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इमरजेंसी के 50 साल पूरे : प्रधानमंत्री मोदी ने कहा-कांग्रेस ने लोकतंत्र को कैद किया

मल्लिकार्जुन खडग़े ने कहा- वे अपना झूठ छिपाने का नाटक कर रहे हैं

नई दिल्ली। आज इमरजेंसी के 50 साल पूरे होने पर क्करू मोदी ने सोशल मीडिया एक्स लिखा, यह भारत के लोकतांत्रिक इतिहास के सबसे काले अध्यायों में से एक है। भारत के लोग इस दिन को संविधान हत्या दिवस के रूप में मनाते हैं। इस दिन, भारतीय संविधान के मूल्यों को दरकिनार कर दिया गया, मौलिक अधिकार छीन लिए गए, प्रेस की स्वतंत्रता को खत्म कर दिया गया। कई राजनीतिक नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, छात्रों और आम नागरिकों को जेल में डाल दिया गया। उधर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े ने कहा, आज महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, आर्थिक बदहाली का इनके पास जवाब नहीं है। काला धन लाने की बात थी, वो कहां है। ये लोग अपने झूठ को छिपाने के लिए आज नाटक रच रहे हैं और संविधान हत्या दिवस मना रहे हैं।

 

25 जून 1975 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने देश में आपातकाल की घोषणा की थी। यह 21 मार्च 1977 तक (21 महीने) तक लागू रहा था।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े ने कहा, जो लोग संविधान बचाओ की बात कर रहे हैं। जिसे 50 साल हो गए, उसे बार-बार दोहरा रहे हैं। लोग भूल चुके हैं लेकिन वे उस मुद्दे को उछालने की कोशिश कर रहे हैं। जिनका देश की आजादी के आंदोलन में कोई योगदान नहीं, जिनका संविधान निर्माण में कोई योगदान नहीं रहा। वे हमेशा संविधान के खिलाफ बात करते हैं।

 

अंबेडकर, नेहरू ने जो संविधान तैयार किया उस संविधान को भी उन्होंने रामलीला मैदान में जलाया। उन्होंने अंबेडकर, नेहरू गांधी की फोटो जलाई थी। उनका कहना था कि जो संविधान बना है उसमें हमारा पारंपरिक संस्कृति है उसके अंश इसमें नहीं है। चाहे वो मनुस्मृति के तत्व हों, वे इसमें नहीं थे इसलिए वे संविधान को नहीं मानते।

 

 

आपातकाल के खिलाफ लड़ाई करने वालों को सलाम-प्रधानमंत्री
इससे पहले आज बुधवार सुबह पीएम मोदी ने इमरजेंसी को लेकर सोशल मीडिया पर लिखा था कि हम आपातकाल के खिलाफ लड़ाई में डटे रहने वाले हर व्यक्ति को सलाम करते हैं। ये पूरे भारत से, हर क्षेत्र से, अलग-अलग विचारधाराओं से आए लोग थे, जिन्होंने एक ही उद्देश्य से एक-दूसरे के साथ मिलकर काम किया। भारत के लोकतांत्रिक ढांचे की रक्षा करना और उन आदर्शों को बनाए रखना, जिनके लिए हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने अपना जीवन समर्पित कर दिया। यह उनका सामूहिक संघर्ष ही था, जिसने सुनिश्चित किया कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार को लोकतंत्र बहाल करना पड़ा और नए चुनाव कराने पड़े, जिसमें वे बुरी तरह हार गए।

इमरजेंसी के वक्त मैं आरएसएस का युवा प्रचारक था
पीएम ने अपनी पोस्ट में ‘द इमरजेंसी डायरीज’ नाम की बुक का भी जिक्र किया। पीएम ने लिखा, जब आपातकाल लगाया गया था, तब मैं आरएसएस का युवा प्रचारक था। आपातकाल विरोधी आंदोलन मेरे लिए सीखने का एक अनुभव था। इसने हमारे लोकतांत्रिक ढांचे को बचाए रखने की अहमियत को दिखाया। साथ ही, मुझे राजनीतिक स्पेक्ट्रम के सभी लोगों से बहुत कुछ सीखने को मिला। मुझे खुशी है कि ब्लूक्राफ्ट डिजिटल फाउंडेशन ने उन अनुभवों में से कुछ को एक किताब के रूप में संकलित किया है, जिसकी प्रस्तावना एचडी देवेगौड़ा ने लिखी है, जो खुद आपातकाल विरोधी आंदोलन के एक दिग्गज थे।

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Jai Lok
Author: Jai Lok

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