
इलेक्शन पिटीशन दायर करने का विकल्प अब भी बाकी
नई दिल्ली/भोपाल। कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन के राज्यसभा नामांकन पत्र को निरस्त किए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर आज शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। लेकिन सुप्रीमकोर्ट ने मीनाक्षी को किसी तरह की राहत नहीं दी। सुप्रीमकोर्ट ने नटराजन को हाईकोर्ट में याचिका दायर करने की सलाह दी है।
नटराजन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने अदालत के समक्ष दलील दी कि जिस निजी शिकायत (प्राइवेट कंप्लेंट) के आधार पर नामांकन खारिज किया गया, उस पर अब तक किसी सक्षम अदालत ने संज्ञान ही नहीं लिया है।
सिंघवी ने कहा कि जन प्रतिनिधित्व अधिनियम (आरपी एक्ट) की धारा 33ए के तहत उम्मीदवार को केवल उन आपराधिक मामलों का खुलासा करना होता है, जिनमें दो वर्ष या उससे अधिक सजा वाले अपराध में सक्षम अदालत द्वारा आरोप तय (चार्ज फ्रेम) किए जा चुके हों। उन्होंने तर्क दिया कि वर्तमान मामले में न तो आरोप तय हुए हैं और न ही किसी अदालत ने संज्ञान लिया है, इसलिए नामांकन निरस्त करने का आधार कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं है।

कोर्ट ने चुनाव याचिक को बताया उपचार
न्यायमूर्ति मिश्रा ने कहा कि पूरी कठिनाई यह है कि यदि हम आपका नामांकन स्वीकार कर लेते हैं, तो अनुच्छेद 329 के तहत अधिकार क्षेत्र का विभाजन हो जाएगा। एक प्रकार के मामले उच्च न्यायालय देखेगा और दूसरे, जहां स्पष्ट मामला हो, अनुच्छेद 32 के तहत आएंगे। इन दोनों शक्तियों में अंतर कैसे किया जाएगा? हम लगातार कहते आए हैं कि चाहे नामांकन गलत तरीके से ही क्यों न खारिज किया गया हो, उसका उपचार चुनाव याचिका के माध्यम से है। हमें ऐसा कोई फैसला दिखाइए जिसमें हमने चुनाव प्रक्रिया के दौरान हस्तक्षेप किया हो?

कोर्ट ने सुनाया फैसला
पीठ ने कहा कि जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 33ए का प्रावधान यहां प्रासंगिक है। उम्मीदवार द्वारा जानकारी प्रस्तुत करने की आवश्यकता कंडक्ट ऑफ इलेक्शन रूल्स, 1961 के नियम 4ए में निर्धारित की गई है। नियम 4ए के अनुसार, प्रत्येक उम्मीदवार को रिटर्निंग ऑफिसर के समक्ष नामांकन पत्र प्रस्तुत करते समय अपने द्वारा शपथपूर्वक सत्यापित एक हलफनामा (एफिडेविट) भी जमा करना होता है। फॉर्म-26 में उन जानकारियों का विवरण दिया गया है, जिनका उम्मीदवार को अपने हलफनामे में खुलासा करना अनिवार्य है। फॉर्म-26 का खंड (क्लॉज) 5 नामांकन दाखिल करते समय उम्मीदवार द्वारा प्रदान की जाने वाली सूचनाओं से संबंधित है। न्यायालय ने कहा कि ऐसा कोई भी व्याख्या, जिसके तहत नामांकन पत्र खारिज किए जाने के मामलों में इस न्यायालय द्वारा हस्तक्षेप किया जाए और अन्य मामलों को चुनाव याचिका के माध्यम से चुनौती देने के लिए छोड़ दिया जाए, उसे प्रोत्साहित नहीं किया जा सकता। इसी दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए, न्यायालय ने याचिका में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए उसे खारिज कर दिया।


मीनाक्षी नटराजन बोलीं अगला कदम पार्टी तय करेगी
राज्यसभा नामांकन को खारिज किए जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मीनाक्षी नटराजन ने कहा कि मैं पार्टी की प्रतिनिधि हूं और अब पार्टी ही अगला कदम तय करेगी। उन्होंने कहा कि मैं पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से चर्चा करूंगी। नटराजन ने कहा कि जहां तक मेरी समझ है, ये कोई झटका नहीं है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि चुनाव आयोग में अपील की जाए, तो उस पर चर्चा होगी।
भाजपा ने लगाई थी आपत्ति
रिटर्निंग ऑफिसर की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी तथा भारत निर्वाचन आयोग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता डी.एस. नायडू ने तत्काल हस्तक्षेप की मांग का विरोध किया था। गौरतलब है कि कांग्रेस नेता ने शीर्ष अदालत का रुख उस समय किया, जब रिटर्निंग ऑफिसर ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा उठाई गई आपत्तियों के आधार पर उनका नामांकन पत्र खारिज कर दिया। भाजपा की ओर से दावा किया गया कि नटराजन ने अपने नामांकन पत्र के साथ दाखिल हलफनामे में तेलंगाना की एक अदालत में लंबित मामले का उल्लेख नहीं किया था। यह आपत्ति पूर्व कॉरपोरेट अधिकारी ए. श्रीलता द्वारा चौथी अतिरिक्त मुख्य महानगर दंडाधिकारी अदालत में दायर याचिका पर आधारित थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि नटराजन ने कुंभम शिवकुमार रेड्डी को राजनीतिक संरक्षण दिया, जिन पर श्रीलता ने छेड़छाड़ और आपराधिक धमकी सहित कई आरोप लगाए थे।
कांग्रेस ने बताई सियासी साजिश
नटराजन ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे सियासी साजिश बताया है। उन्होंने हैदराबाद की अदालत में श्रीलता की याचिका का भी विरोध किया है। इससे पहले कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया था कि रिटर्निंग ऑफिसर निष्पक्ष नहीं हैं और सरकार के दबाव में काम कर रहे हैं। मध्य प्रदेश से कांग्रेस की एकमात्र राज्यसभा उम्मीदवार रहीं नटराजन ने दावा किया कि उनका नामांकन रद्द कर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास किया जा रहा है।
Author: Jai Lok






