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‘गांधीवादी’ ही तो है देश का हर सरकारी डिपार्टमेंट

(जय लोक)। देश के केंद्रीय मंत्री ‘नितिन गडकरी’ कई बार बड़ी ही मजेदार बात करते हैं। हाल ही में मध्य प्रदेश में सुगम बस सेवा के  उद्घाटन समारोह में  उन्होंने मध्यप्रदेश के परिवहन मंत्री की तरफ इशारा करते हुए कहा कि आपके प्रदेश के बहुत से आरटीओ ‘गांधीवादी’ हैं। यानी गांधी के चित्र वाले नोट देखने के बाद ही काम करते हैं, उन्होंने परिवहन मंत्री से कहा कि आप पता लगाओ कि आपके विभाग में कितना भ्रष्टाचार है, अब गडकरी जी को कौन बताएं कि देश में तमाम सरकारी विभाग के अफसर गांधीवादी हैं। अकेले आरटीओ को ही क्यों निशाना बनाया जाए, आपके डिपार्टमेंट के लोग भी तो गांधीवादी हैं तभी तो सडक़े बनती है एक्सप्रेस वे बनते हैं और उधड़ जाते हैं। अब वह क्यों उधड़े इसके पीछे क्या है ये तो आपको मालूम होगा ही अफसरों को गांधी जी वाले नोट दिखा दिए जाते हैं और वे क्वालिटी के प्रति आंख बंद कर लेते हैं उनको भी मालूम है कि होना जाना किसी का कुछ नहीं है। अगर जांच पड़ताल होगी तो जांच पड़ताल करने वाले को भी गांधी जी की फोटो वाले नोट दिखा दिया जाएंगे और जांच टीम भी चुपचाप वापस चली जायेगी। आप ही बतला दो कि ऐसा कौन सा डिपार्टमेंट है जो गांधी जी को ना मानता हो। जब पूरा देश गांधीजी  के सामने सर झुकाता हो, बड़े-बड़े राजनीतिक दल गांधी जी को अपना आदर्श मानते हैं तो फिर यदि सरकारी विभाग के अफसर गांधीवादी हो गए तो इसमें बुराई क्या है? आप किसी भी डिपार्टमेंट में चले जाओ पुलिस में चले जाओ, राजस्व में चले जाओ, आरटीओ तो आप कह ही चुके हो, उद्योग विभाग में चले जाओ, इरिगेशन, पीडब्ल्यूडी, नगर निगम, कलेक्ट्रेट, कोई नहीं बचा इस गांधी जी के फोटो वाले नोट के जाल से, इसलिए तो हर आदमी सरकारी नौकरी में आना चाहता है। उसको मालूम है कि जितनी तनख्वाह उसको महीने भर में मिलनी है उससे दस गुना तो वो एक झटके में किसी भी काम में अड़ंगा लगा कर कमा लेगा। वैसे भी बिना नोट दिखाएं काम करवाना आकाश के तारे तोडऩे के बराबर है। इसलिए आदमी सोचता है कि काहे के लिए जाकर सितारे तोड़ें जब धरती पर ही सारे सितारे अवेलेबल हैं। थोड़े बहुत नोट तो खर्च होंगे काम तो हो ही जाएगा। सबसे मजे की बात तो ये है कि जिन कामों के लिए गांधी जी के फोटो वाले नोट दिखाए जाते हैं वे सारे काम वैध ही होते हैं। अवैध काम तो कोई करता नहीं है। गडकरी जी ने प्रदेश के परिवहन मंत्री से कहा है कि वे अपने डिपार्टमेंट के भ्रष्टाचार पर नजर डालें लेकिन परिवहन विभाग तो गले गले तक गांधीजी के नोटों से दबा हुआ है। उसकी जांच कौन भला कर सकता है और यदि वे गांधीवादी ना बनें तो ऊपर तक कैसे माल पहुंचेगा? ना तो कोई आरटीओ बन पाएगा और ना ही ट्रांसपोर्ट कमिश्नर, इसलिए ये गांधीवादी सिलसिला चालू रहना चाहिए और चालू रहेगा ये हम अभी से ही गडकरी जी को बताए देते हैं।

अब इनकी सुनो
अभी अपन गडकरी जी की बात कर रहे थे लेकिन कर्नाटक के एक मंत्री ने तो प्रजा सेवा आंदोलन की मीटिंग में साफ-साफ कह दिया कि अगर लोग बाग अपना काम करवाने के लिए अफसरों और कर्मचारियों को अपनी खुशी से पैसा देते हैं तो उसमें हर्ज क्या है? वाह क्या बात कही है मंत्री जी ने, सारे अफसर और कर्मचारी गदगद हैं। मंत्री जी की बात सुनकर सोच रहे हैं कि जाकर उनके चरण पकड़ लें और गाना गाये ‘आप जैसा कोई मेरी जिंदगी में आए तो बात बन जाए’। वैसे एक हिसाब से मंत्री जी ने बात गलत नहीं कही। लोग बाग जाते हैं अपना काम करवाने और पहले ही बात कर लेते हैं  कि बताओ कितना लगेगा। क्योंकि उनको भी मालूम है कि बिना लगे उनका काम होना नहीं दूसरी तरफ सामने वाला भी बिना किसी लाग लपेट के साफ -साफ  बता देता है कि देखो भैया इतना लगेगा और इतना दे दोगे तो कागजात घर आपके घर पहुंचा दिए जाएंगे, और अगर नहीं दोगे तो चप्पलों के दर्जनों सेट घिस जाएंगे लेकिन आपका काम नहीं हो पाएगा। लगता है मंत्री जी भी जब कभी भी मंत्री ना रहे होंगे तो ऐसे अफसरों और कर्मचारियों से पाला जरूर पड़ा होगा और उन्होंने भी खुशी-खुशी पैसा देकर अपना काम करवा लिया होगा इसलिए वे कह रहे हैं कि अगर आदमी खुशी से पैसा देता है तो बुराई की क्या बात है, अब जब देश में भ्रष्टाचार को बढ़ाने और जायज ठहरने वाले मंत्री हों तो उस देश का क्या हो सकता है। जिस मंत्री को भ्रष्टाचार के खिलाफ  आवाज उठानी चाहिए वो यदि रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार को जायज ठहरा रहा है तो विदेशियों की इस बात पर अपने को पूरा यकीन हो गया है जो उन्होंने भारत के संदर्भ में कही थी कि ‘पहले हमें भगवान पर भरोसा नहीं था लेकिन जब हम इंडिया आए तो हमें भगवान पर भरोसा हो गया क्योंकि ये देश भगवान के ही भरोसे चल रहा है’।

विजयवर्गीय उवाच
इंदौर के कद्दावर नेता ‘कैलाश विजयवर्गीय’ को पता नहीं आजकल क्या हो गया है। बिना सोचे समझे कुछ भी बोल देते हैं। फिर वीडियो बनाकर खेद प्रकट कर देते हैं। दरअसल उनका सपना था कि वे प्रदेश के मुख्यमंत्री बनेंगे लेकिन उनसे जूनियर को जब से मुख्यमंत्री बनाया और जब से उन्हें माननीय, यशस्वी मुख्यमंत्री कहना पड़ रहा है तब से वे कुछ अधीर से हो जाते हैं और इसी अधीरता में उनके मुंह से क्या निकल जाता है वे खुद नहीं सोच पाते हैं। अभी हाल ही में एक महिला पार्षद के शरीर को लेकर जो उन्होंने टिप्पणी की उसको लेकर भारी बवाल मच गया। बाद में हमेशा की तरह एक वीडियो बनाकर कैलाश जी ने बाकायदा खेद प्रकट किया और यह भी कह दिया कि ये सब कांग्रेस का प्रोपेगेंडा है अरे भैया जब आप कुछ उल्टा सीधा बोलोगे तो कांग्रेस तो उसको लपक ही लगी और वही हमेशा से होता रहा है। अब सुना है कि विजयवर्गीय जी ने इंदौर के मीडिया से बात करने से इनकार कर दिया है। लेकिन बात करने से इनकार करने से पहले दस बार सोच लीजिए कैलाश जी कि क्या बोलना है। अगर ऐसा आप कर लोगे तो बार-बार वीडियो बनाकर खेद प्रकट करने की नौबत नहीं आएगी।

सुपरहिट ऑफ  द वीक
‘मैंने देखा है कि आपके बर्तन हमेशा चमचमाते रहते हैं आप इन्हें धोने के लिए किस चीज का इस्तेमाल करती हैं’ श्रीमती जी ने उनकी पड़ोसन से पूछा
‘अपने पतिदेव का’ श्रीमती का उत्तर था।

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Jai Lok
Author: Jai Lok

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