Download Our App

Home » Uncategorized » कुलगुरु की नियुक्ति पर फिर उठे गंभीर सवाल

कुलगुरु की नियुक्ति पर फिर उठे गंभीर सवाल

प्रो. राजेश वर्मा के प्रोफाइल पर संदेह खड़े हुए, पीएससी और सीए चयन के बावजूद निजी कॉलेज में कार्यरत रहने के आरोप

जबलपुर (जय लोक)। रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. राजेश वर्मा की नियुक्ति को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। कुलगुरु चयन प्रक्रिया में प्रस्तुत किए गए उनके प्रोफाइल से जुड़े कुछ पुराने विवरण अब सवालों के घेरे में हैं। छात्र संगठनों ने इन तथ्यों की स्वतंत्र और न्यायिक जाँच की माँग उठाई है।
सूत्रों एवं उपलब्ध प्रोफाइल संबंधी जानकारी के अनुसार प्रो. राजेश वर्मा का वर्ष 1990-91 में पीएससी के माध्यम से कॉमर्स विषय में चयनित होने का उल्लेख है, लेकिन इसके बावजूद उसी अवधि में इंदौर के एक निजी महाविद्यालय में कार्यरत रहने की बात सामने आ रही है। इसी प्रकार वर्ष 1994 में सीए के रूप में चयनित होने संबंधी जानकारी भी प्रोफाइल में दर्ज होने की बात कही जा रही है, जबकि इसके बावजूद निजी महाविद्यालय में कार्यरत रहने का विवरण सामने आने से पूरे मामले पर गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल-चयन हुआ तो  सेवा कहां और किस पद पर?
छात्र संगठनों का सवाल यह है कि यदि संबंधित वर्षों में वास्तव में पीएससी अथवा अन्य चयन प्रक्रिया के माध्यम से प्रो. राजेश वर्मा का चयन हुआ था, तो उसके बाद की नियुक्ति, पदस्थापना, कार्यभार ग्रहण, सेवा अवधि और निजी संस्था में कार्यरत रहने से संबंधित अभिलेख क्या कहते हैं?
प्रोफाइल की जाँच के बिना         नियुक्ति पर उठ रहे सवाल
यह सवाल उठाया जा रहा है कि क्या संबंधित चयन के बाद प्रो. राजेश वर्मा की नियुक्ति हुई थी यदि नियुक्ति नहीं हुई तो उसका कारण क्या था और यदि निजी महाविद्यालय में सेवा जारी रही तो उसकी वैधानिक स्थिति क्या थी। इस बात की जाँच की माँग भी की जा रही है। छात्र संगठनों का कहना है कि कुलगुरु जैसे महत्वपूर्ण पद के लिए प्रस्तुत प्रोफाइल में दर्ज प्रत्येक तथ्य का सत्यापन होना आवश्यक है। यदि प्रोफाइल में कोई तथ्य गलत, भ्रामक या अपूर्ण पाया जाता है, तो यह केवल व्यक्तिगत सेवा विवरण का मामला नहीं रह जाता, बल्कि विश्वविद्यालय के कुलगुरु चयन की पारदर्शिता और वैधता से जुड़ा गंभीर विषय बन जाता है।
न्यायिक जाँच से ही सामने आएगा सच
छात्र संगठनों ने मांग की है कि प्रो. राजेश वर्मा द्वारा चयन के समय प्रस्तुत किए गए मूल प्रोफाइल, पीएससी से संबंधित अभिलेख, सीए संबंधी दस्तावेज, निजी महाविद्यालय के सेवा रिकॉर्ड तथा संबंधित नियुक्ति/पदस्थापना अभिलेखों की स्वतंत्र जाँच कराई जाए। छात्र संगठनों का कहना है कि दस्तावेजों की जाँच से ही स्पष्ट हो सकेगा कि प्रोफाइल में दर्ज जानकारी वास्तविक है अथवा नहीं। इसलिए पूरे मामले की उच्चस्तरीय अथवा न्यायिक जाँच कराकर तथ्यों को सार्वजनिक किया जाना चाहिए। छात्र संगठनों ने स्पष्ट किया है कि कुलगुरु की नियुक्ति से जुड़े प्रत्येक संदिग्ध तथ्य की निष्पक्ष जांच होने तक इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया जाता रहेगा।

पेट में अंदर नशीला पदार्थ छिपाकर लाया भारत, एयरपोर्ट पर पकड़ाया

 

Jai Lok
Author: Jai Lok

RELATED LATEST NEWS

Home » Uncategorized » कुलगुरु की नियुक्ति पर फिर उठे गंभीर सवाल
error: Content is protected !!