
जबलपुर (जयलोक)
शिक्षा माफिया द्वारा बच्चों और उनके अभिभावकों को लूटने का इतना पुख्ता जाल बिछाया जाता था की कमीशन के खेल में शामिल होने की लालच में स्कूल वाले प्रकाशक और पुस्तक विके्रताओं की हर बात मान लेते थे। यहां तक की यह बात भी खुलकर सामने आई है कि कमीशन की रकम पहले तय होती थी और उसके आधार पर प्रकाशक अभिभावकों को लूटने के लिए एमआरपी तय करता था। इस खेल में पुस्तक विके्रता भी शामिल होते थे उनकी संयुक्त बैठक के आधार पर रेट निर्धारण का कार्य किए जाने की जानकारी भी पुलिस के समक्ष आई है जिसे जांच में शामिल किया गया है। पुलिस ने कुछ आरोपियों को लेकर जब रिमाइंड में पूछताछ की तो यह बात सामने आई कि कमीशन के इस खेल में सिर्फ पैसा और तोहफे ही शामिल नहीं थे बल्कि स्कूल के संचालकों और अन्य लोगों को प्रकाशकों ने उनकी किताबें लागू करने के एवज में विदेश यात्राएं तक कराई हैं। इस बात के पुख्ता प्रमाण जुटाने के प्रयास भी पुलिस जाँच के दौरान किए जाएंगे। विगत दिवस पुलिस की टीम ने क्राइस्ट चर्च स्कूल के अध्यक्ष और जबलपुर डायसिस के निलंबित बिशप को लेकर कार्यालय में जाकर जांच पड़ताल की। इस दौरान कार्यालय से बहुत सारे दस्तावेज जप्त किए गए जिसमें बड़ी संख्या में प्रकाशकों के विजिटिंग कार्ड भी शामिल है। कुछ कर्मचारियों ने यह बात भी पुलिस को बताई की प्रकाशक पूरे साल भर लगातार अपना आना-जाना बनाए रखते थे।
नर्सरी जैसी कक्षा में दर्जनों किताबें
बहुत ही आश्चर्य की बात है कि शिक्षा माफिया ने स्कूलों के साथ जो साठगाँठ की थी उसके अंतर्गत नर्सरी जैसी प्रारंभिक शिक्षा की कक्षाओं में भी दर्जनों किताबें बच्चों पर थोप दी जाती थी। इन किताबों को खरीदने के लिए अभिभावकों पर दबाव बनाया जाता था। उच्च गुणवत्ता की शिक्षा उपलब्ध कराने के नाम पर यह लूट का पूरा खेल संचालित होता था।
बैंक स्टेटमेंट संपत्तियों का निकाला जा रहा रिकॉर्ड
शिक्षा माफिया के खेल में प्रारंभिक जांच में आरोपियों के खिलाफ मजबूत सबूत एकत्रित करने के लिए पुलिस ने एक कदम और आगे बढ़ा दिया है। अब इस कमीशनखोरी के खेल में शामिल लोगों के बैंक स्टेटमेंट और उनकी संपत्तियां की जानकारी भी एकत्रित की जा रही है। पुलिस को उम्मीद है कि बैंक स्टेटमेंट की खोजबीन से पूर्व में पुस्तक विके्रताओं या प्रकाशकों द्वारा किए गए लेनदेन के ठोस सबूत सामने आ सकते हैं। नगद में हुआ लेनदेन भी इस पूरे घोटाले में बड़ा साक्ष्य बन सकता है।
प्रकाशकों से साठगाँठ करने वाले रुकते थे फाइव स्टार में
दिल्ली, मेरठ, मथुरा, मुंबई के प्रकाशकों ने नगर के स्कूल संचालकों और उनके प्राचार्य या प्रतिनिधियों को यह सुविधा भी उपलब्ध कराई थी कि जब वे इसे सौदेबाजी करने के लिए बड़े शहरों में जाते थे तो इन्हें आलीशान पाँच सितारा होटल में रुकवा दिया जाता था और उनकी हर प्रकार से खातिरदारी की जाती थी। इस पूरे कार्यक्रम में खर्च होने वाले पैसे को कमीशन खोरी के माध्यम से अभिभावकों से ही वसूल किया जाता था।

Author: Jai Lok






