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कर्मचारियों की कमी से जूझ रहा है वन विभाग

गश्त हो रही प्रभावित, वन्य जीव सुरक्षा और संरक्षण पर पड़ रहा असर

जबलपुर (जय लोक) । वन विभाग में इन दिनों गश्त से लेकर होने वाले दैनिक कार्य पूरी तरह से प्रभावित हो रहे हैं जिसका बड़ा कारण विभाग में अमले की बड़ी कमी होना बताया जा रहा है। वन विभाग में स्टाफ और जवानों (फॉरेस्ट गार्ड, रेंजर व अन्य अधिकारियों) की भारी कमी बनी हुई है, जिससे वनों और वन्यजीवों की सुरक्षा प्रभावित हो रही है।
जबलपुर सहित पूरे मध्य प्रदेश के वन विभाग में लगभग 8,125 पद खाली हैं, जिसमें आईएफएस और रेंजरों के पद भी शामिल हैं। हाल ही में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने वन विभाग में बड़े पैमाने पर हुए प्रमोशन के बाद खाली हुए पदों को भरने के लिए नई भर्ती प्रक्रिया के निर्देश दिए हैं। वन बल प्रमुख और प्रशासन द्वारा रिक्त पदों को भरने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
कागजों पर हो रही गश्त
वन विभाग में जवानों की कमी से सबसे ज्यादा असर गश्त पर पड़ रहा है। इस समय गश्त केवल कागजोंं तक ही सीमित हो गई है। जबकि असल में मैदान से वन विभाग के कर्मचारी नदारत हैं। आलम यह है कि एक कर्मचारी के पास अनेक बीट हैं, जिससे कार्य और कार्य की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।
जबलपुर वन मंडल में 122 बीट
अधिकारियों से प्राप्त जानकारी के अनुसार जबलपुर वन मंडल मं 122 बीटें हैं। जिनमें करीब 40 प्रतिशत बीट कर्मचारियों की कमी से खाली हैं। जिससे वन विभाग का कार्य भी प्रभावित हो रहा है। वर्तमान में स्वीकृत पदों के मुकाबले कर्मचारी कम हंै। कई महत्वपूर्ण बीटों पर एक ही वन रक्षक के पास एक से अधिक बीटों का प्रभार है। यहां तक की अनेक जगह तो कई बीट खाली हैं।
सूचना मिलने पर नहीं पहुँच पा रही टीम
वन अमले में कमी का असर मैदान में भी देखने को मिल रहा है। वन्य जीवों के रिहायशी इलाकों में प्रवेश करने की खबर मिलने के बाद भी मौके पर वन अमला नहीं पहुँच पाता। जानकारी मिलने के एक दो दिन बाद वन अमला अलर्ट होता है। जिससे एक ओर तो वन्य जीवों की सुरक्षा खतरे में है तो दूसरी ओर लोगों की जान का खतरा भी बना हुआ है।
दीवाली पर होता है शिकार
खास तौर पर दीवाली के मौकों पर वन्य जीवों के शिकार के मामले बढ़ जाते हैं। जिसमें उल्लू का तंत्रमंत्र के लिए मुख्य तौर पर शिकार किया जाता है। इस मौके पर शिकारी जंगलों में डेरा जमाए रहते हैं। वन्य जीवों को शिकारियों से बचाने के लिए वन विभाग के पास पर्याप्त बल उपलब्ध नहीं हैं। जिसके कारण आज भी दीवाली के दौरान वन्य जीवों का शिकार किया जा रहा है।
ये कार्य हुए प्रभावित
वन संरक्षण: जंगलों को अवैध कटाई, अतिक्रमण और लकड़ी की चोरी से बचाना।
वन्यजीव सुरक्षा: जंगली जानवरों की रक्षा करना और शिकारियों पर नजर रखना।
पौधारोपण : नए पेड़-पौधे लगाना और बंजर भूमि को हरा-भरा बनाना।
गश्त लगाना: जंगलों में नियमित गश्त (पेट्रोलिंग) करना।
वन अग्नि प्रबंधन: गर्मियों या सूखे के दौरान जंगलों में लगने वाली आग (वानिकी आग) को रोकना और तुरंत सूचना देना।
वन्यजीव गणना: जंगलों में रहने वाले जानवरों की गिनती करना।
मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकना: यदि कोई जंगली जानवर रिहायशी इलाके में आ जाए, तो उसे सुरक्षित वापस जंगल में भेजना।
इनका कहना है
वन विभाग में जवानों की कमी है, जिसके कारण कुछ कार्य प्रभावित हो रहा है। लेकिन इस कमी को पूरा करने के लिए भर्तियां भी की जा रही है। कुछ माह में 132 कर्मचारियों की भर्ती होना स्वीकृत हैं।
– ऋषि मिश्रा, डीएफओ

 

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Jai Lok
Author: Jai Lok

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