
खत्म होने आ रहा साल, नियुक्ति के इंतजार में युवा भाजपाई बेचैन
जबलपुर (जय लोक)। भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा के नगर अध्यक्ष का पद लगता है विगत मटकी फोड़ प्रतियोगिता के राजनीतिक प्रदर्शन के कारण कन्हैया की मटकी में ही अटका ना रह जाए। भारतीय जनता युवा मोर्चा के नगर अध्यक्ष पद के लिए तीन चार नाम ही प्रबल रूप से सक्रियता के साथ चर्चाओं में बने हुए थे, लेकिन समय निकलने के साथ साथ अब दावेदारों की संख्या में भी इजाफा हो रहा है। इनमें से हर नाम की अपनी अपनी दावेदारी की कहानी और पृष्ठभूमि है। कोई अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में सक्रियता के आधार पर इस पद के लिए अपनी दावेदारी प्रस्तुत कर रहा है। तो कोई किसी वर्ग विशेष में लगातार सक्रिय होने के कारण अपनी दावेदारी पेश कर रहा है। कुछ धनबल के आधार पर भी अपनी योग्यता का पैमाना निर्धारित करने के प्रयासों में नजर आ रहे हैं।
एक समीकरण यह भी नजर आ रहा है कि जिस प्रकार से घोषणा में देरी हो रही है उसी अनुपात पर लगातार दावेदारों की संख्या बढ़ती जा रही है। विद्यार्थी परिषद से जुड़े हुए कई नाम अचानक सामने आने के बाद परिषद के वरिष्ठ लोगों के बीच में यह बड़ी असमंजस की स्थिति निर्मित हो गई है कि आखिर में किसके नाम को आगे बढ़ाएं।
पहले जहां 4-5 नाम को सर्वाधिक चर्चा में पाया जा रहा था वहीं अब इनकी संख्या बढक़र 8-9 हो चुकी है। अंतिम निर्णय भोपाल के पायदान से होना है। संगठन अपनी तरफ से जनप्रतिनिधियों से लिफाफे में नाम लेने की प्रक्रिया और औपचारिकता को जरूर निभाएगा। लेकिन ऊंट किस करवट बैठेगा इसका अनुमान तो लिफाफा पैक करने वाले नहीं लगा पा रहे हैं और ना ही लिफाफे के अंदर नाम लिखने वालों को पुख्ता एहसास हो रहा है। यहां तक की दावेदारों के बीच में भी भ्रम की इतनी विकट स्थिति निर्मित है कि वह भी समझ नहीं पा रहे हैं कि किस दिशा में क्या कदम बढ़ाएं। किस नेता को एप्रोच करें और कहां दूरी बनाकर रखें। किसकी नजरों में आने से नंबर बढ़ जायेंगे और किसकी नजरों में गड़ जाने से नंबर घट जाएगा। इन सब दुविधा की स्थिति के बीच में सभी युवा मोर्चा के कार्यकत्र्ता बेसब्री से नगर अध्यक्ष पद की घोषणा का इंतजार कर रहे हैं।
त्यौहारों के बाद ही संभव लग रही है घोषणा
पहले युवा मोर्चे के अध्यक्ष के नाम की 15 सितंबर से पहले घोषणा हो जाने की उम्मीद की जा रही थी। कुछ स्तर पर ऐसे संकेत भी प्राप्त हुए थे। लेकिन अब एक बार फिर मामला खटाई में पड़ता नजर आ रहा है। उसकी वजह यह है कि 17 सितंबर से एक माह तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्म दिवस के अवसर पर सेवा संकल्प अभियान प्रारंभ हो रहा है। नीचे से लेकर ऊपर तक हर अधिकारी – पदाधिकारी संगठन की दी हुई जिम्मेदारियां के निर्वहन में लग जाएंगे। युवाओं को भी उनके क्षेत्र का कार्य सौंप दिया जाएगा। उसके बाद लगातार सनातन धर्म के प्रमुख त्यौहार प्रारंभ हो जाएंगे। ऐसी स्थिति में इस बात की संभावना कम ही नजर आ रही है कि युवा मोर्चा के अध्यक्ष पद की घोषणा इस बीच हो पाए। दूसरी और शहर के विभिन्न हिस्सों में हुए मटकी फोड़ के आयोजन का राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन भी युवाओं और संगठन के बीच में चर्चा का विषय रहा है। जो सामान्य वर्ग का दावेदार है जिसमें संगठन संचालन की काबिलियत अधिक है लेकिन वह इन सब तामझाम से वंचित है उसकी दावेदारी को कम आंकने का सवाल उठ खड़ा हुआ है। अध्यक्ष के पद पर किसी एक नाम का चयन आसान नहीं है। हर बार की तरह इस बार भी यह कठिन परीक्षा की घड़ी रहेगी।






