
पिछले साल जुलाई में खुले थे 6 बड़े बांधों के गेट
भोपाल (जयलोक)। प्रदेश में रविवार से भले ही जोरदार बारिश का दौर जारी हो, लेकिन इस सीजन में मानसून की बेरुखी से अब भी एक भी बांध लबालब नहीं हो पाया है। जोरदार बारिश के कारण भले ही मंडला और डिंडोरी में नर्मदा का जलस्तर तेजी से बढ़ा, लेकिन नर्मदा पर बने बड़े बांधों का पेट अब भी खाली है। पिछले साल जुलाई माह के अंत तक ही प्रदेश के सभी बड़े बांध लबालब हो गए थे और उनके गेट खोलने की नौबत आ गई थी, लेकिन इस बार ये बांध अब भी पूरे नहीं भर पाए हैं। हालांकि, मौसम विभाग के आकलन के अनुसार अगर अगले तीन से चार दिन तक जोरदार बारिश का दौर जारी रहा, तो सबसे पहले नर्मदा नदी पर बने बरगी बांध के गेट खोले जाएंगे। इसके बाद इंदिरा सागर और ओंकारेश्वर का नंबर आएगा।
अलर्ट मोड में विभाग
प्रदेश में मानसून के दोबारा एक्टिव होने से लगातार हो रही तेज बारिश के बाद जल संसाधन विभाग अलर्ट मोड पर है। नदियों और जलाशयों में बढ़ते जलस्तर को देखते हुए विभाग ने मैदानी अमले को मुस्तैद रहने के निर्देश दिए हैं। भले ही इस सीजन में शुरुआती सुस्ती के चलते अभी प्रदेश के बड़े बांध पूरी तरह नहीं भर पाए हैं, लेकिन रविवार से डैम के कैचमेंट एरिया (जल ग्रहण क्षेत्रों) से पानी की आवक लगातार तेज हो गई है। स्थिति को देखते हुए जल संसाधन विभाग के इंजीनियरों को बांधों के जलस्तर और वाटर गेज पर 24 घंटे कड़ी नजर रखने को कहा गया है ताकि आपात स्थिति या अचानक जलस्तर बढऩे पर तुरंत उचित कदम उठाए जा सकें। मौसम विभाग द्वारा आने वाले दिनों में कई जिलों में भारी से अति भारी बारिश के यलो और ऑरेंज अलर्ट के बाद विभाग ने बांधों के निचले इलाकों में भी विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून में ड्राई स्पेल (लंबे समय तक सूखा रहने) का फसलों की शारीरिक संरचना पर विपरीत प्रभाव पड़ता है।
देर से भरते हैं पश्चिमी एमपी के डैम
जल संसाधन विभाग के इंजीनियरों के अनुसार, प्रदेश के पूर्वी हिस्सों में बने बांध पश्चिमी हिस्सों से पहले भरते हैं। नर्मदा में अपस्ट्रीम के जिलों अनूपपुर, डिंडोरी और मंडला का पानी जबलपुर के बरगी में सबसे पहले आता है। और बरगी एवं तवा डैम से जो पानी छोड़ा जाता है, उसके बाद ओंकारेश्वर और इंदिरा सागर जैसे बड़े डैम लबालब होते हैं। इसके साथ ही, शहडोल में बने बाणसागर डैम के गेट भी सामान्य तौर पर अगस्त माह में खुल जाते हैं, लेकिन पिछले साल इसके गेट जुलाई में ही खोलने पड़े थे। चंबल नदी पर बने गांधी सागर डैम में मालवा अंचल में हुई बारिश का पानी सबसे अंत में जाता है, इसलिए सामान्य तौर पर इसके गेट खोलने की नौबत सितंबर तक आती है।
मानसून की बेरुखी से यह है बांधों की स्थिति
75 प्रतिशत से अधिक: दजला-देवड़ा (खरगोन)100, सुखता (खंडवा) 84, कोतवाल फीडर (मुरैना) 97, गौरखपुरा टैंक (राजगढ़) 100, बोरी (सिवनी)-86
50 से 75 प्रतिशत: मणिखेड़ा (शिवपुरी) – 59, कुटनी (छतरपुर) 62, पवई (पन्ना) 50, महान सागर (सीधी) 57, संजय सरोवर (सिवनी) 72, हरसी (ग्वालियर) 59, महुअर (शिवपुरी) 71
50 प्रतिशत से कम: बाणसुजारा (टीकमगढ़)-36, गोपीकृष्ण सागर (गुना)- 49, सम्राट अशोक सागर हलाली (विदिशा) 32, पगारा (सागर) 49, माही (झाबुआ) 27, पेंच (छिंदवाड़ा)- 38, बारना (रायसेन)- 491
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Author: Jai Lok





