाया जिसके कारण उसके यहां से भारी भरकम 5000 की प्रतिबंधित ई-सिगरेट जिसको इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट भी कहा जाता है बरामद कर की गई।
वरिष्ठों के निर्देश दर किनार थाना प्रभारी  की मनमानी गली-गली खुले अहाते
शहर की कानून व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए वरिष्ठ पुलिस अधिकारी जितने जतन कर रहे हैं लगातार बैठकर कर अधीनस्थ अधिकारियों से लेकर थाना प्रभारी तक को निर्देशित किया जा रहा है लेकिन परिणाम स्वरूप हासिल आई शून्य ही नजर आ रहा है। गली मोहल्ले तो छोड़ो शहर के मुख्य मार्ग पर भी शराब दुकान के आसपास अवैध रूप से खुलेआम आहाते संचालित हो रहे हैं।
शराब दुकान ठेकेदार अवैध अहातों से वसूल रहे किराया
शहर के शराब दुकान ठेकेदार थाना बंदी और आबकारी विभाग को प्रति माह पैसे अदा करते हैं यह बात पूर्ण रूप से सार्वजनिक हो चुकी है, कई बार पूर्व में शराब ठेकेदार के गुर्गे और खुद शराब ठेकेदार भी इस बात को स्वीकार कर चुके हैं। बदले में आबकारी और संबंधित थाना पुलिस अपनी आंखें बंद कर लेते हैं।
यही वजह है कि रात में 11:30 बजे के बाद शराब दुकानों के शटर बंद हो जाते हैं लेकिन वहां मौजूद छोटी खिड़कियां पूरी रात खुली रहती हैं जहां से महंगे दामों पर अवैध तरीके से शराब विक्रय का कार्य जारी रहता है। शराब दुकानों के आसपास अवैध रूप से जो अहातेे संचालित होते हैं उनसे मोटी रकम शराब ठेकेदार के द्वारा किराए के रूप में वसूल की जाती है। शराब ठेकेदार पुलिस कर्मचारियों को प्रति माह दी जाने वाली खैरात के बदले खुलेआम आहाते की अनुमति दिलवाता है। अगर यह खैरात नहीं बट रही तो फिर कैसे पूरे शहर में अवैध अहाते खुलेआम संचालित हो रहे हैं।
हुक्काबार भी हो रहे        खुलेआम संचालित
शराब के अवैध कारोबार के साथ ही साथ नशे का एक और कारोबार हुक्काबार बने हुए हैं। बड़े-बड़े नामचीन स्थान पर हुक्का बार संचालित हो रहे हैं बाकायदा पूर्व से हुक्का पीने वाले ग्राहकों को इसकी सूचना भेजी जाती है कि फलाँ दिन पार्टी आयोजित हो रही है और इस दिन ग्राहकों की सेवा में हुक्का भी उपलब्ध होगा। इसी सूचना के आधार पर सैकड़ों की संख्या में हुक्का पीने वाले लोग अवैध रूप से एकत्रित हो जाते हैं। सबको सूचना हो जाती है बस पुलिस की आंख और कान बंद रहते हैं। बिलहरी, विजय नगर, रेलवे पुल के पास स्थित होटलों में हुक्के का प्रचलन आम बात हो गई है।
लेकिन पुलिस के बहादुर सिपाहियों को पान की दुकान में बिकने वाली अवैध सामग्री ई सिगरेट तो दिखती है लेकिन खुलेआम शहर में बिक रही गांजे की पुडिय़ा, स्मेक की पुडिय़ा, गली मोहल्ले में हो रही शराब की पेकारी नजर नहीं आ रही है। जितनी मुस्तैदी से इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट को अवैध बताकर पकड़ा गया उतनी ही मुस्तादी से गांजा, स्मेक और अवैध रूप से बिक रही शराब की धरपकड़ की अपेक्षा की जा रही है।

 

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Jai Lok
Author: Jai Lok

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