
संस्कारधानी से सीधे राजधानी पहुँचे नगर निगम आयुक्त राम प्रकाश अहिरवार
जबलपुर (जय लोक)। विगत दिनों सरकार ने कुछ आईएएस अधिकारियों के तबादले किये। इन तबादलों में बादलों में सबसे चर्चित तबादला जबलपुर नगर निगम में आयुक्त के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे राम प्रकाश अहिरवार का रहा। आईएएस अधिकारी श्री अहिरवार का जबलपुर में लगभग 1 साल का कार्यकाल रहा। वे अपने तबादले के बाद इसलिए अधिक चर्चा में आ गए क्योंकि जिस समय उनका तबादला हुआ उसी दिन पूर्व मंत्री और जबलपुर के वरिष्ठ विधायक अजय बिश्नोई ने सोशल मीडिया पर रामप्रकाश अहिरवार के तबादले को जबलपुर के राम का हरण कह दिया था। इसके बाद तो इस मामले ने पूरे प्रदेश में तूल पकड़ लिया। देखते ही देखते राम प्रकाश अहिरवार के तबादले को लेकर आईएएस लॉबी ने भी अलग नजर से देखना शुरू कर दिया।
पूर्व मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ विधायक का खुलकर उनके समर्थन में सोशल मीडिया पर पोस्ट का सामने आना दूसरा एक और कारण जो इस पूरे घटनाक्रम का सर्वाधिक चर्चा का बिंदु यह रहा था कि जबलपुर से पहली बार किसी नगर निगम कमिश्नर को सीधे प्रदेश की राजधानी और सबसे चुनौती पूर्ण नगर निगम भोपाल संभालने की जिम्मेदारी मिली। सामान्य रूप से भोपाल नगर निगम की जिम्मेदारी मुख्यमंत्री या समकक्ष स्तर के नेताओं के बेहद विश्वास पात्र, करीबी और अधिक अनुभव रखने वाले वरिष्ठ अधिकारियों को मिलती आई है। अधिकारी वर्ग से लेकर राजनीतिक गलियारे में भी यही धारणा प्रचलन में है।
अब यही वजह है जो इस पूरे तबादले आदेश को और अधिक चर्चित और जिज्ञासा से पूर्ण बनाए हुए है। राजनीतिज्ञ हों चाहे आईएएस लॉबी हो सभी उत्साहितजन यही जानना चाहते हैं कि आखिर जबलपुर से सीधे भोपाल की छलांग लगाने में आईएस राम प्रकाश अहिरवार कैसे कामयाब हुए। दूसरा जबलपुर से उनकी विदाई का जो क्रम सामने आया वह भी समान्यत: अधिकारियों के तबादले हो जाने के बाद नजर नहीं आता है। ढोल नगाड़ों के साथ सपत्नीक उन्हें विदाई जुलूस के माध्यम से शुभकामनाओं के साथ विदाई दी गई। यह एक अधिकारी के लिए उसकी सकारात्मक जन सेवा और शहर के लोगों के प्रति व्यवहार का प्रतिफल जरूर माना जा सकता है। राम प्रकाश अहिरवार के कार्यकाल में कोई भी ऐसा विवाद उत्पन्न नहीं हुआ जो उनकी छवि के विपरीत दर्ज हुआ हो। नगर निगम के जो कार्य चले आ रहे थे उन्हें गति प्रदान करते हुए राम प्रकाश अहिरवार ने आगे बढ़ाया।कुछ लोगों ने उनके कार्यकाल के गुणगान में सोशल मीडिया में काफी पोस्ट की है। चर्चा इस बात की भी है कि जातिगत समीकरण के आधार पर जो पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल हुई है उन्हें अच्छे और बुरे दोनों अंदाज में दर्ज किया गया है।
रामप्रकाश अहिरवार के कार्यकाल के दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव के कई दौरे जबलपुर में हुए कुछ लोगों का मानना है कि इसी वजह से वह मुख्यमंत्री की नजरों में आए और अपनी कार्यप्रणाली और प्रेजेंटेशन के कारण यह लंबी छलांग लगाकर प्रदेश की संस्कारधानी से प्रदेश की राजधानी में अपनी उत्कृष्ठ कार्यप्रणाली का प्रदर्शन करने पहुंचे हैं। अधिकारियों का तबादला होना एक जिले से दूसरे जिले पर जाना सामान्य बात है लेकिन जिस प्रकार से इस बार यह समीकरण बना और संस्कारधानी से सीधे राजधानी नगर निगम का सफर आईएएस अधिकारी ने तय किया उसे लेकर जरूर लोगों में उत्सुकता अधिक है।

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