
जबलपुर (जयलोक)। 27 प्रतिशत आरक्षण का मामला मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से खारिज होने के बाद भारतीय जनता पार्टी और कांगे्रस के बीच तकरार लगातार बढ़ती जा रही है। कांग्रेस के सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा ने आज पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार ने आरक्षण के पक्ष में मजबूती से दलीलें नहीं रखीं और ना ही जरूरी आंकड़े पेश किए। श्री तन्खा का कहना है कि अब सरकार को सुप्रीम कोर्ट में तथ्यों और आंकड़ों के साथ अपना पक्ष रखना चाहिए वहीं भारतीय जनता पार्टी की ओर से लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने कांगे्रस पर आरोप लगाए हैं और कहा है कि कांगे्रस ने आरक्षण के मामले में धोखा दिया है।
श्री तन्खा ने बताया कि मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने 9 अक्टूबर 2026 को दिए अपने फैसले में तत्कालीन कमलनाथ सरकार द्वारा 2019 में बढ़ाए गए 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण को सुप्रीम कोर्ट की 50 प्रतिशत की सीमा का उल्लंघन मानते हुए रद्द कर दिया था। कोर्ट का कहना था कि सरकार आरक्षण बढ़ाने के लिए ठोस और पर्याप्त डेटा या असाधारण परिस्थितियां पेश करने में पूरी तरह विफल रही। इसके बाद से ही विवेक तन्खा और कांग्रेस पार्टी लगातार मोहन यादव सरकार को कानूनी मोर्चे पर घेर रही है।
मध्य प्रदेश में ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण देने वाले कानून को जबलपुर हाईकोर्ट द्वारा असंवैधानिक करार दिए जाने के बाद, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा ने राज्य की भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। विवेक तन्खा ने सोशल मीडिया और अपने बयानों के जरिए इस पूरे मामले को लेकर सरकार की मंशा और कानूनी पैरवी पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। विवेक तन्खा ने कहा कि सामान्य तौर पर इस संवेदनशील मुद्दे पर मध्य प्रदेश सरकार को खुद आगे बढक़र सुप्रीम कोर्ट में अपील करनी चाहिए थी। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर सरकार ऐसा नहीं करती है, तो यह समझा जाएगा कि वह हाईकोर्ट के इस निर्णय से संतुष्ट है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि इस पूरे मामले में राज्य सरकार ही ‘मुख्य पक्षकार’ है। हाईकोर्ट में बहस मूल रूप से सरकार द्वारा की जानी थी, न कि किसी राजनीतिक दल के जरिए। आरक्षण के कानून को प्रभावी तरीके से डिफेंड (बचाव) करना पूरी तरह सरकार की जिम्मेदारी है। विवेक तन्खा ने सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से इस बात पर भी नाराजगी जताई कि बिना किसी हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के स्टे के बावजूद नियमों के विपरीत 13 प्रतिशत पदों को होल्ड (रोक) करके रखा गया, जिससे लाखों ओबीसी युवा सालों से बेरोजगार हैं। उन्होंने सरकार के रवैये को केवल ‘तारीख पर तारीख’ खेलने वाला बताया और आरोप लगाया कि इसे जानबूझकर कानूनी नहीं बल्कि राजनीतिक बंधक बना दिया गया है।
सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी
श्री तन्खा ने यह भी ऐलान किया है कि वह ओबीसी की हक की लड़ाई को सुप्रीम कोर्ट लेकर जा रही है। इस कानूनी लड़ाई में कांग्रेस की तरफ से विवेक तन्खा, कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी जैसे देश के शीर्ष और वरिष्ठ वकील अदालत में ओबीसी आरक्षण के समर्थन में पैरवी करेंगे।
कांगे्रस के शासन में जल्दबाजी में तैयार किया गया विधेयक-राकेश सिंह
वहीं दूसरी ओर भाजपा के वरिष्ठ नेता तथा प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने आरक्षण के मामले में कांगे्रस को कटघरे में खड़ा किया है। श्री सिंह ने कहा कि कांगे्रस ने आरक्षण के मामले में धोखा किया है। उन्होंने बताया कि हाईकोर्ट के आदेश में यह बहुत स्पष्ट रूप से कहा गया है कि कांगे्रस सरकार जो विधेयक लेकर आई थी वह जल्दबाजी में तैयार किया गया और उसमें कई कमियां भी उजागर हुई हैं। इसी वजह से आरक्षण को लेकर मौजूदा स्थिति बन गई है। उन्होंने यह भी कहा कि अब राज्य सरकार का प्रयास है कि सभी के साथ न्याय हो और सरकार इस मामले को कानूनी स्तर पर आगे भी लड़ेगी।

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