
कराची। पाकिस्तान अपनी नौसेना की ताकत बढ़ाने और हिंद महासागर क्षेत्र में अपना प्रभाव विस्तार करने की एक बड़ी रणनीतिक योजना पर काम कर रहा है। हाल ही में पाकिस्तान ने चीन में निर्मित अपनी नई हंगोर-क्लास पनडुब्बी को कराची में अपने बेड़े में शामिल किया है। अब पाकिस्तानी नौसेना के वरिष्ठ अधिकारी इसे बंगाल की खाड़ी में तैनात कर अपनी उपस्थिति बनाए रखने की बात कर रहे हैं। यह कदम 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध और बांग्लादेश के निर्माण के बाद से पहली बार है जब पाकिस्तान इस रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र में अपनी सार्थक नौसैनिक उपस्थिति दर्ज कराने का प्रयास कर रहा है, जिससे भारत के लिए नई सुरक्षा चिंताएं उत्पन्न हो गई हैं।
1971 में भारतीय सेना ने पाकिस्तानी सेना को करारी शिकस्त दी थी, जिसके बाद पाकिस्तानी नौसेना की मौजूदगी मुख्य रूप से उत्तरी अरब सागर तक ही सीमित रह गई। इसके उलट, बंगाल की खाड़ी पारंपरिक रूप से ऐसा इलाका रहा है जहां भारत को भौगोलिक और रणनीतिक रूप से काफी बढ़त हासिल है। अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के करीब होने की वजह से, बंगाल की खाड़ी भारत और बांग्लादेश के बीच सामान और ऊर्जा के व्यापार के लिए बहुत अहम हो गई है। यह इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में नौसेना की होड़ और बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच भू-राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण हो गया है। इसके अलावा, भारत भी लगातार अपने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के आसपास अपनी नौसैनिक क्षमताओं का विस्तार कर रहा है। इस बीच, फरवरी 2026 में तारिक रहमान के बांग्लादेश के नए प्रधानमंत्री बनने के बाद से भारत और बांग्लादेश के संबंधों में भी नई गर्मजोशी देखी गई है।
कुल मिलाकर, पाकिस्तान का यह कदम भले ही भारत के लिए निगरानी और तैयारी की आवश्यकता को बढ़ाए, लेकिन इससे बंगाल की खाड़ी में भारत की निर्विवाद सैन्य श्रेष्ठता को चुनौती मिलने की संभावना कम ही है। रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तानी नौसेना के कमोडोर उमर फारूक ने चीन से लौटते समय श्रीलंका में एक कार्यक्रम के दौरान इस नई पनडुब्बी को गेम चेंजर बताया था। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि इस पनडुब्बी के शामिल होने से इस्लामाबाद को बंगाल की खाड़ी में अपनी पहुंच और उपस्थिति बनाए रखने की क्षमता मिलेगी। पाकिस्तान की यह महत्वाकांक्षा ऐसे समय में सामने आई है जब मोहम्मद यूनुस के अंतरिम शासन के दौरान पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच नागरिक और सैन्य संबंधों में उल्लेखनीय सुधार देखा गया है।
भारत के लिए इसके मायने और क्षेत्रीय संतुलन
बंगाल की खाड़ी पारंपरिक रूप से भारत के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीतिक क्षेत्र रही है, जहां विशाखापत्तनम में भारत की पूर्वी नौसेना कमान स्थित है। यह क्षेत्र व्यापार और ऊर्जा मार्गों के लिए भी बेहद अहम है। अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों के तहत, देशों के विशेष आर्थिक क्षेत्र के बाहर के अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में विदेशी सैन्य जहाजों को घूमने की स्वतंत्रता होती है, इसलिए पाकिस्तान का यह कदम भारत के लिए एक परेशानी का सबब बन सकता है। हालांकि, रणनीतिक जानकारों का मानना है कि इससे बंगाल की खाड़ी में शक्ति संतुलन नहीं बदलेगा, क्योंकि पिछले पांच दशकों में भारतीय नौसेना ने काफी विस्तार किया है और अब वह परमाणु-संचालित पनडुब्बियों और विमान वाहक पोतों का संचालन करती है, जिससे उसे क्षेत्र में स्पष्ट बढ़त हासिल है।
Author: Jai Lok






