
एसआईटी करेगी जाँच, 2 माह में माँगी रिपोर्ट
जबलपुर (जय लोक)। छतरपुर के प्रसिद्ध बागेश्वर धाम के पास किशोरी से कथित दुष्कर्म और उसके गर्भवती होने के मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने गंभीर रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति अजय कुमार निरंकारी की एकलपीठ ने आरोपी राजू जाटव की दूसरी जमानत अर्जी खारिज करते हुए छतरपुर पुलिस अधीक्षक को विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने के निर्देश दिए हैं। एसआईटी को यह पता लगाने को कहा गया है कि किशोरी के साथ दुष्कर्म किसने किया और उसके गर्भ में पल रहे बच्चे का जैविक पिता कौन है। अदालत ने जांच पूरी कर दो माह के भीतर रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।
घटनास्थल पर पुलिस की मौजूदगी का दिया तर्क – शिवपुरी निवासी राजू जाटव की ओर से दायर दूसरी जमानत अर्जी में दावा किया गया कि जिस स्थान को कथित घटनास्थल बताया गया है, वहां 24 घंटे पुलिस की निगरानी रहती है। ऐसे में वहां बताए गए तरीके से अपराध किया जाना संभव नहीं है। आरोपी की ओर से यह भी दलील दी गई कि किशोरी के गर्भ में पल रहे भू्रण का डीएनए उसके डीएनए से मेल नहीं खाया है।
किशोरी ने अदालत में आरोपी पर आरोप से किया इनकार – मामले में सुनवाई के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि ट्रायल कोर्ट में गवाह के रूप में पेश हुई किशोरी ने अभियोजन के आरोपों का समर्थन नहीं किया। जिरह के दौरान उसने स्पष्ट रूप से कहा कि आरोपी राजू जाटव ने उसके साथ दुष्कर्म नहीं किया था। हाईकोर्ट ने इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए कहा कि जब किशोरी के साथ दुष्कर्म की घटना सामने आई है और आरोपी के खिलाफ आरोप से वह स्वयं इनकार कर रही है, तो वास्तविक आरोपी का पता लगाना जरूरी है।
पहले आरोपी पर लगाए थे आरोप – अदालत ने यह भी ध्यान में रखा कि किशोरी ने पहले आरोपी पर दुष्कर्म के आरोप लगाए थे। इसके अलावा आरोपी की पत्नी की निशानदेही पर किशोरी को बरामद किए जाने की बात भी रिकॉर्ड पर है।






