
मुंबई। महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र में किसान आर्थिक संकट के कारण आत्महत्या कर रहे हैं। कर्ज और मौसम की मार से किसानो की आत्महत्या बढ़ती जा रही है। जनवरी से अगस्त 2026 के बीच आठ महीनों में 653 किसानों ने आत्महत्या की है। औसतन हर दिन करीब तीन किसान आत्महत्या कर रहे हैं। सबसे अधिक मामले बीड जिले में सामने आए हैं।
जिलावार आंकड़ों के अनुसार बीड में 149, छत्रपति संभाजीनगर में 138, धाराशिव में 88, नांदेड में 82, जालना में 61, लातूर में 46, परभणी में 45 और हिंगोली में 44 किसानों की मौत हुई है । सबसे गंभीर स्थिति सरकारी सहायता को लेकर है।उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार इन आठ जिलों में करीब 290 किसान परिवारों को अब तक आर्थिक मदद नहीं मिली। बीड में 70, संभाजीनगर में 63, जालना में 31, परभणी में 30, हिंगोली में 20, नांदेड में 30, धाराशिव में 28 और लातूर में 18 परिवार मदद से वंचित हैं।
फसल बर्बादी, बारिश की कमी, कर्ज, उत्पादन लागत बढऩे और उपज का उचित मूल्य नहीं मिलने से किसानों का आर्थिक संकट बढ़ा है। विशेषज्ञों के अनुसार केवल मुआवजा नहीं, बल्कि सिंचाई, फसल बीमा और कर्ज राहत की प्रभावी व्यवस्था जरूरी है। महाराष्ट्र सरकार का इस और कोई ध्यान नहीं है। जिसके कारण आत्महत्या करने के लिए किसान विवस हैं।
ग्राइंडर से कटा हुआ था गुप्तांग, वृंदावन में जबलपुर के युवक की मौत : जाँच शुरू
Author: Jai Lok






