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कहो तो कह दूँ … लगता है चाँद भी ‘सौतिया डाह’ का शिकार हो गया…

(जय लोक)। हिंदी में सौतिया डाह एक मुहावरा बड़ा मशहूर है, शाब्दिक अर्थ में किसी पति की दो पत्नियों के बीच द्वेष के लिए इसका उपयोग किया जाता है लेकिन साधारण अर्थ ये केवल ईष्र्या नहीं, बल्कि मन के भीतर गहराई तक बैठने वाली एक तीव्र चुभन या द्वेष है।लोक-व्यवहार और मुहावरों में इस शब्द का प्रयोग अक्सर दो प्रतिद्वंद्वी या आपस में जलन रखने वालों के अत्यधिक द्वेष को दर्शाने के लिए भी किया जाता है। इस बार करवा चौथ के दौरान ‘चांद’ ने जो नौटंकी करी उससे साफ हो गया कि हजारों मील दूर बैठा चांद भी महिलाओं के प्रति ‘सौतिया डाह’ का शिकार हो गया था। जो बेचारी महिलाएं भूखी-प्यासी चांद को देखने के लिए गर्दन ऊँची कर कर के बार बार आकाश की तरफ  देख रही थीं लेकिन चांद आकाश से नदारत था, इधर पत्नियों की भूख के मारे अंतडिय़ा ऐंठी जा रही थी वहीं दूसरी तरफ पति भी परेशान थे कि ऐसा न हो कि भूख प्यास से बेहाल उनकी पत्नियां बेहोश हो जाएं, चारों तरफ  बेचैनी थी, रात गहराती जा रही थी लेकिन चांद का दूर-दूर तक पता नहीं था। वो राजपाल यादव की फ्लॉफ  फिल्म ‘अता पता लापता’ जैसा गायब हो गया था बाद में बहुत खोजबीन करने के बाद अपने को पता लगा कि चांद अपनी खूबसूरती की तुलना महबूबा या पत्नी से करने से नाराज था। उसको लगता था कि उससे ज्यादा हसीन इस दुनिया में और कोई नहीं है लेकिन गीतकारों ने उसकी सुंदरता की ऐसी तेसी करते हुए ये गीत लिख दिया ‘चांद आहें भरेगा फूल दिल थाम लेंगे हुस्न की बात चली तो सब तेरा नाम लेंगे’ दूसरे गीतकार ने लिख दिया ‘चांद सी महबूबा हो मेरी कब ऐसा मैने सोचा था’ एक गीतकार तो सबसे बढक़र निकले उनकी पंक्तियां थी ‘चौदहवीं का चांद हो या आफताब हो’ एक गीतकार तो चांद के पार जाने की बात कहते हुए लिखते हैं ‘चलो दिलदार चलो चांद के पार चलो’ तो दूसरे गीतकार ने कह दिया ‘खोया खोया चांद’ यानी चांद को खोया हुआ बतला दिया, जबकि वो पूरी तरह चैतन्य था। जब चांद पर इतने गाने लिखे जा रहे थे तो नए गीतकार भला पीछे क्यों रहते सो उन्होंने भी लिख दिया ‘चांद सिफारिश करता जो हमारी’ चांद के चेहरे से तुलना करते हुए एक आशिक अपनी महबूबा को देखते हुए गाता है ‘ये चांद सा रोशन चेहरा जुल्फों का रंग सुनहरा’ अब आप खुद ही सोचो जिस चांद को खूबसूरती का मापदंड माना जाता हो उसकी तुलना यदि किसी और से की जाएगी तो उसके मन में ईष्र्या के भाव तो पैदा होंगे ही। इसलिए अपने को लगता है कि इस बार करवा चौथ में चांद ने उपवास रखने वाली महिलाओं को दर्शन न देकर अपनी सौतिया डाह का प्रदर्शन कर दिया । लेकिन चांद मियाँ इसमें इन बेचारी महिलाओं का दोष नहीं है तुम्हारी खूबसूरती की तुलना तो पति कर रहे थे उनको अड़ी पटकते तो कोई बात होती बेचारी महिलाओं को भूखी -प्यासी रखने का पाप तुम्हारे सर पर होगा ये समझ लेना।
सच की कीमत
कहते हैं कलयुग में सच नहीं होता बोलना चाहिए क्योंकि कलयुग झूठ का सम्राट माना जाता है। लेकिन कई लोग ऐसे भी हैं जो ये भूल गए कि हम कलयुग में जी रहे हैं और सच बोलने लगे। अब देखो ना पन्ना के जल संसाधन विभाग में एक कार्यपालन यंत्री हैं उन्होंने सच क्या बोला पूरे प्रदेश की अफसरशाही में हडक़ंप मच गया। उन्होंने सिर्फ  इतना कहा था कि ‘मैने नौकरी में कभी रिश्वत नहीं मांगी लेकिन कोई खुशी से दे दे तो मैं मना भी नहीं करता। उन्होंने ये भी कहा कि ये ठेकेदारों की सद्भावना और अच्छी पहल होती है’ बताओ इसमें क्या बुराई की बात है उस गरीब ने किसी से जबरदस्ती तो रिश्वत मांगी नहीं लेकिन अगर कोई प्रेम से उन्हें कुछ दे रहा तो उसको स्वीकार करना उनका परम कर्तव्य था। वैसे भी यह कहा जाता है कि अगर कोई प्रेम से कोई उपहार आपको दे रहा हो भले ही वह कितना सस्ता या मंहगा हो उसे पूरी शिद्दत के साथ स्वीकार कर लेना चाहिए। तो यहां तो फिर अच्छा खासा कमीशन उन महोदय को मिल रहा था और वे भी बिना किसी ना नुकुर के उसे स्वीकार भी करते रहे बस उनसे गलती इतनी हो गई कि उन्होंने अपने दिल की भावना सार्वजनिक कर दी। वरना हर डिपार्टमेंट में जहां भी ठेकेदार काम करते हैं वहां के हर अधिकारी के पास माल तो पहुंचता है बाकायदा परसेंटेज फिक्स रहता है और इस आधार पर बिल भी पास होते हैं। लेकिन इन कार्यपालन यंत्री जी को पता नहीं सच बोलने की क्या जरूरत पड़ गई इधर उन्होंने सच बोला और उधर डिपार्टमेंट ने उनको सस्पेंड कर दिया। डिपार्टमेंट का सोचना था कि यह गुप्त बातें उस कार्यपालन यंत्री ने आम कैसे कर दी। अपना तो सबसे यही कहना है की दुनिया में रहना है तो सच मत बोलना, पूरी दुनिया झूठ के दम पर चल रही है तो तुम काहे को सच बोलने का ठेका ले रहे झूठ बोलो खुश रहो मस्त रहो।
खाली पड़ा महल
लोग बाग अपने रहने के लिए बड़े -बड़े महल बड़े बड़े विला बना लेते हैं। लेकिन वे नहीं जानते कि भले ही सौ कमरों की कोठी हो या महल, रहना तो एक ही कमरे में है ऐसा तो है नहीं कि एक घंटा इस कमरे में रहोगे, दूसरे घंटे दूसरे में, तीसरे घंटे तीसरे में, इसके बाद हर घंटा भी यदि कमरा बदलोगे तो चौबीस घंटे में कुल जमा चौबीस कमरों का ही उपयोग कर पाओगे ।अब सऊदी अरब के प्रिंस ‘मोहम्मद बिन सलमान’ को ही देख लो अठ्ठाइस सौ करोड़ की हवेली उनके पास है, पांच हजार करोड़ की याट के वे मालिक है लेकिन जब से यमन के विद्रोहियों हुतीयों ने सऊदी अरब पर हमले शुरू किए हैं बेचारे प्रिंस अपना महल छोडक़र बंकर में पड़े हुए हैं। प्रिंस का महल खाली पड़ा है याट पानी में पड़ी पड़ी सड़ रही है लेकिन प्रिंस साहब की हिम्मत बंकर से बाहर निकलने की नहीं हो रही क्योंकि वहां जान का खतरा है। दार्शनिक लोग सच कहते हैं कि काहे  के लिए मरे जा रहे हो पैसा कमाने के लिए, बड़ा बंगला बनाने के लिए, गाड़ी घोड़ा खरीदने के  लिए, किसी भी दिन अलसेट हो जाएगी। सब धरा के धरा रह जाएगा लेकिन इन दार्शनिकों की बात  सुनता कौन है? जिसके पास हज़ार है वो लाख के चक्कर में है जिसके पास लाख हैं वो करोड़ के चक्कर में परेशान है बस इसी चक्कर में पूरी जिंदगी गुजर जाती है ना तो उसका उपयोग कर पाते हैं और ना ही उसका मजा उठा पाते हैं। अब भाई साहब को कब तक बंकर में रहना पड़ेगा ये कोई नहीं जानता क्योंकि हुती विद्रोहियों के मिजाज का कोई भरोसा तो है नहीं कब हमला कर दें ‘नोबडी नोज’ ।
सुपर हिट ऑफ  द वीक
‘कल रात चांद दिखाई नहीं दिया फिर आपने क्या किया’ श्रीमती जी की पड़ोसन ने उनसे पूछा
‘मैने तो अपने टकले पति की चांद देखकर अपना उपवास तोड़ दिया था’ श्रीमती जी ने उत्तर दिया।

 

एसआईआर के खिलाफ इंडिया ब्लॉक का मार्च

Jai Lok
Author: Jai Lok

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