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यदि महाराज बिजली बचा रहे हैं तो इसमें बुराई क्या?

चैतन्य भट्ट
(जय लोक)। मध्य प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष जीतू पटवारी को भी भाजपाइयों की आलोचना करने में  पता नहीं क्या मजा आता है, माना कि आप विरोधी पक्ष के नेता हो लेकिन हमेशा भाजपा के नेताओं  के पीछे लगे रहो ये ठीक बात नहीं है अब देखो ना एक बड़ा भारी बयान दे दिया कि केंद्रीय मंत्री ‘ज्योतिरादित्य  सिंधिया’ के महल में चार सौ कमरे हैं और उनका बिजली का बिल कुल जमा पंद्रह सौ रुपए आ रहा है। अरे  जीतू भैया  तमाम लोग कह रहे हैं, सरकारें कह रही हैं  कि बिजली बचाना हर व्यक्ति का कर्तव्य है, किसी भी कमरे से निकलो तो वहां की लाइट बंद कर दो, एसी कम से कम चलाओ, पंखे की भी जरूरत हो तो स्टार्ट करो, बेवजह बिजली से रोशन मत करो अपने मकान को , बस इन्हीं ब्रह्म वाक्यों को महाराज ने अपने दिल दिमाग में उतार लिया और उन्होंने अपने महल में बिजली की बचत शुरू कर दी, जहां बैठते हैं वहां सिर्फ एक बल्ब जलाते हैं और जैसे ही कमरे से बाहर निकलते हैं तुरंत लाइट ऑफ कर देते हैं अब जब बिजली बचाने के इतने जतन  कर रहे हैं तो बिजली का बिल तो अपने आप कम हो जाएगा ना, इसमें कौन सी बड़ी बात है, और यदि चार सौ  कमरे  हैं भी  तो आदमी एक ही कमरे में तो रहेगा और जब एक कमरे में रहेगा तो एक ही बल्ब या एक ट्यूबलाइट जलेगी  तो उसका बिल अपने आप कम आएगा । पटवारी जी  को बेवजह में मुद्दे  खड़ा करने की आदत सी हो गई है उनको तो इस बात के लिए महाराज को बधाई देना चाहिए बिजली बचाने की अपील पर और किसी ने ध्यान दिया हो या ना ध्यान दिया कम से कम महाराज ने तो उस पर अमल करना शुरू कर दिया यह बात कोई कम है क्या? वैसे ये भी पता लगा है कि महाराज जी के  महल में बीस से ज्यादा मीटर लगे हुए हैं यानी बीस कमरों के बीच में एक मीटर, अपनी तो पटवारी जी को एक सलाह है कि महाराज की आलोचना करने की बजाय उनका सम्मान करना चाहिए। सरकारें कहती हैं पेट्रोल बचाइये, बिजली बचाइए, पर्यावरण बचाइए, सडक़े बचाइए, नदियां बचाइए,सबको बचाने की बात हो रही है और यदि महाराज जी बिजली बचाने में सबसे आगे खड़े हो गए तो इसमें ऑब्जेक्शन नहीं लेना चाहिए, यदि महाराज की बिजली बचत से आम लोगों को भी बिजली बचाने की शिक्षा मिलती है तो यह तो एक पुण्य का काम होगा।
पलटू पुरुस्कार- अमेरिका के राष्ट्रपति ‘डोनाल्ड ट्रंप’ पुरस्कार के लिए बेचैन हैं। तरह तरह के बयानों के माध्यम से हर पुरस्कार के लिए अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं। लेकिन पुरुस्कार देने वाले बेचारे ट्रंप पर अपनी नजरे ही इनायत नहीं कर रहे हैं, पहले शांति के लिए ‘नोबेल पुरस्कार’ पाने के लिए ट्रंप ने अपनी पूरी ताकत लगा दी पता नहीं कौन-कौन से युद्ध को रोकने के लिए अपने आप को श्रेय दिया और यह कहा कि पूरे विश्व में शांति बनाए रखने के लिए उनके प्रयासों के कारण उन्हें शांति का नोबेल पुरस्कार देना चाहिए। लेकिन वे ये भूल गए कि  पूरे विश्व में अशांति फैलाने में उनकी सबसे बड़ी भूमिका है। जाहिर है जो अशांति फैला रहा हो उसे शांति का नोबेल पुरस्कार कैसे मिल सकता था सो किसी दूसरे को दे दिया गया। अब ट्रंप महाराज साहित्य के ‘पुलित्जर पुरस्कार’ पाने की मांग कर रहे थे। वे कह रहे हैं कि उन्हें अपने लेखन के लिए भी पुलित्जर पुरस्कार मिलना चाहिए था। लेकिन दोनों ही पुरुस्कार मुझे नहीं मिले जबकि मैं दोनों ही पुरस्कारों के  लिए डिजर्व करता था। अपना तो अंतरराष्ट्रीय संस्थानों से एक ही निवेदन है कि अब एक नया पुरस्कार ‘पलटू पुरुस्कार’ शुरू करो और हर साल का पुरस्कार ट्रंप जी को देते रहो?। क्योंकि उनके जैसा पलटू विश्व में दूसरा कोई नहीं है। आज कुछ कहते हैं, कल कुछ और, और परसों कुछ और, इतनी तेजी से पलटने वाले के लिए पलटू पुरुस्कार से बड़ा सम्मान और कोई नहीं हो सकता।
क्वालिटी भी तो कोई चीज है-  प्रदेश के ’एसीएस संजय दुब’ जी ने नगरीय निकायों के अफसरों की बैठक में साफ-साफ कह दिया कि आप लोगों द्वारा जो भी गड़बडय़िां  की गई हैं उन सब की पूरी जानकारी उनके पास हैं। उन्होंने बताया की एक नगरीय निकाय ने एक कचरे की गाड़ी दो लाख में खरीद ली वहीं दूसरी ने छह लाख में खरीदी, एक नगरीय निकाय ने फिनायल की बोतल पांच रुपए में खरीदी तो दूसरे ने एक फिनाइल की बोतल तेतीस हजार रुपए में खरीद ली, दो सौ एलईडी बल्ब की कीमत साठ लाख रुपए दे दी।  एसीएस साहब ने कहा कि बहुत जल्द गड़बडय़िां करने वालों पर कड़ी कार्यवाही की जाएगी, अब इन साहब को कौन समझाए कि ‘क्वालिटी’ भी तो कोई चीज होती है।आप किसी ढाबे में खाना खाओगे तो एक प्लेट दाल  सौ रुपए में मिल जाएगी वही दाल किसी फाइव स्टार होटल में खाओगे तो एक से दो हजार की  पड़ेगी, क्वालिटी का भी तो कोई मूल्य होता है ना? साधारण कटपीस का कपड़ा लोगे तो पचास रुपए मीटर   मिल जाएगा ‘रेमंड’ का लोगे तो पांच सौ रुपए मीटर मिलेगा यानी क्वालिटी ही सब कुछ मायने रखती है। अब जिस भी नगरीय निकाय में  एक बोतल फिनायल तैंतीस हजार रुपए में खरीदी होगी उसकी क्वालिटी कितनी गजब की होगी यह भी तो सोचो।  जो दो सौ बल्ब साठ लाख में खरीदे होंगे उनकी क्वालिटी कितनी जबरदस्त रही होगी। एक बल्ब से पूरा कार्यालय प्रकाशमान हो जाता होगा।  जब इतनी जबरदस्त ऊर्जा उसमें होगी तो उसकी कीमत भी तो जबरदस्त होगी ना? कारों को भी देख लो आप, कोई पांच लाख की है तो कोई दो करोड़ की । यानी क्वालिटी क्वालिटी में फर्क होता है। जिन लोगों ने भी ऊंचे दामों में अगर चीज खरीदी है तो उन्होंने क्वालिटी का ध्यान रखा है। उनका सोचना था कि  “सस्ता रोए बार-बार महंगा रोये एक बार’ यानी महंगी चीज खरीदेंगे तो लंबे समय तक चलेगी। हो सकता है  किसी भी चीज को साफ करने में साधारण फिनायल में अगर चार बोतल लगती होगी तो तैंतीस हजार वाली फिनाइल की एक बूंद ही चार चार फिनाइल की बोतलों के बराबर काम कर देती होगी। इसलिए अपना तो एसीएस साहब से निवेदन है कि आप गड़बडय़िां देखने की बजाय उनकी क्वालिटी चेक करो और समझो कि वास्तव में कितनी हाई स्टैंडर्ड की चीज थी जो इन लोगों ने खरीदी थी अब थोड़ा बहुत कमीशन तो आजकल आम बात है इसलिए उसको इग्नोर करो और जांच पड़ताल बंद करो।
सुपर हिट ऑफ  द वीक
‘दुश्मन की परिभाषा क्या है’ श्रीमान जी से उनके दोस्त ने पूछा ‘किसी के किसी के साथ यदि विचार नहीं मिलते तो इसका मतलब ये नहीं है कि वे एक दूसरे के दुश्मन हैं वे पति पत्नी भी हो सकते हैं ’श्रीमान जी ने समझाया।

 

 

व्यक्तिगत मर्यादा की सीमाएं न लांघें

Jai Lok
Author: Jai Lok

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