
नई दिल्ली। किर्गिस्तान में एससीओ समिट में चीन के बीआरआई प्रोजेक्ट पर भारत ने अपने पुराने रुख पर रहते हुए इसका समर्थन नहीं किया है। साल 2018 में पूर्ण सदस्य बनने के बाद से हर समिट की तरह बिश्केक में भी भारत ने चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव का समर्थन करने वाले पैराग्राफ से दूरी बनाई। भारत को इस प्रोजेक्ट पर कई एतराज हैं क्योंकि यह कश्मीर के उन इलाकों से गुजरता हैं, जो भारत का हिस्सा हैं लेकिन उन पर पाकिस्तान का कब्जा है। बेलारूस, ईरान, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, पाकिस्तान, रूस, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान ने बीआरआई और यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन के साथ इसके तालमेल के लिए अपना समर्थन दोहराया। नई दिल्ली ने लगातार बीआरआई का समर्थन करने से इनकार कर दिया। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक एससीओ के आर्थिक एजेंडे में एक जटिलता देखी गई है। साल 2023 के समिट में नई दिल्ली ने एससीओ इकोनॉमिक डेवलपमेंट स्ट्रैटेजी 2030 से दूरी बनाई थी। इस बार भी घोषणापत्र में कहा गया है कि सदस्य देश 2030 तक की अवधि के लिए एससीओ इकोनॉमिक डेवलपमेंट स्ट्रैटेजी को लागू करना जारी रखेंगे। इसमें कोई स्पष्ट शर्त नहीं जोड़ी गई है।
एससीओ समिट में अपने भाषण में पीएम मोदी इस बात पर जोर दिया कि कनेक्टिविटी को संप्रभुता का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसी कनेक्टिविटी जो संप्रभुता को नजरअंदाज करती है, वह आखिरकार भरोसा और महत्व दोनों देती है। पीएम मोदी ने अपने भाषण में सदस्य देशों से आतंकवाद के सभी रूपों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाने की अपील की। एससीओ ने ईरान पर सैन्य हमलों की निंदा की और भारत समेत सभी दस सदस्य देशों के समर्थन किए गए एक घोषणापत्र में संघर्ष के राजनीतिक और डिप्लोमैटिक समाधान का समर्थन किया। हालांकि पिछले साल की तरह इस बार भी इजराइल और अमेरिका का नाम नहीं लिया गया। बिश्केक घोषणापत्र कहता है कि सदस्य देश ईरान के इलाके पर मिलिट्री हमलों की निंदा करने वाली एससीओ की पहले बताई गई स्थिति को दोहराते हैं।
इससे आम नागरिक हताहत हुए और काफी आर्थिक नुकसान हुआ। इस तरह की कार्रवाइयों ने अंतर्राष्ट्रीय कानून और यूएन चार्टर के सिद्धांतों और नियमों का उल्लंघन किया है। चीन की महत्वाकांक्षी बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) एक आधारभूत ढांचा विकास और संपर्क परियोजना है। इसका लक्ष्य चीन को सडक़, रेल और जलमार्ग से यूरोप, अफ्रीका और एशिया से जोडऩा है। चीन की इस परियोजना का भारत ने लगातार विरोध किया है। दरअसल बीआरआई के तहत बीजिंग सीपीईसी पर काम कर रहा है। यह गलियारा पीओके से होकर गुजरता है। ऐसे में इस पर भारत का कड़ा एतराज रहा है।
Author: Jai Lok





