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कुलपति और कुलसचिव साबित हुए बौने

विश्वविद्यालय में चपरासी और चौकीदार का आतंक
चौकीदार से जान बचाने कुलसचिव को पड़े लाले
कुलसचिव से जुड़ी सोशल मीडिया पोस्ट पर चपरासी को नोटिस

 

जबलपुर (जयलोक)। रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय इन दिनों चरम अराजकता का शिकार है। इस अराजकता का आलम यह है कि विवि में चौकीदार और चपरासी का आतंक बना हुआ है। इस आतंक से कुलपति और कुलसचिव भी नहीं बच पा रहा है। हालात यह है कि विवि के दोनों वरिष्ठ अधिकारी चपरासी और चौकदार के सामने बौने साबित हो रहे हैं। इस विवि के हालात ऐसे हैं कि यहां के चपरासी ऐसा रुतबा है कि उसके पास तीन विभागों का प्रभार भी है। टकराव इस सीमा तक बढ़ गया है कि कुलसचिव को चौकीदार से जान बचाने के लिए सुरक्षा की गुहार लगानी पड़ रही है। वहीं कुलसचिव एक चपरासी से टकरा गए हैं और उसे कारण बताओ नोटिस भी जारी कर दिया है।
रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय से जुड़े एक कर्मचारी के संबंध में हालिया घटनाक्रम ने विश्वविद्यालय के प्रशासनिक गलियारों में चर्चा को तेज कर दिया है। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा हिंदी विभाग में पदस्थ भृत्य राजेंद्र शुक्ल को सोशल मीडिया पर कुलसचिव से संबंधित समाचार सामग्री/पोस्ट प्रसारित किए जाने के मामले में कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। नोटिस में इस प्रकार की गतिविधि को प्रशासनिक व्यवस्था के संदर्भ में गंभीरता से लिया गया है तथा संबंधित कर्मचारी से निर्धारित अवधि में लिखित स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने को कहा गया है।
प्राप्त पत्र के अनुसार भृत्य राजेंद्र शुक्ल द्वारा एक व्हाट्सऐप समूह में कुलसचिव से संबंधित समाचार-पत्रों की कतरनें साझा किए जाने का उल्लेख करते हुए उनसे पूछा गया है कि इन समाचारों को समूह में प्रसारित करने के पीछे उनका उद्देश्य क्या था। पत्र में यह भी सवाल उठाया गया है कि यदि संबंधित समाचार की वास्तविकता से कुलसचिव स्वयं अनभिज्ञ थे, तो उसे समूह में प्रसारित करने की आवश्यकता क्यों महसूस हुई।
तीन तीन पदस्थापना को लेकर भी उठ रहे सवाल
विश्वविद्यालय में हिंदी विभाग में भृत्य राजेंद्र शुक्ल की वर्तमान में अतिरिक्त पदस्थापना को लेकर भी कर्मचारियों के बीच सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि अपात्र एवं कनिष्ठ होते हुए भी कुलगुरु की कृपा से उन्हें सुरक्षा विभाग में टाइम कीपर के रूप में दायित्व दिया गया है। इस संबंध में वरिष्ठ कर्मचारियों के एक वर्ग में असंतोष होने की बात सामने आ रही है। इतना ही नहीं इन्हें मूल हिंदी विभाग के साथ साथ स्थापना में भी संलग्न किया गया है जिससे वह अपने मूल विभाग की फाइलों को लाने ले जाने के स्थान पर स्थापना विभाग की फाइलों में अनावश्यक हस्तक्षेप करते नजर आते हैं।
पहले भी विवादों में रहा है इस भृत्य का नाम
विवादों से इस भृत्य का पुराना नाता रहा है गत वर्ष भी आंदोलन के दौरान ये भृत्य विश्वविद्यालय परिसर में अर्धनग्न अवस्था में प्रदर्शन करते हुए पाए गए थे। सोशल मीडिया में इनकी फोटो वायरल होने पर छात्र छात्राओं की शिकायत को संज्ञान में लेते हुए उपलब्ध पत्राचार के अनुसार राज्यपाल ने कुलगुरु को इनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही के निर्देश दिये थे। जिसपर विश्वविद्यालय प्रशासन ने कार्यवाही भी चालू की थी। लेकिन कुलगुरु के विशेष कृपा पात्र बनते ही इस कार्रवाई को ठंडा बस्ती में डाल दिया गया। उल्लेखनीय है कि विश्वविद्यालय कायज़्परिषद द्वारा भी उक्त भृत्य के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही की अनुशंसा की गई थी ।
कुलगुरू कर कृपा पात्र है चपरासी
कुलगुरु राजेश वर्मा के कार्यकाल में एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को तीन विभागों का प्रभार दिए जाने को लेकर विश्वविद्यालय में सवाल उठ रहे हैं। तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी का नियोक्ता एवं प्रशासनिक प्रमुख कुलसचिव होता है। लेकिन आजकल कुलसचिव को दरकिनार कर कुलगुरु द्वारा सीधे स्थापना शाखा को स्थानांतरण और पदस्थापना के निर्देश दिए जा रहे हैं और बिना कुलसचिव के अनुमोदन के इस तरह के आदेश जारी होने से स्थापना शाखा के अधिकारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में आ जाती है।
इस भृत्य पर यह भी आरोप है कि संबंधित कर्मचारी अपने मूल पद के दायित्वों का निर्वहन करने के बजाय लंबे समय तक कुलगुरु के कार्यालय और बंगले में मौजूद रहता है तथा उनके साथ बैठकों में शामिल होता दिखाई देता है।

 

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Jai Lok
Author: Jai Lok

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