
(जय लोक)। आजकल ओटीपी और पासवर्ड को लेकर लोग भारी परेशान हैं, हर जगह या तो पासवर्ड बताओ या फिर ओटीपी, हाल तो ये है कि देश के सबसे बड़े स्टेट बैंक से यदि एकमुश्त दस हजार रुपए एटीएम से निकालना चाहे तो वो पहले ओटीपी मांगता है इसलिए आजकल आदमी दो बार में पांच पांच हजार निकाल लेता है कि ओटीपी न बताना पड़े। ऑनलाइन सामान बुलवाओ डिलीवरी बॉय तब तक सामान नहीं देगा जब तक आप ओटीपी नहीं बताओगे। अरे भैया हमने पैसा दे दिया, तुम सामान ले आए, घर का पता तुम्हें मालूम है, घर में कोई पड़ोसी तो रहने आएगा नहीं, रहेगा तो वही आदमी जिसने आर्डर दिया होगा लेकिन नहीं पहले ओटीपी बताओ तब जाकर माल की डिलीवरी होगी।

लोग बाग आजकल सोशल मीडिया पर बड़े एक्टिव हैं फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप, ईमेल, सब पर लगे हुए लेकिन सबका पासवर्ड चाहिए अगर आप अपना पासवर्ड भूल गए तो समझ लो आपका बंटाधार तय है। लाख कोशिश कर लो ना आपका फेसबुक खुलेगा, ना जीमेल खुलेगी, ना इंस्टाग्राम खुलेगा, ना व्हाट्सएप खुलेगा, इतना तो बचपन में पाठ याद करने में टाइम नहीं लगता था जितना आजकल पासवर्ड याद रखने में लगता है। यही हाल के्रडिट कार्ड, डेबिट कार्ड, एटीएम का भी है सब में पहले पासवर्ड डालो तब जाकर पैसा निकलेगा कार्ड भी दसियों हो गए हैं एटीएम कार्ड, वोटर कार्ड, आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस कार्ड, गाड़ी का रजिस्ट्रेशन कार्ड, समग्र आईडी का कार्ड, पैन कार्ड, एम्पलाई कार्ड और अब बच्चों के लिए अपार कार्ड भी बनाना तय हो गया है आदमी का पर्स कार्डों से भरा हुआ है कब कौन सा कार्ड सरकार मांग ले कोई भरोसा नहीं, किस कार्ड के आधार पर यह बता दिया जाए कि आप भारत के नागरिक नहीं है कोई कुछ नहीं कह सकता।ओटीपी का तो हाल ये हो जाएगा कि प्रेमी प्रेमिका से बात करना चाहता है तो बोलेगी पहले ओटीपी बताओ तब बात करना, पति-पत्नी के साथ रोमांस करना चाहेगा तो पत्नी बोलेगी पहले पासवर्ड बताओ या फिर ओटीपी। हाल ये हो जायेंगे कि मरीज का अस्पताल में ऑपरेशन होना है वो ऑपरेशन टेबल पर लेटा हुआ है डॉक्टर हाथ में कैंची चाकू लिए तैयार खड़ा है लेकिन तब तक ऑपरेशन नहीं कर रहा जब तक मरीज अपना पासवर्ड या ओटीपी नहीं बता देता मरीज मर जाए उससे कोई लेना-देना नहीं जब तक ओटीपी नहीं आएगा तब तक डॉक्टर हाथ नहीं लगाएगा। ट्रेन में चढ़ता है तो ओटीपी के बना ट्रेन में नहीं चढ़ पाओगे, बस से यात्रा करना है तो पासवर्ड चाहिए, प्लेन में बैठना है उसके पहले आपको पासवर्ड या ओटीपी बताना पड़ेगा तब आप यात्रा के लिए सूटेबल हो पाए हो पाओगे। अपने को तो लगता है कि वो दिन भू दूर नहीं है जब शमशान घाट में ‘मुर्दे’ से भी पूछा जाएगा कि पहले ओटीपी बताओ पासवर्ड बताओ तभी तुम्हारा ‘फ्यूनरल’ हो पाएगा वरना बॉडी ऐसे ही पड़ी रहेगी हो सकता है घर वाले तेरहवीं कर दें बरसी भी हो जाए लेकिन फ्यूनरल ना हो पाए बिना ओटीपी या बिना पासवर्ड के।

बारिश से डरती पुलिस
एक बड़ी मजेदार खबर अखबार में आई है। लुधियाना में एक सेवानिवृत अधिकारी थे कहीं बाहर गए थे घर में सीसीटीवी कैमरा लगा हुआ था, रात को दो बजे अचानक नींद खुली और उन्होंने देखा कि उनके घर में कुछ लोग घुस रहे उन्होंने तुरंत पड़ोसी के बेटे को फोन किया और उसने पुलिस को फोन किया कि पड़ोस वाले अंकल के सूने घर में चोर घुसे हुए हैं आप लोग जल्द आ जाइए, तो पुलिस वालों ने जवाब दिया कि बाहर बहुत तेज बारिश हो रही है हम नहीं आ पाएंगे। आम आदमी इसमें पुलिस का बड़ा मजाक उड़ा रहे हैं अरे भाई इसमें मजाक उड़ाने की क्या बात है हो सकता है सरकार ने उन्हें बरसाती ना दी हो, इतनी तेज बारिश में सडक़ में कौन से गड्ढे में गिर जाए कोई भरोसा नहीं है, वैसे भी बारिश में चलना खतरनाक होता है, ना सामने कुछ दिखता है ना पीछे कौन आ रहा है ये दिखाई देता है सही तो कहां पुलिस ने बारिश तेज है। चूंकि मामला बरसात का था इसलिए बारिश तेज का बहाना बन गया भविष्य में यदि कोई गमीज़् में कंप्लेंट करेगा तो ये कहा जाएगा ‘भैया बाहर लू चल रही है हम नहीं आ पाएंगे’, यही हाल ठंड का होगा कि बाहर ‘कडक़ड़ाती ठंड’ है हम थाने से बाहर निकले तो निकलें कैसे? फिर दूसरी बात जब तक पुलिस उनके घर तक पहुंचती तब तक तो चोर महोदय अपना काम करके निकल लिए होते, पुलिस ने भी सोचा होगा कि जब चोर पकड़ में ही नहीं आना है तो काहे को इतनी कवायत करो। लुधियाना पुलिस ने जो भी किया था सही किया और इसी चक्कर में चोर लाखों का माल लूट के निकल गया।


वे खुद शिकार हो गई
कांग्रेस में इस समय भारी जंग चल रही है एक नेता दूसरे नेता की जड़ खोदने में लगा है जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री को घेरने की कोशिश करते हुए बहुत बड़ा गुब्बारा फुलाया लेकिन दिग्विजय सिंह ने एक छोटी सी सुई से उस गुब्बारे की पूरी हवा निकल कर रख दी। इधर कांग्रेस महिला उत्पीडऩ प्रकोष्ठ की प्रदेश अध्यक्ष ‘प्रियंका करार’ जिन पर जिम्मेदारी थी कि वे महिलाओं के उत्पीडऩ को रोकने में अपनी पूरी ताकत लगा दें उनकी पार्टी ने उनको ही नोटिस देकर उनका उत्पीडऩ कर दिया, अब बेचारी सोशल मीडिया पर अपना दुखड़ा रो रही हैं कि नोटिस के नियम क्या महिलाओं के लिए ही हैं उधर दिग्विजय सिंह के खिलाफ निधि चतुवेर्दी ने जो पोस्ट लिखी उस पर उनको भी नोटिस मिल गया जबकि पार्टी में ये कहां जा रहा है कि महिलाओं के लिए आरक्षण किया जाएगा लेकिन सवाल ये है कि जो महिला महिलाओं की उत्पीडऩ के लिए बनाए गए प्रकोष्ठ की अध्यक्ष अपना ही नोटिस रूपी उत्पीडऩ नहीं रोक पा रही है उसे नोटिस दिया जा रहा है तो फिर वह दूसरी महिलाओं के उत्पीडऩ को क्या खाक रोक पाएगी? वैसे उसका कहना सही है कि बड़े नेता दिग्विजय सिंह ने अपनी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष को दलाल और ब्लेकमेलर कह दिया उनको तो आज तक कोई नोटिस नहीं मिला आखिर ऐसा पार्टी में क्यों हो रहा है लेकिन अपने को मालूम है कि कांग्रेस को किसी चीज से कोई लेना-देना नहीं पार्टी जैसी चल रही है वैसे ही चलती रहेगी भले ही बीच-बीच में तरह-तरह के बयान आते रहे लेकिन होना जाना कुछ नहीं है ये अपने को भी मालूम है और हर कांग्रेसी को भी।
सुपर हिट ऑफ द वीक
‘अजी सुनते हो, हमारी शादी कराने वाले पंडित जी का देहांत हो गया।’ श्रीमती जी ने श्रीमान जी से कहा
‘मैं तो पहले ही कहता था कि जिस दिन उसने हमारी शादी करवाई थी उसी दिन तय हो गया था एक न एक दिन उसे उसके पापों की सजा जरूर मिलेगी!श्रीमान जी ने उत्तर दिया।
11 तहसीलों के तहसीलदार बदले, हर जगह नए अधिकारियों की आमद से धीमी होगी काम की चाल
Author: Jai Lok






