
रानी दुर्गावती विवि के 36वे दीक्षांत समारोह का भव्य आयोजन
जबलपुर (जय लोक)। रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय का 36वां दीक्षांत समारोह आज ऐतिहासिक एवं भव्य स्वरूप में आयोजित किया गया। समारोह में महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। कार्यक्रम की अध्यक्षता मध्यप्रदेश के राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय के कुलाधिपति मंगुभाई पटेल ने की। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तथा उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
राष्ट्रपति द्रोपती मुर्मु ने कहा कि दीक्षांत समारोह में शहर आकर प्रसन्नता महसूस हो रही है। युवाओं के लिए दीक्षांत समारोह जीवन एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। उन्होंने कहा कि विवि को आधुनिक नवाचारों पर फोकस करना चाहिए, ताकि युवा देश की प्रगति को आगे बढ़ा सकें। रानी दुर्गावती जिनके नाम पर यह विश्व विद्यालय है वे साहस, शौर्य और पराक्रम की प्रतिमूर्ति हैं। पिछले वर्ष गोंडवाना सम्राज्य की महान शासक और वीरांगना की 501 वीं जन्मजयंती देश वासियों ने मनाई। संयोग से आज से दो दिनों बाद 24 जून को उनका बलिदान दिवस है। रानी दुर्गावती भारतीय नारीशक्ति के शौर्य का प्रतीक हैं। वे सदैव नारीशक्ति के लिए प्रेणा की स्त्रोत हैं। मैं महान रानी दुर्गावती को सादर नमन करती हूँ। उन्होंने जनजातीय समाज के विषय में कहा कि जनजातीय समाज स्वाभिमानी है। वे अपना दुख दर्द और परेशानी दूसरों को नहीं बताते। खुद के बारे में लोगों और सरकार को बताना उनके भावना से परे हैं। लिहाजा सरकारों को उनकी समस्याओं को ध्यान में रखते हुए काम करना चाहिए। लेकिन आज कुछ महिलाएं, बेटी बेटा उच्च शिक्षित हो रहे हैं। यह चाहे सरकार के सहयोग से हो या खुद के परिश्रम से अच्छी बात है। उन्होंने कहा कि समाज को छोडक़र अकेला नहीं चला जा सकता। उसी समाज के सहयोग से हम यहां तक आए हैं उनकी चिंता करना हमारा कर्तव्य है। बड़े अधिकारी बनने के बाद हमें देश के गावों में जाकर वहां रहने वाले लोगों का मार्गदर्शन करना चाहिए। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी को याद करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि वे कहते थे भारत जमीन का टुकड़ा नहीं बल्कि जीता जागता राष्ट्र है। 2047 के विकसित भारत का सपना सबको साथ लेकर चलने से ही पूरा होगा।

सभी विवि 5-5 गांव गोद लें-राज्यपाल
राज्यपाल मंगू भाई पटेल ने कहा कि संगमरमर की नगरी में हम सभी का स्वागत करते हैं। आज दीक्षांत समारोह में उपस्थित गुरुजनों और अभिभावकों को बधाई देते हैं कि आज उनके जीवन का नया मोड़ है। भविष्य में इन उपाधियों के माध्यम से वह बेहतर से बेहतर नौकरियां प्राप्त करें इसके लिए हमारी शुभकामनाएं है। राज्यपाल ने कहा कि जनजाति समुदाय के गौरवशाली परंपरा को गौरवान्वित करने वाली रानी दुर्गावती के नाम से इस विश्वविद्यालय से उत्तीर्ण हो रहे बच्चे हमेशा देश में उन्नति करें, देश को आगे बढ़ाने का काम करें। उन्होंने सभी लोगों से आवाहन किया कि रानी दुर्गावती के आदर्श, संघर्ष और योजनाओं से हम सभी को प्रेरणा लेनी चाहिए। राज्यपाल ने कहा कि उन्होंने सभी विश्वविद्यालय से इस बात पर चर्चा की है कि वह सभी अपने क्षेत्र के पांच पांच गांवों को गोद लें ताकि वहां की परिस्थितियों को समझा जा सके क्या करना है ताकि किस चीज की जरूरत है इन बातों की जानकारी सामने आने के बाद पुख्ता योजना बनाई जा सके। राज्यपाल ने कहा कि पिछड़ा वर्ग के लोगों के लिए सरकार द्वारा प्रारंभ की गई योजनाओं का उनको बहुत अच्छा लाभ मिल रहा है। हम सभी को यह प्रयास करना चाहिए कि समाज के हर व्यक्ति को जागरुक कर आगे बढऩे का कार्य किया जाए। पिछड़ा वर्ग के लोगों के लिए हमें अधिक चिंता कर समाज और राष्ट्र निर्माण को मजबूती प्रदान करने में अपनी भूमिका अदा करना चाहिए।

राष्ट्रपति की उपस्थिति में विवि ने रचा नया इतिहास-मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने उद्बोधन के दौरान कहा कि देश की महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू उपस्थिति में आज रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय एक नया इतिहास रचने जा रहा है। रानी दुर्गावती का नाम उस वीरांगना के नाम पर है जिन्होंने आदिवासी संस्कृति को जीवित रखने के लिए अपने देश की रक्षा करने के लिए अपनी क्षमता से अधिक 50 युद्ध लडक़र विजयी हुईं लेकिन उन्होंने दुश्मनों के सामने समर्पण नहीं किया। उनके अदम्य साहस, वीरता और बलिदान से आज के युवाओं को सबक लेना चाहिए कि देश हित से बड़ा कुछ नहीं होता।
मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा कि मुझे आज इस बात की बहुत खुशी है कि हमारी बेटियां कंधे से कंधा मिलाकर बेटों से अच्छा कार्य कर रही है। आज जिन लोगों को पांच-पांच स्वर्ण पदक, 3-3 स्वर्ण पदक, 2-2 स्वर्ण पदक प्राप्त हुए हैं, उन्होंने न सिर्फ विश्वविद्यालय का बल्कि जबलपुर का नाम भी गौरवान्वित किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हम शिक्षा के स्तर को मध्य प्रदेश में लगातार बेहतर से बेहतर बनाने का कार्य रहे हैं। इसी दिशा में नए विश्वविद्यालय भी खोले जा रहे हैं। हमारा मध्य प्रदेश कृषि प्रधान प्रदेश है इसलिए हम कार्यों से जुड़े व्यवसायिक शिक्षा को भी प्रोत्साहित कर रहे हैं। स्कूलों में ड्रॉपआउट का परसेंट शून्य तक ले आए हैं। उन्होंने जबलपुर पधार कर प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के लिए राष्ट्रपति के प्रति आभार व्यक्त किया।


141 विद्यार्थियों को मिले 240 स्वर्ण पदक
दीक्षांत समारोह में विश्वविद्यालय के 141 मेधावी विद्यार्थियों को 240 स्वर्ण पदक प्रदान किए गए। राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने चयनित 20 स्वर्ण पदक धारकों को मंच से अपने करकमलों द्वारा स्वर्ण पदक प्रदान किए। राष्ट्रपति के प्रस्थान के बाद शेष स्वर्ण पदक एवं उपाधियां उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार के हाथों प्रदान की गई।
182 शोधार्थियों को पीएचडी
समारोह में 182 शोधार्थियों को पीएचडी उपाधि प्रदान की गई। इसके अतिरिक्त तीन विद्वानों को डी-लिट, एक को डीएससी तथा एक विशिष्ट व्यक्तित्व को मानद उपाधि प्रदान की गई। विभिन्न संकायों के पात्र विद्यार्थियों को स्नातक एवं स्नातकोत्तर उपाधियां भी प्रदान की गई।
संयुक्त छायाचित्र विशेष आकर्षण
दीक्षांत समारोह का एक विशेष आकर्षण स्वर्ण पदक धारकों एवं उपाधि प्राप्तकर्ताओं का महामहिम राष्ट्रपति, राज्यपाल, मुख्यमंत्री तथा उच्च शिक्षा मंत्री के साथ संयुक्त छायाचित्र हुआ। यह अवसर विद्यार्थियों के लिए जीवनभर की अमूल्य स्मृति बन गया है।
डुमना विमानतल पर राष्ट्रपति को दी विदाई
विमानतल पर राज्यपाल, मुख्यमंत्री की उपस्थिति में जबलपुर से प्रस्थान के दौरान मंत्री प्रहलाद पटेल, मंत्री राकेश सिंह, महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू एवं प्रशासनिक अधिकारियों ने राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु को विदाई दी।
विश्व को भारत का अमूल्य उपहार है योग :राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु
Author: Jai Lok






