
बढ़ रही मरीजों की संख्या नाकाफी साबित हो रही व्यवस्थाएँ
जबलपुर (जय लोक)। महाकोशल के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज में इन दिनों मरीजों को दी जाने वाली सुविधाएं नाकाफी साबित हो रही है। यहां मरीजों की बढ़ती संख्या के अनुरूप नो तो पर्याप्त स्टॉफ मौजूद हैं ना ही भर्ती के लिए बेड पर्याप्त हैं। जिसके कारण स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। अस्पताल की ओपीडी में रोजाना बड़ी संख्या में मरीज पहुंच रहे हैं। डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की कमी के चलते मरीजों को लंबा इंतजार करना पड़ता है। कई मरीज घंटों लाइन में खड़े रहने को मजबूर हैं, जिससे समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा।

मरीजों को नहीं मिल रहे बेड
अस्पताल के वार्डों की स्थिति भी चिंताजनक बनी हुई है। बेड की कमी के कारण कई बार एक ही बेड पर दो मरीजों को रखना पड़ता है, वहीं कुछ मरीजों को जमीन पर इलाज कराना पड़ता है। इससे मरीजों और परिजनों की परेशानी बढ़ रही है। अस्पताल में नए वार्ड तो बनाए गए हैं, लेकिन वहां पर्याप्त स्टाफ की व्यवस्था नहीं हो पाई है। कई वार्डों में जरूरत के मुकाबले कम नर्सें और कर्मचारी तैनात हैं, जिससे मरीजों की देखभाल प्रभावित हो रही है।

सफाई व्यवस्था पर उठ रहे सवाल
अस्पताल की सफाई व्यवस्था को लेकर भी शिकायतें सामने आ रही हैं। वार्डों और शौचालयों में गंदगी के कारण मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इससे संक्रमण का खतरा भी बना रहता है।


जाँचों के लिए भी लंबी लाइन
एक्स-रे, सोनोग्राफी और अन्य जरूरी जांचों के लिए मरीजों को लंबा इंतजार करना पड़ता है। कई बार मशीन खराब होने या तकनीकी स्टाफ की कमी के कारण जांच कार्य प्रभावित होता है। अस्पताल में सभी जरूरी दवाएं उपलब्ध नहीं होने के कारण मरीजों को बाहर से दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं। इससे खासकर गरीब और मध्यम वर्ग के मरीजों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।
अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिससे दबाव अधिक है। स्टाफ की कमी को दूर करने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। मंजूरी मिलने के बाद व्यवस्थाओं में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है। फिलहाल स्थिति यह है कि सुपर स्पेशियलिटी सुविधाओं के दावों के बीच मरीजों को बुनियादी सुविधाओं के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है, जिससे स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
Author: Jai Lok






