
किसानों की केंद्र सरकार से गेहूँ के समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी की माँग
जबलपुर (जय लोक)। विगत दिनों केंद्र सरकार ने वर्ष 2027-28 के लिए रबी की 6 फसलों-गेहूं, जो, चना, मसूर,सरसों एवं कुसुम के समर्थन मूल्य घोषित किये। गेहूं के समर्थन मूल्य में विगत वर्ष की तुलना में इस वर्ष केवल 25 रुपये की बढ़ोतरी किये जाने से किसान सकते में है। वे अपने आप को ठगा महसूस कर रहे हैँ।
पिछले वर्ष गेहूँ का समर्थन मूल्य 2585 रुपये प्रति क्विंटल था, किसान आंदोलनो के चलते प्रदेश सरकार इस पर 40 रुपये बोनस देने मजबूर हुई थी। अब इस वर्ष 2610 रुपये किया गया है । केंद्र सरकार द्वारा विगत वर्ष प्रति क्विंटल 160 रुपये की बृद्धि की गई थी। इस वर्ष केवल 25 रुपये की बृद्धि हुई है जो विगत 15 वर्षो की तुलना में सबसे कम है। किसानों को उम्मीद थी की कम से कम उसे पिछले वर्ष से ज्यादा दाम मिलेगा,परन्तु वह फिर ठगा गया, सरकार की इस घोषणा से वह न केवल अत्यंत निराश हुआ है, वरन रोष में है।
इस वर्ष खाद,बीज, दवाओ, कृषि उपकरण, डीजल, अन्य आदान सामग्री आदि की कीमतों में अप्रत्याशित बृद्धि से खेती की लागत 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ गई है। विगत वर्ष के गेहूं के समर्थन मूल्य में भी बा मुश्किल किसी तरह वह अपनी लागत निकाल पा रहा था।
मध्य प्रदेश की मुख्य फसल गेहूँ है, यहाँ की जमीन व जलवायु गेहूँ के लिए अत्यंत उपयुक्त है, इसलिए गेहूं लगाना उसकी मजबूरी है। अब क्या होगा ? किसान को अपने भविष्य की चिंता सताने लगी है। वह रोष में है।
किसानों के गैर राजनैतिक, वर्ग विहीन, राष्ट्रीय संगठन भारत कृषक समाज ने प्रधान मंत्री, मुख्य मंत्री एवं केंद्रीय कृषि मंत्री को पत्र लिखकर किसानों की चिंता से उन्हें अवगत कराते हुए गेहूं का समर्थन मूल्य बढ़ाए जाने की मांग की है।
कृषक समाज के के.के.अग्रवाल, रूपेंद्र पटेल, जे. आर. गायकवाड़, सुभाष चंद्रा, रामगोपाल पटेल, प्रमोद मरवाहा, रामकिशन पटेल, अविनाश राय, संजय जैन, अनिल चिले, डॉ प्रकाश दुबे, व्ही के पंड्या, सी एल शर्मा, रमेश नवेरिया, रामेश्वर अवस्थी, सुशील जैन, योगेश पटेल, हरनारायण सिंह, मनीष सोनी, किसान सेवा संगठन के जितेंद्र पटेल, सुरेश कुर्मी, महेन्द्र पटेल, अंकित पटेल, रामदीन पटेल, मुकेश सिंह ठाकुर, पंचम हल्दकार, मनोज पटेल, श्रीमती मीतू शुक्ला, जुगल किशोर पटेल , श्रीमती सपना काछी आदि ने कहा है की सरकार ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में 2700 रुपये मे गेहूँ खरीद का वायदा किया था, अब वह किसानों के साथ वायदा खिलाफ़ी कर रही है, किसानों में भारी रोष व्याप्त है। किसानो से एकजुट होकर इस वायदा खिलाफी व नाकाफी बृद्धि के विरोध में आवाज उठाने की अपील की गई है।

Author: Jai Lok






