
जो सिस्टम से बाहर जाएगा वह, हर हाल में नजरों में आएगा
परितोष वर्मा।
जबलपुर (जयलोक)। पुलिस विभाग में सामान्य तौर पर महिला अधिकारियों का सीधे तौर पर भ्रष्टाचार के मामलों में शामिल हो जाना कम ही मिलता है। लेकिन जबलपुर संभाग के दो महत्वपूर्ण जिलों में पदस्थ नगर पुलिस अधीक्षक के पद पर दो महिला पुलिस अधिकारियों के द्वारा बड़े स्तर पर किया गया भ्रष्टाचार या यह कहें की लूट का प्रयास अब पूरे देश में चर्चा विषय बन गया है।
जबलपुर पुलिस संभाग के ही सिवनी और कटनी जिले में पदस्थ दो महिला अधिकारी लाखों रुपए के भ्रष्टाचार के मामले में सीधे संलिप्त पाई गईं हैं।
आरोप लगे-हल्ला मचा-जाँच हुई तो सिवनी में पदस्थ नगर पुलिस अधीक्षक सीएसपी के पद पर तैनात पूजा पांडे निलंबित हुईं और उनको जेल की लंबी यात्रा करनी पड़ी। बड़ी मुश्किल से परिवार और छोटे बच्चों की दुहाई देने के कारण वह जमानत का लाभ ले पाईं। उन पर आरोप था कि उन्होंने व्यापारियों के बीच नगद लेनदेन की हवाला की रकम को लूटने का काम किया। जिन व्यापारियों की राशि थी बाद में उनकी शिकायत पर मामले ने तूल पकड़ लिया और परत दर परत मामला खुलता गया। इसमें एक और सीएसपी का नाम आया जिसके मुखबिर तंत्र के माध्यम से हवाला के पैसे की जानकारी दिए जाने के आरोप लगे। पुलिस जांच में दूसरे सीएसपी पंकज मिश्रा को भी आरोपी बनाया गया जिनकी बाद में भी गिरफ्तारी हुई।
महिला पुलिस अधिकारी पूजा पांडे की भ्रष्टाचार में लिप्त होने की कहानी पूरे देश में चर्चित बनी हुई थी, लोग इसको भूल भी नहीं पाए थे कि इसी बीच जबलपुर संभाग के एक अन्य जिले कटनी में एयर होस्टेस रह चुकीं नेहा पच्चीसिया नामक महिला अधिकारी नगर पुलिस अधीक्षक के पद पर कटनी में पदस्थ नेहा पच्चीसा भ्रष्टाचार के मामले में चर्चा में आ गयीं।

कटनी जिले के कुठला थाना में 19 अगस्त को दर्ज अपराध क्रमांक 738/2026 ने पूरे प्रदेश में सुर्खियां बटोरीं। शिकायतकर्ता आकाश लोधी ने आरोप लगाया कि करीब 1.07 करोड़ रुपये मूल्य की पैतृक जमीन की रजिस्ट्री तत्कालीन सीएसपी नेहा पच्चीसिया और अन्य आरोपियों ने दबाव बनाकर कराई। आरोप है कि जमीन के बदले केवल 15 लाख रुपये का चेक दिया गया, जबकि बाद में रजिस्ट्री निरस्त कर जमीन मारूफ अहमद हनीफ के नाम दर्ज करा दी गई। शिकायत में यह भी कहा गया कि जहां जमीन का गाइडलाइन मूल्य 82.46 लाख रुपये था, वहीं दस्तावेजों में इसकी कीमत महज 18.20 लाख रुपये दर्शाई गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच की कमान पहले कटनी एएसपी कमल मौर्य ने संभाली। बाद में जांच जबलपुर एएसपी अनु बेनीवाल को सौंपी गई और इसके बाद कटनी जिले में एफआईआर दर्ज की गई। मामले की जांच के लिए आठ सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किया गया, जिसकी जिम्मेदारी एएसपी अंजना तिवारी को सौंपी गई।
अब फिर मामला दर्ज होने के बाद निलंबित नेहा पच्चीसिया लगातार पुलिस की आंख में धूल झोंक फरार है।10000 रुपए की इनामी निलंबित सीएसपी का लुक आउट नोटिस भी जारी किया गया है ताकि वह विदेश ना भाग पाए।
दूसरे मामले में 8और 9अक्टूबर26 की दरमियानी रात सिवनी में नेशनल हाईवे पर चेकिंग के दौरान एक कार से बड़ी धनराशि मिली थी, जिसके बारे में चालक कुछ भी स्पष्ट नहीं बता सका था। इसके बाद पुलिस कर्मियों ने रुपया हड़प लिया। मामला जब उच्चाधिकारियों तक पहुंचा तो वाहन की जांच करने वाले संबंधित पुलिस अधिकारियों तत्कालीन एसडीओपी पूजा पांडे, एसआइ अर्पित भैरम व कुछ अन्य पुलिस कर्मियों ने मामले में समझौता करने का प्रयास किया और हवाला आपरेटर सोहन परमार को एक करोड़ 51 लाख 50 हजार रुपये लौटाए थे। पूरी रकम न मिलने पर सोहन ने इसकी शिकायत दर्ज करा दी। इसके बाद एसआइटी को जांच सौंपी गई। एसआइटी ने नागपुर के दो युवकों से 1.25 करोड़ रुपये बरामद किए थे। अब तक 2.70 करोड़ रुपये बरामद हो चुके हैं। यह हाई प्रोफाइल मामला भी पूरे देश में चचाज़् का विषय बना।

एसआईटी के अनुसार इस मामले में कुछ और पुलिस अधिकारियों के नाम सामने आने पर हाक फोर्स बालाघाट में पदस्थ डीएसपी (एसडीओपी) पंकज मिश्रा, जबलपुर क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर प्रमोद सोनी के अलावा कटनी निवासी पंजू गिरी गोस्वामी और जबपुर के वीरेंद्र दीक्षित को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया। इन्हें षड्यंत्र रचने में शामिल पाया गया है। कोर्ट में इन चारों से विस्तृत पूछताछ के लिए पुलिस को दो दिनों की रिमांड दी। इस प्रकरण में अब आरोपितों की संख्या दो डीएसपी समेत 15 हो गई है।
इन दोनों मामलों में प्रमुख रूप से जो बात सर्वाधिक चर्चा में बनी हुई है वह यह है कि दोनों ही बड़े भ्रष्टाचार के मामलों में बड़े पद पर बैठी महिला अधिकारियों की सीधी संलिप्तत्ता पाए जाने पर इस बात पर बहस छिड़ गई कि अब महिला अधिकारी भी भ्रष्टाचार के रोग से अछूती नहीं रह गई हैं। महिलाओं अधिकारियों में पहले भ्रष्टाचार को लेकर ऐसी बेबाकी और सीधे फ्रंट में आकर प्रकरणों का निपटारा करने के लिए मोर्चा संभालने के मामले कम ही देखने को मिले हैं। यह तर्क भी काफी पुराना है कि जिसे नौकरी में बने रहना है सिस्टम का हिस्सा बनकर चलना पड़ेगा। जैसे नीचे से लेकर ऊपर तक लेनदेन की प्रक्रिया की चर्चा रह-रह कर ताजी हो जाती है। इसी प्रकार चर्चा इस बात की भी हो रही है कि जो सिस्टम से बाहर जाएगा वह हर हाल में नजरों में आएगा। दोनों महिला अधिकारियों के भ्रष्टाचार के मामले में आरोपी बनने के बाद पुलिस ट्रेनिंग, सामाजिक प्रतिस्पर्धा, पैसे की भूख, कलंक लगने का खत्म होता डर सभी विषय और इन पर आत्म मंथन की चर्चा जारी है।


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Author: Jai Lok





