
जबलपुर (जय लोक)। अपनी लंबित माँगों को लेकर पटवारी आज से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। हड़ताल के कारण राजस्व विभाग की 12 से अधिक ऑनलाइन सेवाओं के साथ-साथ कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक कार्य प्रभावित होने की आशंका है। पटवारी संघ लंबे समय से लंबित मांगों के निराकरण की मांग कर रहा है, लेकिन अब तक सरकार की ओर से कोई ठोस निर्णय नहीं होने पर आंदोलन का रास्ता अपनाया गया है।
पटवारियों का कहना है कि उनकी विभिन्न लंबित मांगों पर सरकार से कई बार चर्चा की गई, लेकिन अब तक कोई संतोषजनक निर्णय नहीं लिया गया। इसी के विरोध में आज मंगलवार से प्रदेशभर के पटवारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। हड़ताल का सीधा असर आम जनता पर पडऩे की संभावना है, क्योंकि भूमि अभिलेखों और राजस्व संबंधी अधिकांश सेवाएं पटवारियों के माध्यम से संचालित होती हैं। ऐसे में नामांतरण, सीमांकन और अन्य जरूरी कार्यों के लिए लोगों को इंतजार करना पड़ सकता है।

धरने पर बैठे पटवारी
जिलेभर के पटवारी मैदानी कार्यों का पूरी तरह बहिष्कार कर कलेक्ट्रेट परिसर में धरने पर बैठ गए हैं। इस आंदोलन में जबलपुर, रांझी, पाटन, सिहोरा, पनागर, कुंडम, शहपुरा और मझौली समेत जिले की सभी तहसीलों के पटवारी शामिल हुए हैं। लंबे समय तक संवाद और शांतिपूर्ण प्रयास करने के बावजूद शासन स्तर से कोई ठोस निर्णय न आने के कारण संवर्ग में गहरा असंतोष है। कैडर रिव्यू लागू करने, पदोन्नति, समयमान वेतनमान और विभागीय परीक्षा जैसी प्रमुख मांगों को लेकर यह बड़ा कदम उठाया गया है। जिले के सभी शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के पटवारी सुबह से ही कलेक्ट्रेट परिसर में एकत्रित हो गए और शांतिपूर्ण प्रदर्शन शुरू कर दिया।

5 सौ पटवारी धरने पर बैठे
जिले में पाँच सौ पटवारी इस हड़ताल में शामिल हुए हैं जो कलेक्टर परिसर पहुँचकर धरने पर बैठ गए।
पटवारियों का कहना है कि जब तक उनकी माँगों पर ध्यान नहीं दिया जाता तब तक अनिश्चित कालीन हड़ताल जारी रहेगी।


ये कार्य हो रहे प्रभावित
हड़ताल से आम नागरिकों को नामांतरण, सीमांकन, बंटवारा, खसरा-खतौनी की नकल, गिरदावरी, अतिक्रमण संबंधी कार्रवाई तथा कब्जा दिलाने जैसी राजस्व सेवाओं के लिए परेशानी का सामना करना पड़ेगा। इसके अलावा कानून-व्यवस्था से जुड़े राजस्व दायित्व, फील्ड निरीक्षण और कार्यालयीन कार्य भी पूरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। किसानों का फसल गिरदावरी, भूमि का नामांतरण, सीमांकन और आपसी बंटवारे, जाति, आय और मूल निवासी प्रमाण-पत्र के लिए आवश्यक पटवारी प्रतिवेदन समय पर न मिलने से आम नागरिकों और छात्रों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
Author: Jai Lok





