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भारतीय संस्कृति को जब -जब खतरा होता है कोई न कोई अवतार जरूर लेता है – शंकराचार्य सदानंद जी सरस्वती

नरसिंहपुर (जयलोक)। द्वारका-शारदापीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी सदानंद जी सरस्वतीने अपने प्रवचन में कहा कि हमारी भारतीय संस्कृति में जब-जब कोई ख़तरा आता है कोई न कोई इसकी रक्षा के लिये अवतार जरूर लेते हैं । नाना पुराण निगमागम सम्मतं यद् सभी पुराणों का सार श्रीरामचरित मानस में लिख दिया है श्रीराम के चरित्र का गुणगान इस ग्रन्थ में किया गया है । मनुष्य का भ्रम ही दुख का कारण बनता है सत्य को जानकर संसय में पड़ जाते हैं एक-एक चौपाई गूढार्थ लेके है ।

चरन राम तीरथ चलि जाहीं ।
राम बसहु तिन्ह के मन माहीं ।।

पैरों की सार्थकता तभी जब आप मंदिर तीर्थ में गुरु दर्शन के लिए जाएं शोक मोह से मुक्त हो जायें ।
प्रत्यंचा धनुष पर चढ़ाई धनुष टूटा निमंत्रण भेजा अवध में कि आप बारात लेकर आयें, हम मिथिला से राजा जनक जी के द्वारा भेजे गए हैं श्री राम ने शिव धनुष तोड़ा है और सीता से विवाह होना है । बारात की तैयारी हुई सभी मिथिला आए दोनों का कुल सहित परिचय हुआ । विवाह की पूरी विधि कराई गई विवाह का वर्णन इसलिए है कि आने वाली पीढ़ी उसे शिक्षा पाये ।विजय मुहूर्त में विवाह किया गया राजा जनक दूल्हा श्रीराम के चरण धोकर सिर पर धारण किए, यही हमारे देश की संस्कृति है।

जन्मदिन पर पुत्र माता-पिता के चरण धोकर चरणामृत लेता है । कुमारी पूजन, सौभाग्यवती पूजन हमारे देश में होती है, विदेश में नहीं वह तो हम सभी लोग देख रहे हैं । हिंदुस्तान में दूल्हे को विष्णु रूप में मानते हैं । समूह के विवाह में विधि नहीं हो पाती, एक गोत्र में विवाह नहीं करना चाहिए । हमारी संस्कृति में बहू को लक्ष्मीस्वरूपिणी माना गया है । हम धर्म का पालन पति-पत्नी मिलकर करते हैं अग्नि को साक्षी बनाकर नाते रिश्तेदारों के मध्य होता है ।

धर्म की शपथ खाकर इस पत्नी को लायें हैं पत्नी को चाहिए कि उसका पति यदि कुसंग में पडक़र नशा करने लगे तो उसे त्यागने के लिए बाध्य करें। संकल्प के साथ लडक़ा-लडक़ी का हाथ मिलाया जाता है । यह है भारतीय संस्कृति चारों भाइयों का विवाह सीता, मांडवी, उर्मिला और श्रुतकीर्ति से हुआ। चारों भाइयों का विवाह पूर्ण विधि विधान के साथ हुआ गुरु की आज्ञा से चारों भाइयों ने पाणिग्रहण किया, सनातन धर्म आचार्य विचार को प्रधान मानता है । दिखावा आडंबर से कल्याण नहीं होगा ।

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Jai Lok
Author: Jai Lok

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