
पेपर माफिया का अरबों का कारोबार?
नई दिल्ली (जयलोक)। देश में प्रतियोगी और भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। विभिन्न रिपोर्टों और जो मामले अभी तक सामने आए हैं।उसके अनुसार, पिछले 12 वर्षों में देशभर में लगभग 116 परीक्षा प्रश्नपत्र लीक होने की घटनाएं दर्ज की गई हैं। इनमें से पिछले सात वर्षों में ही 65 भर्ती परीक्षाएं पेपर लीक होने तथा परीक्षा अनियमितताओं की चपेट में आईं हैं । इन घटनाओं से 19 राज्यों के लगभग 7.5 करोड़ परीक्षार्थी प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से प्रभावित हुए हैं। इसमें परीक्षा माफिया द्वारा अरबों रुपए अवैध तरीके से कमाए हैं।
पेपर लीक के कारण कई परीक्षाएं रद्द करनी पड़ीं। जबकि अनेक भर्ती प्रक्रियाएं महीनों या वर्षों तक लंबित रहीं। इससे लाखों युवाओं का समय, आर्थिक संसाधन और मानसिक संतुलन प्रभावित हुआ। विशेषज्ञों का मानना है कि पेपर लीक का नेटवर्क अब संगठित अपराध का रूप ले चुका है, जिसमें कोचिंग संचालकों, बिचौलियों, तकनीकी विशेषज्ञों और अन्य लोगों की मिलीभगत से हर साल करोड़ों रुपए का अवैध कारोबार शुरू हो गया है।
जांच एजेंसियों के अनुसार, पेपर माफिया का कारोबार अरबों रुपये तक पहुंच चुका है। केंद्र और राज्य सरकारों ने इस पर अंकुश लगाने के लिए कड़े कानून, डिजिटल सुरक्षा व्यवस्था और परीक्षा केंद्रों की निगरानी बढ़ाने जैसे कदम उठाए हैं। इसके बावजूद पेपर लीक होने की घटनाएं रुक नहीं रही है।युवाओं की मांग है, दोषियों के विरुद्ध त्वरित कार्रवाई, समयबद्ध न्याय और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली सुनिश्चित की जाए। जिससे भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता बहाल हो सके।
Author: Jai Lok





