
जबलपुर (जय लोक)। विगत कुछ वर्षों में जितने भी बड़े हत्याकांड शहर में घटित हुए हैं उनको करने की साजिश, योजना और वारदात को अंजाम देने की दिलेरी के पीछे हर बार प्रभावी राजनैतिक संरक्षण निकलकर सामने आता है। इस बार भी नरसिंहपुर जबलपुर जिले की सीमा राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 45 पर स्थित सुआतला थाना अंतर्गत इंद्रानगर के पास 19 जुलाई को घटित हुए पाँच लोगों की जघन्य हत्या करने वालों के पीछे फिर राजनैतिक संरक्षण का हल्ला मच गया है। इस बार राजनैतिक संरक्षक बन उभरे लोगों के नाम पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने पीएचक्यू के माध्यम से सरकार के जिम्मेदार लोगों के कानों तक भी पहुँचा दिए हैं।
पुलिस ने अपने स्तर पर हत्याकांड के जिम्मेदार लोगों के पीछे के राजनैतिक आकाओं की भूमिका की जाँच भी प्रारंभ कर दी है।
यह तो स्पष्ट है कि यह पूरा विवाद पावला घाट से निकलने वाली वैध -अवैध रेत के पैसों से जुड़ा हुआ है। रेत का काम करने वाले राजनैतिक पदों पर बैठे लोग ही ऐसे अपराधिक किस्म के लोगों को संरक्षण देकर अपना वर्चस्व स्थापित करवाकर अवैध कार्य करवाते हैं। पूर्व में पाटन के टिमरी गांव में हुए पाँच लोगों की हत्याकांड के बाद भी कुछ राजनैतिक लोगों के संरक्षण की बात सामने आई थी जिसको लेकर काफी हल्ला मचा था।

मोबाईल की सीडीआर और कॉल डिटेल्स खोलेगी कई राज
पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि हत्यारों से बरामद हुए मोबाईल की गहन तकनीकी जाँच की जाएगी। गिरफ्तार आठ लोगों में इस हत्याकांड के पहले लगातार संवाद हो रहा था। आरोपियों को मृतकों की पूरी लोकेशन मोबाईल के माध्यम से बताई जा रही थी। पुलिस का मानना है कि इस पूरी वारदात को अंजाम देेने और इसकी योजना की पूरी जानकारी हमलावरों के राजनैतिक संरक्षकों को भी थी। सत्ता पक्ष के करीबी कुछ लोगों के नाम आरोपियों द्वारा पुलिस के समक्ष लिए गए हैं। पुलिस अब इन नामों की भूमिका और इस पूरे मामले में इनकी संलिप्तता की बारिकी से जाँच कर रही है। पुलिस का मानना है कि गिरफ्तार आठ आरोपियों के मोबाईल की जाँच से इनके राजनैतिक आकाओं तक भी पहुँचने के सबूत एकत्रित होंगे।

बिना संरक्षण के संभव नहीं है इतनी बड़ी प्लॉनिंग
पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि गिरफ्तार आरोपियों ने जिन राजनैतिक लोगों के नाम संरक्षक के रूप में लिए हैं उनके बारे में बारिकी से सभी बिंदुओं पर तस्दीक की जा रही है। पुलिस यह भी मान रही है कि बिना राजनैतिक संरक्षण के इतनी दिलेरी से इतनी बड़ी अपराध की योजना का क्रियान्वयन मुुमकिन नहीं हैं।


सजायाफ्ता डॉ. अमित खरे का अस्पताल सील करने पहुँचे गोरखपुर एसडीएम
(जय लोक)। पाँच लोगों के हत्याकांड में प्रमुख आरोपी के रूप में गिरफ्तार हुआ स्मार्ट सिटी हॉस्पिटल का संचालक डॉक्टर अमित खरे पुराना अपराधी है। वह इसके पूर्व में वैदिका हत्याकांड में अपनी भूमिका के लिए दो साल की सजा काट चुका है। बीमा क्लेम में फर्जीवाड़े को लेकर भी इसके ऊपर गंभीर आरोप लगे हैं। अन्य जिलों से आने वाले मरीजों को जबरदस्ती अपने अस्पताल में लाने के लिए वो एम्बुलेंस संचालकों से मारपीट और धमकाने का आरोपी भी है। गलत उपचार और अधिक पैसे लेने के एक मामले में मेडिकल कॉलेज के पास एक व्यक्ति पर जानलेवा हमला करने के मामले में भी डॉ. अमित खरे जेल जा चुका है। इसका महानद्दा के पास स्थित स्मार्ट सिटी अस्पताल किराए के भवन में संचालित था जिसे आज सील करने की कार्रवाही की गई है।
गोरखपुर एसडीएम अनुराग ङ्क्षसह ने जयलोक को बताया कि प्रशासनिक निर्देशों के परिपालन में जिला प्रशासन, नगर निगम, स्वास्थ्य विभाग, पुलिस विभाग की संयुक्त टीम ने स्मार्ट सिटी अस्पताल में दबिश देकर जाँच पड़ताल कर कार्रवाही की।
डॉ. खरे ने कहा था- हाईवा के पिछले चके से कुचलना – नरसिंहपुर पुलिस के द्वारा गिरफ्तार किए गए हत्याकांड के 8 आरोपियों से पूछताछ के दौरान इस बात का खुलासा हुआ है कि डॉक्टर के भेष में अमित खरे के अंदर शातिर अपराधी छुपा है। उसने ही घटना के मुख्य आरोपी ट्रक चला रहे आनंद सिंह लोधी से कहा था कि राजेन्द्र पटेल और अन्य पर ऐसे हाईवा चढऩा कि पिछला चका उनको कुचले और हत्या पूरी तरीके से दुघर्टना लगे। डॉ. अमित खरे की राजेन्द्र पटेल से पैसों के लेनदेन को लेकर कुछ समय पहले खटपट हो गई थी और राजेन्द्र पटेल लगातार अमित खरे से पैसों की माँग कर रहा था। आनंद सिंह पटेल का राजेन्द्र पटेल से पुराना विवाद था और दोनों दुश्मन उसे मारने के लिए एक हो गए।
तीन फरार आरोपियों की तलाश – इस मामले में 8 आरोपियों की गिरफ्तार हो चुकी है। शेष तीन आरोपी अनिल, ऋतुराज और प्रीतम अभी भी फरार हैं। पुलिस ने घटना में प्रयुक्त मोबाईल, हाईवा व अन्य वाहन जप्त कर लिए हैं। आरोपियों ने सडक़ दुर्घटना की शक्ल में हत्या की वारदात को अंजाम देने के लिए दो हाईवा तैनात किए थे जो अलग अलग दिशा में थे और मृतकों की रैकी के अनुसार उन्हें घटना को अंजाम देना था।
Author: Jai Lok





