
नरसिंहपुर/जबलपुर जय लोक । सुआतला थाना क्षेत्र के इंद्रानगर के समीप 19 जुलाई को हुई पांच लोगों की मौत और एक व्यक्ति के घायल होने की दर्दनाक घटना को महज सड़क दुर्घटना मानकर बंद कर देना पुलिस के लिए आसान था, लेकिन घटनास्थल से मिले एक टूटे हुए अंग्रेजी अक्षर ‘ए’ के मोनोग्राम ने पूरी कहानी बदल दी। इसी छोटे से सुराग को आधार बनाकर नरसिंहपुर पुलिस ने तकनीकी और वैज्ञानिक साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज तथा मुखबिर तंत्र की मदद से कथित साजिश का पर्दाफाश करते हुए मुख्य आरोपी सहित कुल 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जबलपुर जिले का एक बदनाम आपराधिक छवि वाला डॉक्टर अमित खरे भी आरोपियों में शामिल है ।पुलिस के अनुसार, 19 जुलाई की रात तेज रफ्तार हाईवा ने सड़क किनारे खड़े 6-7 लोगों को टक्कर मार दी थी। हादसे में राजेन्द्र पटेल की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि अन्य चार लोगों ने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। एक घायल का उपचार जारी है।

एसपी ने खुद संभाली जांच की कमान
घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक डॉ. ऋषिकेश मीना और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक संदीप भूरिया तत्काल घटनास्थल पहुंचे। अधिकारियों ने करीब 4-5 घंटे तक घटनास्थल, आसपास के क्षेत्र और स्थानीय रहवासियों से बातचीत कर साक्ष्य जुटाए। प्रारंभिक तौर पर मामला सड़क दुर्घटना का प्रतीत हुआ, लेकिन घटनास्थल के सूक्ष्म निरीक्षण में मिला टूटा हुआ मोनोग्राम पुलिस की जांच का सबसे अहम सुराग बन गया।

जंगल में छिपाया था हाईवा
पुलिस के मुताबिक, घटनास्थल से मिले मोनोग्राम के आधार पर वाहन के टाटा कंपनी का होने की संभावना सामने आई। इसके बाद पुलिस टीमों ने शाहपुरा, जबलपुर से लेकर घटनास्थल और राजमार्ग के विभिन्न चौराहों पर लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले। घंटों की पड़ताल, तकनीकी विश्लेषण और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर पुलिस घटना में प्रयुक्त हाईवा डंपर तक पहुंची। यह वाहन हीरापुर-बंदरोहा के जंगलों में छिपा मिला, जिसके बाद जांच ने निर्णायक मोड़ ले लिया।


पूछताछ में सामने आई कथित हत्या की साजिश
पुलिस जांच में राजा पटेल की गतिविधियां संदिग्ध पाए जाने पर उसे अभिरक्षा में लेकर पूछताछ की गई। पुलिस के अनुसार, पूछताछ में मृतक राजेन्द्र पटेल और मुख्य आरोपी आनंद पटेल के बीच लंबे समय से चली आ रही कथित रंजिश का खुलासा हुआ। आरोप है कि इसी रंजिश के कारण मृतक की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही थी और उसकी लोकेशन की जानकारी मुख्य आरोपी तक पहुंचाई जा रही थी।
पुलिस के मुताबिक, घटना वाले दिन मृतक की लोकेशन और पहचान संबंधी जानकारी मोबाइल फोन के माध्यम से मुख्य आरोपी को उपलब्ध कराई गई। इसके बाद कथित पूर्व नियोजित साजिश के तहत दो हाईवा डंपरों को अलग-अलग दिशाओं में तैनात किया गया था, ताकि मृतक की लोकेशन के अनुसार वारदात को अंजाम दिया जा सके। पुलिस का दावा है कि मौका मिलते ही हाईवा से राजेन्द्र पटेल और उसके साथियों को टक्कर मारी गई। घटना के बाद आरोपियों ने कथित तौर पर इसे सड़क दुर्घटना का रूप देने का प्रयास किया। साजिश का खुलासा होने के बाद पुलिस ने भरत पटेल और अनिल पटेल को गिरफ्तार किया। इसके बाद अन्य आरोपियों की तलाश में पुलिस टीमों ने रातभर जंगलों में सर्च ऑपरेशन चलाया और दबिश देकर अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया।
मुख्य आरोपी समेत 8 गिरफ्तार
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों में आनंद पटेल (लोधी), अनुज पटेल, अरविन्द पटेल, भरत पटेल, अनिल पटेल, नरेन्द्र ठाकुर और डॉ अमित खरे सहित कुल 8 आरोपी शामिल हैं। पुलिस ने आरोपियों की कथित भूमिकाओं के संबंध में विस्तृत जानकारी भी दी है।
हाईवा,थार, फॉर्च्यूनर और मोबाइल फोन जब्त
आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने घटना में प्रयुक्त हाईवा डंपर के अलावा काले रंग की महिंद्रा थार, सफेद रंग की टोयोटा फॉर्च्यूनर और घटना में प्रयुक्त मोबाइल फोन जब्त किए हैं। आरोपियों के विरुद्ध धारा 105, 109(1), 103, 61(2)(क) एवं 249 बीएनएस के तहत प्रकरण दर्ज कर विवेचना जारी है।
पुलिस टीम की रही अहम भूमिका
इस चुनौतीपूर्ण और संवेदनशील मामले के खुलासे में एसडीओपी तेंदूखेड़ा अभिनव मिश्रा, एसडीओपी नरसिंहपुर मनोज गुप्ता, उप पुलिस अधीक्षक उमेश तिवारी सहित निरीक्षक गौरव चाटे, निरीक्षक किशोर वामनकर, निरीक्षक प्रियंका केवट, उप निरीक्षक मनीष मरावी, उप निरीक्षक आशीष बोपचे, सहायक उप निरीक्षक सुमित तिवारी सहित पुलिस टीम के अन्य अधिकारियों एवं कर्मचारियों की विशेष भूमिका रही।
एक छोटे से टूटे मोनोग्राम से शुरू हुई जाँच ने आखिरकार उस कथित साजिश तक पहुंच बना दी, जिसे सड़क दुर्घटना का रूप देने की कोशिश की जा रही थी। नरसिंहपुर पुलिस की इस कार्रवाई ने एक बार फिर साबित किया कि अपराधी कितना भी शातिर क्यों न हो, घटनास्थल पर छूटा छोटा-सा सुराग भी कानून के हाथों तक पहुंचने का रास्ता खोल सकता है।
Author: Jai Lok





